लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। उत्तर प्रदेश और जापान ने जापान–भारत बिजनेस नेटवर्किंग कार्यक्रम में खाद्य प्रसंस्करण, वैल्यू एडिशन और वैश्विक बाजारों तक पहुंच के क्षेत्र में सहयोग की नई संभावनाओं पर चर्चा की। यह कार्यक्रम इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में यामानाशी प्रीफेक्चर के सहयोग से आयोजित किया गया।
“From Farm Gate to Global Plate: Unlocking UP’s Food Processing Revolution – Leveraging State’s Agricultural Strength for Global Food Markets” विषयक सत्र में सरकार और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने उत्तर प्रदेश के विशाल कृषि आधार को आधुनिक प्रसंस्करण, जापानी तकनीक, प्रभावी सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने पर विचार-विमर्श किया।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने विशेष संबोधन दिया, जबकि भारत में जापान के राजदूत ओनो केइची ने मुख्य वक्तव्य दिया। सत्र में किक्कोमन इंडिया के निदेशक हैरी हकुई कोसाटो, गोल्डी ग्रुप के निदेशक सुदीप गोयनका और अमूल (बनास डेयरी) के यूपी ऑपरेशंस प्रमुख दिनेश कुमार चौधरी ने भी भाग लिया।

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, “हमारा लक्ष्य स्पष्ट है—उत्तर प्रदेश के खाद्य उत्पाद दुनिया भर की डाइनिंग टेबल तक पहुंचें। उपजाऊ भूमि, पर्याप्त जल संसाधन, मेहनतकश किसान और युवा कार्यबल के साथ राज्य में वैश्विक खाद्य प्रसंस्करण हब बनने की क्षमता है। जापान की उन्नत तकनीक, गुणवत्ता मानक और विशेषज्ञता हमारे कृषि उत्पादों में वैल्यू एडिशन, सप्लाई चेन को मजबूत करने और नए अंतरराष्ट्रीय बाजार खोलने में मदद कर सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने निवेश-अनुकूल नीतियों, प्रोत्साहनों और आधुनिक लॉजिस्टिक्स का मजबूत इकोसिस्टम तैयार किया है। हम जापानी कंपनियों को उत्तर प्रदेश में निवेश, नवाचार और विकास के लिए आमंत्रित करते हैं।”

जापान ने यूपी को दीर्घकालिक खाद्य और विनिर्माण साझेदार के रूप में देखा
राजदूत ओनो केइची ने खाद्य प्रसंस्करण, तकनीक और मानव संसाधन विकास में जापान–उत्तर प्रदेश सहयोग को और गहरा करने की संभावनाओं पर जोर दिया। ओनो केइची (भारत में जापान के राजदूत) ने कहा, “उत्तर प्रदेश की कृषि शक्ति, औद्योगिक आधार और प्रतिभाशाली मानव संसाधन जापानी कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं। हमें ऐसी व्यावहारिक साझेदारियां विकसित करनी चाहिए, जो तकनीक, निवेश और कौशल को स्थानीय अवसरों से जोड़ें और दोनों पक्षों के लिए दीर्घकालिक मूल्य का निर्माण करें।”

किक्कोमन इंडिया के निदेशक हैरी हकुई कोसाटो ने भारत के प्रति जापान की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए कहा कि जापानी कंपनियों को भारतीय उपभोक्ताओं की पसंद और जरूरतों के अनुरूप अपने उत्पादों को ढालना होगा। उन्होंने भारत में जापानी और पैन-एशियन व्यंजनों की बढ़ती स्वीकार्यता तथा B2B से B2C बाजारों में विस्तार की संभावनाओं का उल्लेख किया।
कोसाटो ने उत्तर प्रदेश में स्थानीय विनिर्माण की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला और कहा कि भारत पड़ोसी तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए संभावित निर्यात केंद्र बन सकता है।
सत्र में खाद्य प्रसंस्करण, स्थानीयकरण, तकनीक, सप्लाई चेन और बाजार तक पहुंच को जापान–उत्तर प्रदेश सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया गया। इससे प्रदेश की कृषि शक्ति को उच्च-मूल्य उत्पादन, मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी खाद्य कारोबार में बदलने के साथ जापानी निवेश और तकनीकी साझेदारी के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है।
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