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महिलाओं का दही हांडी में शामिल होना प्रेरणादायक : सिमरन कौर


लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) का फ्री-टू-एयर (एफटीए) हिंदी जनरल एंटरटेनमेंट चैनल अनमोल टीवी अपने पहले ओरिजिनल फिक्शन शो हमारी राधा में त्योहारों का उत्साह बनाए हुए है। जन्माष्टमी के जश्न के दौरान राधा (सिमरन कौर) के घर में भक्ति और ड्रामा का संगम देखने को मिलेगा। एक तरफ राधा लड्डू गोपाल का स्वागत करती है और पूजा की तैयारी करती है।

दूसरी ओर, गैरी के उसे बाहर न ले जा पाने से नाराज शनाया (वैदेही नायर) लड्डू गोपाल के लिए बनाए गए पवित्र चरण चिह्नों को खराब कर देती है। लेकिन उसकी योजना उस समय उलट जाती है, जब वह गलती से गोबर में गिर जाती है। इसके बाद कान्हा के रूप में तैयार कियान दोबारा चरण चिह्न बनाता है और जन्माष्टमी के इस पवित्र उत्सव की पवित्रता को फिर से कायम करता है।

जन्माष्टमी के जश्न के बीच, सिमरन कौर ने अपने बचपन की यादों को ताज़ा करते हुए इस त्योहार को मनाने के दिनों को याद किया। उन्हें खास तौर पर वह दृश्य आज भी याद है, जब महिलाएं एक साथ आकर उसी उत्साह और जोश के साथ दही हांडी फोड़ने में हिस्सा लेती थीं।

जन्माष्टमी उनके लिए क्या मायने रखती है, इस बारे में सिमरन कौर कहती हैं, “जन्माष्टमी हमेशा से मेरे दिल के बेहद करीब रही है। मुझे आज भी याद है कि बचपन में मैं नाटकों में हिस्सा लेती थी और राधा का किरदार निभाती थी। उस उम्र में भी मुझे राधा का किरदार निभाने से जुड़ी पवित्रता और खूबसूरती महसूस होती थी। बड़े होने के साथ मैंने दही हांडी के रंग-बिरंगे जश्न भी देखे और मुझे याद है कि बड़ी-बड़ी मानव पिरामिड बनाकर मटकी फोड़ने की कोशिश करते गोविंदा को देखकर मैं थोड़ा डर जाती थी। हालांकि, जो बात मुझे हमेशा आकर्षित करती थी, वह थी महिलाओं का एक साथ आना और उसी जोश व उत्साह के साथ दही हांडी फोड़ने में हिस्सा लेना। यह इस बात की खूबसूरत याद दिलाता था कि महिलाएं भी उतनी ही मजबूत और सक्षम हैं और किसी भी चुनौती का सामना कर सकती हैं।”

सिमरन के लिए जन्माष्टमी आज भी उनके बचपन की गर्मजोशी और मासूमियत को याद दिलाती है, जिससे यह त्योहार हर साल उनके लिए एक खास और यादगार अवसर बन जाता है। जन्माष्टमी का जश्न उन्हें बचपन में बिताए उन खूबसूरत पलों की याद दिलाता है, जब वह इन त्योहारों का आनंद लेती थीं और अपने प्रियजनों के साथ मिलकर खास मौकों को मनाने की खुशी महसूस करती थीं।