डॉ. एस.के. गोपाल बहुधा हम सबका जीवन एक ही ढर्रे पर चलता दिखाई देता है। मन में यह भाव गहराई से बैठा रहता है कि अभी नहीं, बाद में जिएँगे। अभी तो हालात ठीक नहीं हैं, जिम्मेदारियाँ बहुत हैं, समय अनुकूल नहीं है। जब यह काम हो जाएगा, जब वह …
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