(डॉ. एस.के. गोपाल) रीतिकाल के अनेक कवि श्रृंगार के अनूठे शिल्पी रहे हैं, किंतु घनानंद का स्थान उन सबसे अलग और विशिष्ट है। उन्होंने प्रेम का चित्रण केवल काव्य-कौशल के लिए नहीं किया, अपितु उसे जीवन की सबसे बड़ी साधना माना। उनके शब्दों में अलंकारों का चमत्कार नहीं, हृदय की …
Read More »
Telescope Today | टेलीस्कोप टुडे Latest News & Information Portal