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टीबी, कुपोषण और फाइलेरिया उन्मूलन पर एकजुट हुए विधायक और स्वास्थ्य विशेषज्ञ

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। ‘स्वस्थ उत्तर प्रदेश’ के निर्माण के संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से विधानमंडल सदस्यों के साथ तीसरी राज्य गठबंधन बैठक का आयोजन किया गया। उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना की अध्यक्षता में कार्यक्रम का आयोजन ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटेजीज द्वारा किया गया।

बैठक के दौरान राज्य में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने और जनस्वास्थ्य संबंधी प्राथमिकताओं पर राज्य विधानमंडल के सदस्यों के साथ रणनीति साझा करना, प्रदेश के नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों के बीच समन्वय स्थापित करना, कालाजार,टीबी,फाइलेरिया जैसे संचारी रोगों के खिलाफ प्रभावी रणनीति हेतु कार्य करना जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।

विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि स्वस्थ उत्तर प्रदेश का निर्माण केवल सरकार के प्रयासों से नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों, स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन और समाज की सामूहिक भागीदारी से ही संभव है। उन्होंने कहा कि विधायक अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में स्वास्थ्य कार्यक्रमों की नियमित समीक्षा करें, जनजागरूकता बढ़ाएं तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।  उन्होंने टीबी, कुपोषण, एनीमिया, फाइलेरिया, कालाजार और टीकाकरण जैसे मुद्दों को जनआंदोलन का स्वरूप देने की आवश्यकता पर बल दिया। 

इस अवसर पर लखनऊ उत्तर के विधायक डा. नीरज बोरा ने कहा कि जनप्रतिनिधि स्वास्थ्य योजनाओं और आम जनता के बीच सबसे मजबूत कड़ी हैं। यदि विधायक अपने क्षेत्रों में स्वास्थ्य कार्यक्रमों की नियमित समीक्षा करें, स्वास्थ्य संस्थानों का भ्रमण करें तथा समुदाय के साथ संवाद बढ़ाएं, तो जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रभावशीलता में उल्लेखनीय सुधार लाया जा सकता है।

एसजीपीजीआई, लखनऊ की चीफ डायटीशियन, डॉ. रमा त्रिपाठी ने कहा कि कुपोषण केवल स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास का भी विषय है। उन्होंने संतुलित आहार, पोषण संबंधी जागरूकता, आंगनबाड़ी सेवाओं के प्रभावी संचालन तथा विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों को कुपोषण की रोकथाम के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से अपने क्षेत्रों में पोषण अभियानों को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।

केजीएमयू, लखनऊ की प्रो. अंजू अग्रवाल ने कहा कि मातृ एनीमिया मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती है। उन्होंने गर्भवती महिलाओं में समय पर जांच, आयरन-फोलिक एसिड की गोलियों का नियमित सेवन, संतुलित भोजन तथा जागरूकता बढ़ाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि समुदाय में जागरूकता बढ़ाकर इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। इसके साथ ही गंभीर एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए आईवी-एफसीएम उपचार की शुरुआत की है। इसकी केवल 1 ख़ुराक से  गंभीर एनीमिया वाली गर्भवती महिलाओं में खून की कमी को तेजी से दूर करने में मदद मिलती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के डॉ. तनुज शर्मा ने कहा कि फाइलेरिया और कालाजार जैसी बीमारियों के उन्मूलन के लिए दवा सेवन अभियान, समय पर पहचान और सामुदायिक सहयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से इन अभियानों में सक्रिय सहयोग देने और लोगों को दवा का पूरा सेवन करने के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया।

पाथ के डॉ. शोएब अनवर ने कहा कि सरकार, स्वास्थ्य विभाग, विकास सहयोगी संस्थाओं और समुदाय के संयुक्त प्रयासों से इन बीमारियों के उन्मूलन का लक्ष्य तेजी से प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने स्थानीय स्तर पर जागरूकता और जनसहभागिता को और मजबूत बनाने पर जोर दिया।

केजीएमयू के प्रो. सूर्यकांत ने कहा कि टीबी का समय पर पता लगना, नियमित एवं पूरा उपचार तथा मरीजों को पोषण और सामाजिक सहयोग उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों के सहयोग से टीबी के प्रति सामाजिक भेदभाव कम किया जा सकता है तथा मरीजों को समय पर उपचार के लिए प्रेरित किया जा सकता है।

आरएमएलआईएमएस, लखनऊ के प्रो. अरविंद सिंह ने कहा कि टीकाकरण बच्चों और माताओं को कई गंभीर बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि समाज में फैली भ्रांतियों को दूर कर प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक टीकाकरण की पहुंच सुनिश्चित करना आवश्यक है। इसमें जनप्रतिनिधियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। 

गेट्स फाउंडेशन के डा. भूपेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य परिणाम तभी संभव हैं जब स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, पंचायती राज, शिक्षा, ग्रामीण विकास और अन्य विभाग मिलकर कार्य करें। उन्होंने समुदाय आधारित प्रयासों, स्थानीय नेतृत्व और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी को जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों की सफलता का आधार बताया।

बैठक के समापन से पूर्व डॉ. नीरज बोरा ने चर्चा के प्रमुख बिंदुओं एवं आगामी कार्ययोजना का सार प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि अपने विधानसभा क्षेत्रों में स्वास्थ्य कार्यक्रमों की नियमित समीक्षा, विभागीय समन्वय को मजबूत करने, जनजागरूकता अभियान चलाने, नवाचारों को प्रोत्साहित करने तथा जिला एवं विधानसभा स्तर पर स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों की प्रभावी पैरवी कर उत्तर प्रदेश को स्वस्थ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। बैठक में उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने भी विभिन्न जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों को और प्रभावी बनाने के लिए अपने सुझाव साझा किए तथा स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए सामूहिक प्रयासों की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

बैठक में प्रदेश के विधायकगण, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं तथा सहयोगी संस्थाओं विश्व स्वास्थ्य संगठन,पाथ, सीफार, पीसीआई, ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटेजीज संस्था के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।