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मॉनसून में बढ़ता है हेपेटाइटिस का खतरा, समय पर पहचान और इलाज है जरूरी

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर रीजेंसी हेल्थ ने लोगों से अपील की है कि वे सुरक्षित खान-पान और स्वच्छ पानी की आदतों को अपनाकर और वायरल हेपेटाइटिस के शुरुआती लक्षणों को पहचानकर लीवर की सेहत को प्राथमिकता दें। मॉनसून के दौरान हेपेटाइटिस A और हेपेटाइटिस E जैसे पानी से फैलने वाले संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इस कारण हॉस्पिटल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ज़्यादा जागरूकता, समय पर बीमारी का पता लगाने और बचाव वाली हेल्थकेयर से हेपेटाइटिस के ऐसे संक्रमणों का बोझ काफी कम किया जा सकता है। साथ ही इससे लीवर की सेहत को, खासकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुज़ुर्गों और कमज़ोर इम्यूनिटी वाले लोगों के मामले में लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

इस अवसर पर रीजेंसी हेल्थ लखनऊ के गैस्ट्रोएन्टेरोलॉजी के एसोसिएट डॉयरेक्टर डॉ. प्रवीण झा ने कहा, “बहुत से लोग सोचते हैं कि हेपेटाइटिस से सिर्फ़ पीलिया होता है, लेकिन अक्सर इसकी शुरुआत बुखार, थकान, जी मिचलाना, उल्टी और भूख न लगने जैसे आम लक्षणों से होती है। अक्सर इन लक्षणों को मौसमी बीमारी समझ लिया जाता है। मॉनसून के दौरान दूषित खाना और पीने का पानी हेपेटाइटिस A और E संक्रमण के मुख्य कारण होते हैं। लक्षणों की जल्द पहचान, सुरक्षित खाना और साफ़ पीने का पानी, और समय पर इलाज से गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है, खासकर गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और पहले से लीवर की बीमारी से जूझ रहे लोगों में जल्दी पहचान और इलाज बहुत जरूरी होता है।

उन्होंने लोगों को सलाह दी है कि वे लगातार बुखार, थकान, जी मिचलाना, उल्टी, पेट में बेचैनी, भूख न लगना, गहरे रंग का पेशाब, हल्के रंग का मल और आंखों या त्वचा का पीला पड़ना (पीलिया) जैसे लक्षणों के प्रति सतर्क रहें। जिन लोगों को ये लक्षण दिखें, उन्हें खुद से इलाज करने के बजाय तुरंत डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए, क्योंकि बीमारी का जल्दी पता चलने और समय पर इलाज होने से ठीक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है और लीवर से कोई भी समस्या होने का खतरा कम हो जाता है।