लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी दुबई इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर “डीआईएफ़सी” शाखा के माध्यम से, सफलतापूर्वक 600 मिलियन अमेरिकी डॉलर के डूअल ट्रांच आरईजी एस सीनियर अनसिक्योर्ड नोट्स जारी किए। जिसमें 3-वर्षीय नोट के 300 मिलियन अमेरिकी डॉलर और 5-वर्ष के नोट के 300 मिलियन अमेरिकी डॉलर शामिल हैं। इन बांडों को एस&पी द्वारा बीबीबी और फिच द्वारा बीबीबी- रेटिंग प्रदान की गई है।
- यूएसटी + 93 बीपीएस परिपक्वता वर्ष 2029 पर यूएस $ 300 मिलियन
- यूएसटी + 102 बीपीएस, परिपक्वता वर्ष 2031 पर यूएस $ 300 मिलियन
इन नोटों को गिफ्ट सिटी आईएफएससी में एनएसई IX पर सूचीबद्ध किया जाना अपेक्षित है और इन्हें बैंक के सीनियर अनसिक्योर्ड दायित्वों के रूप में संरचित किया गया है।
इस निर्गमन को वैश्विक निवेशकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली और इसे लगभग सात गुना अधिक सब्सक्राइब किया गया। जो विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों और निवेशक वर्गों में इसकी मजबूत मांग को दर्शाता है। निवेशकों की जबरदस्त भागीदारी बैंक की वित्तीय ताकत, आघात सहनीय आस्ति गुणवत्ता, बेहतर लाभप्रदता और भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण में अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के विश्वास को प्रदर्शित करता है।
3 वर्षीय ट्रांच को मुख्यत: एशिया (74%) को आबंटित किया गया, जिसके बाद ईएमईए (25%) और ऑफशोर यूएस (1%) का स्थान रहा, निवेशक वर्गों में फंड प्रबंधक (78%) और बैंक (14%) की हस्सेदारी सर्वाधिक रही। 5 वर्षीय ट्रांच में एशिया को 66%, ईएमईए को 33% और ऑफशोर यूएस को 1% आबंटित किया गया, जिसमें फंड मैनेजर (72%), बैंक (14%), और बीमा/एसडब्ल्यूएफ निवेशक (11%) की अधिकांश मांग रही।
बॉन्ड जारी करने के प्रति निवेशकों की असाधारण प्रतिक्रिया इस भरोसे को प्रदर्शित करती है कि वैश्विक निवेशक भारत की विकास गाथा की दिशा में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया द्वारा अपनाई गई कार्यनीतिक दिशा में विश्वास रखते हैं। इस लेनदेन का सफल निष्पादन अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजारों तक हमारी पहुंच को सुदृढ़ करता है और बैंक के वित्त पोषण स्रोतों में और विविधता लाता है। इस सफल फंड जुटाने के साथ, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया भारत के अग्रणी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में से एक के रूप में अपनी स्थिति को और सुदृढ़ कर रहा है। जो एक विवेकपूर्ण और विविध फंडिंग कार्यनीति बनाए रखते हुए आर्थिक विकास को समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है।
यह ऐतिहासिक सफल लेन-देन 12 वर्षों के बाद अमेरिकी डॉलर के बॉन्ड बाजार में बैंक की वापसी को चिह्नित करता है। जो भारत के अग्रणी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में से एक के रूप में बैंक की सुदृढ़ स्थिति की पुन: पुष्टि करता है तथा हितधारकों के निरंतर विश्वास को रेखांकित करता है। बार्कलेज़ बैंक पीएलसी, सिटीग्रुप, एचएसबीसी, मशरेक, स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक ने इस ड्रॉडाउन के लिए संयुक्त वैश्विक समन्वयक और संयुक्त बुकरनर के रूप में कार्य किया।
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