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डायरिया के खिलाफ जंग तेज, ‘स्टॉप डायरिया अभियान’ का हुआ आगाज

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों को डायरिया से पूरी तरह सुरक्षित बनाने और बाल मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से प्रदेश में आगामी 25 अगस्त तक डायरिया रोको अभियान (स्टॉप डायरिया कैम्पेन) चलाया जा रहा है। इसी के तहत वर्ल्ड ओआरएस डे पर बुधवार को नगरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, अलीगंज से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण निदेशालय-उत्तर प्रदेश के संयुक्त निदेशक- प्रजनन और बाल स्वास्थ्य (आरसीएच) डॉ. ए.के. सिंह ने मिड मीडिया कैम्पेन का विधिवत शुभारम्भ किया। अभियान में पापुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल इंडिया (पीएसआई इंडिया) और केनव्यू “डायरिया से डर नहीं” कार्यक्रम के माध्यम से सहयोग प्रदान कर रहीं हैं।

इस मौके पर डॉ. ए. के. सिंह व अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने डायरिया से बचाव, कारण, उपचार और रोकथाम सम्बन्धी संदेशों वाले पोस्टर-बैनर और ऑडियो/वीडियो से सुसज्जित प्रचार वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। प्रचार वाहन राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों में समुदाय में डायरिया के प्रति जन जागरूकता लाएंगे। ओआरएस-जिंक कार्नर का शुभारम्भ किया। पौध रोपण कर पर्यावरण संरक्षण का सन्देश भी दिया। 

नुक्कड़ नाटक के माध्यम से भी यह सन्देश दिया गया कि दस्त के दौरान माताएं बच्चों को ओआरएस का घोल व जिंक देने के साथ स्तनपान जारी रखें। इसके साथ ही नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर भी सम्पर्क करें। डॉ. ए.के. सिंह ने कहा कि डायरिया से डरने नहीं बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि इसका उपचार पूरी तरह संभव है। बच्चे को दिन में दो-तीन बार पतली दस्त हो तो ओआरएस का घोल और जिंक जरूर दें, क्योंकि यही इसका सही उपचार है।

हर जरूरतमंद तक ओआरएस और जिंक पहुंचाने का लक्ष्य : डॉ. ए.के. सिंह

डॉ. ए.के. सिंह ने कहा कि यह अभियान बच्चों को डायरिया से होने वाली जटिलताओं और मृत्यु से बचाने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह अभियान प्रत्येक वर्ष चलाया जाता है और इस बार भी पूरे प्रदेश में व्यापक स्तर पर संचालित किया जा रहा है। डॉ. सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में डायरिया से होने वाली मृत्यु को पूरी तरह रोका जा सकता है, बशर्ते समय पर सही उपचार और जागरूकता हो। उन्होंने बताया कि यदि किसी बच्चे को दस्त, उल्टी या लूज मोशन की शिकायत होती है तो उसे तुरंत ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) और जिंक की गोली देना सबसे प्रभावी उपचार है।

उन्होंने बताया कि ओआरएस और जिंक प्रदेश के सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, उपकेंद्रों, आशा कार्यकर्ताओं तथा एएनएम के माध्यम से पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अभियान के दौरान आशा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर विशेष रूप से पांच वर्ष तक के बच्चों वाले परिवारों को ओआरएस और जिंक के पैकेट उपलब्ध कराएंगी तथा उनके उपयोग की जानकारी भी देंगी।

डॉ. सिंह ने कहा कि संचारी रोग नियंत्रण अभियान के दौरान भी स्वास्थ्य विभाग की टीमें नियमित रूप से घर-घर जाकर लोगों को डायरिया से बचाव, स्वच्छता और सुरक्षित पेयजल के प्रति जागरूक करती हैं। उनका उद्देश्य है कि किसी भी बच्चे को डायरिया के कारण गंभीर नुकसान न उठाना पड़े और डायरिया से होने वाली मृत्यु की घटनाएं पूरी तरह समाप्त हों।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि प्रदेश के प्रत्येक जरूरतमंद व्यक्ति तक ओआरएस और जिंक की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि समय रहते उपचार मिल सके। उन्होंने अभियान से जुड़े सभी स्वास्थ्य कर्मियों, आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं तथा सहयोगी संस्थाओं से पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने का आह्वान किया।

डॉ. सिंह ने स्वास्थ्य विभाग की सहयोगी संस्था पीएसआई की सराहना करते हुए कहा कि संस्था विभिन्न जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों में विभाग का निरंतर सहयोग कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी के सामूहिक प्रयासों से डायरिया नियंत्रण अभियान सफल होगा और प्रदेश के बच्चों को सुरक्षित एवं स्वस्थ जीवन प्रदान करने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण निदेशालय-उत्तर प्रदेश के अपर निदेशक नियमित टीकाकरण डॉ. अजय कुमार गुप्ता ने कहा कि इस वर्ष डायरिया रोको अभियान की थीम “स्वच्छ जल, समुचित उपचार-डायरिया से बचें हर बार” तय की गयी है, जो कि सन्देश देती है कि दस्त की स्थिति में जरूरी सावधानी बरती जाए तो उससे बच्चे को सुरक्षित बनाया जा सकता है। इसके अलावा डायरिया से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत शिशुओं को रोटावायरस वैक्सीन दी जाती है, जिससे डायरिया से होने वाली मृत्यु को काफी हद तक रोका जा सकता है।   

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एन.बी. सिंह ने कहा कि बारिश और उमस में बच्चा डायरिया की चपेट में कई कारणों से आ सकता है, जैसे- दूषित जल पीने से, दूषित हाथों से भोजन बनाने या बच्चे को खाना खिलाने, बच्चों के मल का ठीक से निस्तारण न करने आदि से। इसलिए शौच और बच्चों का मल साफ़ करने के बाद, भोजन बनाने और खिलाने से पहले हाथों को साबुन-पानी से अच्छी तरह अवश्य धुलें।  

एनएचएम-यूपी के महाप्रबन्धक बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम डॉ. मिलिंद वर्धन ने कहा कि डायरिया के प्रति समुदाय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने और ओआरएस व जिंक की महत्ता को भलीभांति समझाने के लिए ही पूरे प्रदेश में 25 जून से 25 अगस्त के मध्य बड़े पैमाने पर स्टॉप डायरिया कैम्पेन चलाया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य बच्चों में डायरिया की रोकथाम, ओआरएस व जिंक के उपयोग को प्रोत्साहन और जनसामान्य में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाना है।

अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. बी. एन. यादव ने कहा कि फ्रंटलाइन वर्कर्स माताओं और परिवार वालों को यह भली भांति बताएं कि ओआरएस का घोल और जिंक बच्चे को सिर्फ डायरिया से ही नहीं बचाता बल्कि उनकी जान को भी जोखिम में जाने से बचाता है।

इस मौके पर केनव्यू के पंकज महाजन ने कहा कि वह डायरिया से होने वाली बच्चों की मौत को रोकने को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। इसी को लेकर उत्तर प्रदेश के 13 जिलों में पीएसआई इंडिया के साथ मिलकर ‘डायरिया से डर नहीं’ कार्यक्रम को संचालित करते हुए सरकार के स्टॉप डायरिया कैम्पेन में पूरा सहयोग कर रहे हैं।

नगरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, अलीगंज के अधीक्षक डॉ. हेमंत कुमार ने अपने पूरे स्टाफ के साथ इस अभियान को सफल बनाने का भरोसा दिया। इस मौके पर पीएसआई इंडिया से समरेन्द्र बेहरा, अमित कुमार, पारुल सक्सेना, अनिल द्विवेदी, धर्मेन्द्र त्रिपाठी, विभीषन, प्रवीन कुमार आदि उपस्थित रहे।