लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। उत्तर प्रदेश ने फ्रैंकफर्ट (जर्मनी) के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को एक ठोस वैश्विक मंच पर उतारने की दिशा में मंगलवार को एक बड़ा कदम उठाया। इसके तहत राज्य सरकार ने एक संरचित ‘इंडो-जर्मन गेटवे कार्यक्रम’ को आगे बढ़ाया है। जिसके माध्यम से प्रदेश के 20 प्रमुख एमएसएमई (MSME) और स्टार्टअप्स को जर्मनी तथा व्यापक यूरोपीय बाजारों में प्रवेश के लिए तैयार किया जाएगा। यह पहल राज्य के निर्यात, औद्योगिक निवेश, तकनीकी हस्तांतरण और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को नई मजबूती प्रदान करेगी, जिससे उत्तर प्रदेश अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए एक अधिक प्रतिस्पर्धी निवेश केंद्र के रूप में उभरेगा।

इस दिशा में जर्मन इंडियन बिजनेस एलायंस (GIBA) और इनोवेशन हब राइनमाइन के प्रतिनिधियों वाला एक उच्चस्तरीय जर्मन प्रतिनिधिमंडल लखनऊ पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल की यात्रा का उद्देश्य 23 फरवरी, 2026 को फ्रैंकफर्ट में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की उपस्थिति में इन्वेस्ट यूपी और GIBA के बीच आदान-प्रदान किए गए समझौता ज्ञापन (MoU) के क्रियान्वयन को आगे बढ़ाना था।
प्रतिनिधिमंडल ने फ्रैंकफर्ट समझौता (एमओयू) के तहत हुई प्रगति की समीक्षा की और एमएसएमई, स्टार्टअप्स, नवाचार, विनिर्माण, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, नागरिक उड्डयन तथा अन्य उभरते क्षेत्रों में इसके क्रियान्वयन की संभावनाओं पर चर्चा की।

प्रतिनिधिमंडल में राउनहाइम के मेयर डेविड रेंडेल, इनोवेशन हब राइनमाइन के सीईओ स्टीफन विटेकिंड, GIBA के सीईओ निर्मल रमन कन्नैयन और GIBA के चेयरमैन सेल्वाकुमार पेरियासामी शामिल थे। इन्वेस्ट यूपी में आयोजित बैठक में प्रमुख सचिव, MSME एवं निर्यात प्रोत्साहन शशि लाल भूषण तथा आयुक्त एवं निदेशक उद्योग के.वी. पांडियन भी उपस्थित रहे।
उत्तर प्रदेश के उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय और जर्मन इंडियन बिजनेस एलायंस (GIBA) के बीच एमएसएमई की वैश्विक बाजार पहुंच और अंतरराष्ट्रीय विस्तार को बढ़ावा देने के लिए समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। इंडो-जर्मन गेटवे कार्यक्रम निर्यात के लिए तैयार और विकासोन्मुख उद्यमों को जर्मनी तथा यूरोप में एक मजबूत व्यावसायिक उपस्थिति स्थापित करने के लिए एक संरचित ढांचा प्रदान करेगा।
इसके तहत प्रस्तावित इंडो-जर्मन MSME एवं एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन डेस्क स्थानीय इकाइयों को निवेश, तकनीकी सहयोग और जर्मनी में व्यावसायिक अवसरों के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान करेगा। साझेदारी के तहत गाजियाबाद कॉमन फैसिलिटी सेंटर के आधुनिकीकरण में भी जर्मन प्रिसिजन इंजीनियरिंग और उन्नत विनिर्माण विशेषज्ञता का उपयोग किया जाएगा।

संयुक्त कार्यशालाओं के माध्यम से यूरोपीय संघ के व्यापार नियमों, जर्मन आयात मानकों, निर्यात दस्तावेजीकरण और स्थिरता से जुड़े मानकों पर क्षमता निर्माण किया जाएगा। यह पहल ODOP, MSME नीति-2022 और मार्केट डेवलपमेंट असिस्टेंस जैसी राज्य सरकार की प्रमुख योजनाओं के अनुरूप होगी तथा प्रस्तावित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते से मिलने वाले अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने पर भी केंद्रित रहेगी।

प्रमुख सचिव, एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन शशि लाल भूषण ने कहा कि वर्ष 2026 भारत-जर्मनी संबंधों के लिए एक ऐतिहासिक वर्ष है, क्योंकि यह दोनों देशों के राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष और रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जर्मनी यूरोपीय संघ में भारत का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है और भारत में 2,000 से अधिक जर्मन कंपनियां कार्यरत हैं, जो उत्तर प्रदेश के उद्यमों के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करती हैं।

उन्होंने कहा, “अब इस समझौते (एमओयू) को व्यावहारिक व्यावसायिक परिणामों में बदलना होगा। हमारा लक्ष्य सक्षम एमएसएमई और स्टार्टअप्स को अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए तैयार करना और दीर्घकालिक व्यावसायिक साझेदारियां विकसित करना है।”
प्रस्तावित इंडो-जर्मन गिफ्ट कार्यक्रम के तहत 12 से 20 चयनित उद्यमों का एक पायलट समूह बनाया जायेगा, जो 12 महीने की संरचित प्रक्षिक्षण प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसमें उद्यम मूल्यांकन, बाजार प्रवेश से पूर्व तैयारी, जर्मन बाजार का सत्यापन, बाजार में स्थापना और प्रवेश के बाद सहयोग शामिल होगा। उद्यमों का चयन उनकी निर्यात क्षमता, यूरोपीय बाजारों में संभावनाओं, वित्तीय क्षमता, प्रबंधन की प्रतिबद्धता और नियामकीय तैयारियों के आधार पर किया जाएगा।
राउनहाइम के मेयर डेविड रेंडेल ने एक स्पष्ट संस्थागत ढांचे की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इनोवेशन हब राइनमाइन जर्मनी में लैंडिंग प्लेटफॉर्म की भूमिका निभाएगा, GIBA उद्योग जगत के साथ समन्वय करेगा और इन्वेस्ट यूपी सरकारी सहयोग तथा निवेशक सहायता प्रदान करेगा।

जर्मन प्रतिनिधिमंडल ने उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से भी मुलाकात की। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि द्विपक्षीय साझेदारियों को ठोस परियोजनाओं, निवेश और मापनीय व्यावसायिक परिणामों में बदलना आवश्यक है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के व्यापक औद्योगिक भूमि बैंक, 36 से अधिक क्षेत्रीय नीतियों और निवेशक-अनुकूल वातावरण का उल्लेख करते हुए जर्मन कंपनियों से प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में अधिक सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।
आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील कुमार शर्मा के साथ बैठक में जर्मन प्रतिनिधिमंडल ने प्रौद्योगिकी और विनिर्माण क्षेत्र में अवसरों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश का स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से विकसित हुआ है और वर्ष 2017 में केवल दो इन्क्यूबेटर्स से आगे बढ़कर आज राज्य में 24,000 से अधिक स्टार्टअप्स का मजबूत नेटवर्क तैयार हो चुका है। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिकल डिवाइसेज, फार्मास्यूटिकल्स और उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों में भी तेजी से विस्तार हो रहा है।

एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने राज्य के मजबूत हो रहे लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, निवेश प्रोत्साहनों और MSME नीति-2022 की प्रमुख विशेषताओं को रेखांकित किया। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि प्रस्तावित MSME पार्कों और प्लॉटेड फैक्ट्री इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से निवेशकों को पूर्ण सहयोग दिया जाएगा। साथ ही GeM पोर्टल के माध्यम से पारदर्शी भूमि आवंटन व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री कार्यालय के विशेष सचिव एवं निदेशक, नागरिक उड्डयन निखिल टीकाराम फुंडे के साथ भी एक अलग बैठक आयोजित की गई। इन्वेस्ट यूपी में हुई इस बैठक में जर्मन प्रतिनिधिमंडल ने नागरिक उड्डयन और संबद्ध क्षेत्रों में निवेश एवं सहयोग की संभावनाओं, भविष्य की तकनीकी साझेदारियों और उद्योग आधारित सहयोग के अवसरों पर विस्तार से चर्चा की।
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