लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा राष्ट्रीय साइबर अपराध सुरक्षा जागरूकता माह के तहत बैंक अधिकारियों एवं कर्मचारियों में साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की रोकथाम एवं त्वरित कार्रवाई के उद्देश्य से एक विशेष जागरूकता कार्यशाला का आयोजन गोमतीनगर में स्थित बैंक के अंचल कार्यालय में किया गया।
कार्यशाला की अध्यक्षता शैलेन्द्र कुमार सिंह (महाप्रबंधक एवं अंचल प्रमुख, लखनऊ अंचल, बैंक ऑफ बड़ौदा तथा संयोजक, एसएलबीसी, उत्तर प्रदेश) द्वारा की गई। कार्यशाला में राजेश कुमार यादव (IPS, पुलिस अधीक्षक, साइबर क्राइम, उत्तर प्रदेश) मुख्य अतिथि/विशेष वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। साथ ही अरुण कुमार (उप पुलिस अधीक्षक, साइबर क्राइम, उत्तर प्रदेश) ने भी प्रतिभागियों को साइबर अपराधों की रोकथाम एवं प्रभावी कार्यवाही के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। बैठक में बैंक के अंचल एवं क्षेत्रीय कार्यालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सहभागिता की।
राजेश कुमार यादव ने प्रतिभागियों को बताया कि साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की जानकारी मिलते ही प्रत्येक मिनट महत्वपूर्ण है। उन्होंने पीड़ित को तत्काल बैंक को सूचित करने, राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करने तथा National Cyber Crime Reporting Portal (cybercrime.gov.in) पर शिकायत दर्ज करने की सलाह दी गई। बैंक अधिकारियों को वित्तीय लेनदेन विवरण प्राप्त कर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार Fraud/Cyber Team को तत्काल सूचित करने, संबंधित बैंक के साथ समन्वय करने तथा धनराशि पर hold/freeze संबंधी कार्रवाई के लिए आवश्यक कदम उठाने पर जोर दिया।

कार्यशाला में बैंक अधिकारियों के लिए पावरपोईंट के माध्यम से महत्वपूर्ण चरणों को रेखांकित किया गया। साथ ही अधिकारियों को ग्राहकों के साथ संवेदनशील व्यवहार करने तथा I4C एवं बैंक की निर्धारित SOP के अनुसार तत्काल कार्रवाई करने के लिए प्रेरित किया गया।
शैलेन्द्र कुमार सिंह ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधों से सुरक्षा बैंकिंग क्षेत्र की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बन गई है। बैंक अधिकारियों को न केवल स्वयं साइबर अपराधों के प्रति जागरूक रहना चाहिए, बल्कि ग्राहकों को भी सुरक्षित डिजिटल बैंकिंग व्यवहार के लिए निरंतर जागरूक करना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से साइबर धोखाधड़ी के मामलों में त्वरित रिपोर्टिंग, प्रभावी समन्वय एवं निर्धारित प्रक्रिया के अनुपालन को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि बैंकिंग तंत्र, पुलिस एवं साइबर अपराध से संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय से साइबर वित्तीय धोखाधड़ी पर प्रभावी अंकुश लगाने हेतु लखनऊ में Cyber Fraud Mitigation Centre की स्थापना की गई है। उन्होंने सभी अधिकारियों से आग्रह किया कि वे ग्राहकों को OTP, PIN, CVV, Password साझा न करने, अनजान Remote Access Apps इंस्टॉल न करने तथा किसी भी धमकी या लालच में आकर धनराशि हस्तांतरित न करने के संबंध में नियमित रूप से जागरूक करें।
कार्यशाला में साइबर अपराध की रोकथाम के लिए Prevention, Detection, Rapid Response और Recovery के चार प्रमुख स्तंभों पर भी प्रकाश डाला गया। साथ ही साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में त्वरित हस्तक्षेप, अंतर-बैंक समन्वय, साक्ष्यों के संरक्षण तथा कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया गया।
कार्यशाला के अंत में सचिन वर्मा (उप महाप्रबंधक, बैंक ऑफ बड़ौदा, अंचल कार्यालय) ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम बैंक अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने तथा ग्राहकों को सुरक्षित एवं विश्वसनीय डिजिटल बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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