लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। आदित्य बिड़ला ग्रुप ने आईएनटी आदित्य बिड़ला परफॉर्मिंग आर्ट्स एकेडमी की शुरुआत की है। जिससे भारत के सबसे पुराने और प्रसिद्ध सांस्कृतिक संस्थानों में से एक को नया रूप और नया उद्देश्य मिला है। यह इंडियन नेशनल थियेटर (आईएनटी) के लिए एक नई शुरुआत है। इस संस्था ने देश की आजादी के पहले से लेकर आज तक कलाकारों और दर्शकों की कई पीढ़ियों को तैयार किया है।
इस एकेडमी का उद्घाटन एकेडमी की चेयरपर्सन राजश्री बिड़ला ने आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला, नीरजा बिड़ला, अनन्या बिड़ला और आर्यमन विक्रम बिड़ला की गरिमामयी उपस्थिति में किया। यह पहल आदित्य बिड़ला समूह के इतिहास की एक खास विशेषता को दर्शाती है। ऐसे संस्थानों का निर्माण करना जो दीर्घकालिक विकासात्मक संपत्ति बन जाते हैं। समूह ने पीढ़ियों से स्कूलों, विश्वविद्यालयों, अस्पतालों, अनुसंधान केंद्रों, सांस्कृतिक संस्थानों और सामुदायिक मंचों के माध्यम से राष्ट्र-निर्माण में निवेश किया है।
आईएनटी का यह नया रूप उसी विरासत को आगे बढ़ाता है, जिससे एक ऐसा स्थान तैयार होगा जहाँ भारत की कलात्मक परंपराओं को भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित, सराहा और नए रूप में प्रस्तुत किया जा सके। यह एकेडमी केवल एक परफॉर्मिंग आर्ट्स केंद्र नहीं है, बल्कि इसे कलात्मक उत्कृष्टता के लिए एक राष्ट्रीय केंद्र के रूप में परिकल्पित किया गया है। यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़े नवाचार और प्रयोगों को बढ़ावा देने के साथ-साथ थिएटर, संगीत और नृत्य के क्षेत्रों में प्रतिभाओं को निखारेगा।
लॉन्च के अवसर पर राजश्री बिड़ला ने कहा, “आईएनटी आदित्य बिड़ला परफॉर्मिंग आर्ट्स एकेडमी, भारत की शानदार कला और संस्कृति को हमारा सलाम है। यह उन अनगिनत लोगों के प्रति सम्मान है, जिन्होंने सालों से हमारी परंपराओं को जिंदा रखा है। यह एकेडमी आदित्य विक्रम बिड़ला की इस सोच को पूरा करती है कि कला, कल्पना और संस्कृति एक अच्छे समाज के लिए बहुत ज़रूरी हैं। हम एक ऐसा संस्थान बनाना चाहते हैं जो हमारी पुरानी और पारंपरिक कलाओं का आदर करे, नए ज़माने की सोच को भी अपनाए और नए कलाकारों को आगे बढ़ने के मौके दे। सबसे बढ़कर, हम उम्मीद करते हैं कि यह एक ऐसा देशव्यापी मंच बने जहाँ भारत के अलग-अलग कोनों से लोग एक साथ आ सकें, एक-दूसरे से सीख सकें और देश में कला के भविष्य को बेहतर बना सकें।”
एकेडमी की सलाहकार परिषद में भारतीय परफॉर्मिंग आर्ट्स के उस्ताद अमजद अली खान, डॉ. एन. राजम, शंकर महादेवन, उल्हास कशालकर, अरुणा साईराम, लालगुड़ी जीजेआर कृष्णन, लुइस बैंक्स, बेला सहगल, यू. राजेश, सिद्धार्थ रॉय कपूर, रजित कपूर, टेरेंस लुईस और क्लिंट वलादारेस शामिल हैं। जिनमें से कई लोग इस लॉन्च में शामिल हुए। इस शाम ने भारत के कलात्मक ताने-बाने की समृद्धि और विविधता का जश्न मनाया।
मुख्य अतिथि, प्रसिद्ध कवि, गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने साइरस साहूकार के साथ एक व्यावहारिक बातचीत की। इस दौरान उन्होंने भारत के सांस्कृतिक विमर्श को आकार देने में बीते अपने जीवन के संस्मरण साझा किए और मजबूती, रचनात्मकता तथा भविष्य की संभावनाओं पर खुलकर बात की।
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