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Tag Archives: Vanishing Paushala culture: Coolness flowing in Lucknow’s memories

लुप्त होती पौशाला संस्कृति : लखनऊ की स्मृतियों में बहती शीतलता

(श्रीधर अग्निहोत्री) एक समय था, जब गर्मियों की तपती दोपहरें केवल धूप की तीव्रता का ही नहीं, बल्कि मानवीय करुणा और सेवा की शीतल छांव का भी अनुभव कराती थीं। कानपुर की गलियों, सड़कों और चौराहों पर सरकंडी से बनी छोटी-छोटी झोपड़ियाँ दिखाई देती थीं—जिन्हें लोग स्नेहपूर्वक पौशाला कहते थे। …

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