लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। आंचलिक विज्ञान नगरी के SCIMAX में अब दर्शक करोड़ों साल पुराने डायनासोरों की दुनिया का रोमांचक अनुभव ले सकेंगे। 360 डिग्री इमर्सिव तकनीक से तैयार यह फिल्म दर्शकों को प्रागैतिहासिक युग की रोमांचक यात्रा पर ले जाएगी, जहां वे विशालकाय डायनासोरों के जीवन, उनके विकास और विलुप्त होने के रहस्यों को करीब से देख सकते हैं। फिल्म में नवीनतम वैज्ञानिक शोध और आकर्षक दृश्य प्रभावों के जरिए शिक्षा और मनोरंजन का अनूठा संगम देखने को मिलता है। प्रीमियर के दौरान विशेषज्ञों ने भी डायनासोरों से जुड़े रोचक वैज्ञानिक तथ्यों को साझा किया।

आंचलिक विज्ञान नगरी के SCIMAX थिएटर में शुक्रवार को नई SCIMAX फुल डोम फिल्म “द ग्रेट डायनासोर सीक्रेट” का प्रीमियर आयोजित किया गया। जिसके उद्घाटन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि वी.पी. गौर (उप महानिदेशक, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण लखनऊ), विशिष्ट अतिथि डॉ. मुकुंद शर्मा (पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक, बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान लखनऊ) एवं हेमंत कुमार (निदेशक, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण) उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा 300 से अधिक आम नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

नई फिल्म दर्शकों को 360 डिग्री इमर्सिव सिनेमाई अनुभव प्रदान करती है, जो उन्हें डायनासोरों की प्रागैतिहासिक दुनिया की रोमांचक यात्रा पर ले जाती है तथा नवीन वैज्ञानिक खोजों के माध्यम से उनके विकास और इतिहास से परिचित कराती है। फिल्म को दर्शकों द्वारा अत्यंत सराहा गया और विज्ञान, शिक्षा एवं मनोरंजन के अनूठे समन्वय की प्रशंसा की गई।

अपने संबोधन में मुख्य अतिथि भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI), लखनऊ के उप महानिदेशक वी.पी. गौर ने वैज्ञानिक जागरूकता के प्रसार में आंचलिक विज्ञान नगरी, लखनऊ द्वारा किए जा रहे निरंतर प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण कार्यालय विज्ञान नगरी के समीप स्थित होने के कारण वे पिछले 35 वर्षों से इसकी प्रगति के साक्षी रहे हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञान नगरी ने अपनी विभिन्न दीर्घाओं, शैक्षिक कार्यक्रमों, प्रदर्शनों एवं इंटरैक्टिव सुविधाओं के माध्यम से समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने और विज्ञान संचार को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

एक प्रतिष्ठित भूवैज्ञानिक होने के नाते श्री गौर ने डायनासोरों के इतिहास पर रोचक व्याख्यान भी प्रस्तुत किया। उन्होंने डायनासोरों की उत्पत्ति, उनकी शारीरिक संरचना, विकासक्रम तथा विलुप्त होने के कारणों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर इन प्राचीन जीवों के बारे में हमारी समझ लगातार विकसित हो रही है। उनका व्याख्यान उपस्थित दर्शकों, विशेषकर विद्यार्थियों, के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक रहा।

उन्होंने कहा कि यह फिल्म भारत में डायनासोरों के इतिहास, उनके जीवन, विकास और विलुप्ति से जुड़े अनेक रोचक तथ्यों को आमजन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी। उन्होंने कहा कि अधिकांश लोग डायनासोरों के बारे में हॉलीवुड फिल्मों, विशेषकर जुरासिक पार्क के माध्यम से जानते हैं, लेकिन यह फिल्म भारत में पाए गए डायनासोरों और उनसे जुड़ी वैज्ञानिक खोजों पर आधारित है। भारत में हुए जीवाश्म अनुसंधानों ने करोड़ों वर्ष पुराने जीवन के इतिहास के पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और देश को वैश्विक स्तर पर डायनासोर अनुसंधान के प्रमुख केंद्रों में स्थापित किया है।

वी.पी. गौर ने बताया कि भारत के गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सहित कई क्षेत्रों में डायनासोरों के जीवाश्म, अंडे और घोंसले प्राप्त हुए हैं। इन खोजों ने वैज्ञानिकों को न केवल विभिन्न प्रजातियों की पहचान करने में मदद की है, बल्कि उनके प्रजनन व्यवहार, जीवन शैली और पर्यावरण के साथ उनके संबंधों को समझने में भी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराई है। उन्होंने विशेष रूप से नर्मदा घाटी क्षेत्र में मिले विशाल घोंसला स्थलों का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां हजारों जीवाश्म अंडे और घोंसले मिले हैं, जो दुनिया के सबसे बड़े ज्ञात डायनासोर प्रजनन स्थलों में शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि भारत की डायनासोर विरासत विश्वभर के वैज्ञानिकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। इन जीवाश्मों का संरक्षण न केवल हमारे अतीत को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को विज्ञान, प्रकृति और पृथ्वी के इतिहास के प्रति प्रेरित करने का भी माध्यम है।
उन्होंने कहा कि ऑडियो-विजुअल माध्यमों के जरिए बच्चों, विद्यार्थियों और आमजन तक वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाने का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है। लगभग 30 मिनट की यह फिल्म दर्शकों को डायनासोरों की दुनिया की रोमांचक यात्रा पर ले जाएगी और उन्हें एक अनूठा शैक्षिक एवं मनोरंजक अनुभव प्रदान करेगी। अंत में उन्होंने आंचलिक विज्ञान नगरी की पूरी टीम को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल विज्ञान संचार के क्षेत्र में नई उपलब्धियां स्थापित करेगी तथा डायनासोरों के प्रति लोगों की जिज्ञासा और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देगी।

फिल्म के प्रदर्शन के बाद दर्शकों ने इसकी भव्य प्रस्तुति और अत्याधुनिक तकनीक की सराहना की। दर्शकों ने आंचलिक विज्ञान नगरी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी विश्वस्तरीय सुविधा अब लखनऊ में उपलब्ध होना गर्व की बात है। उन्होंने फिल्म को “फाइव स्टार मूवी अनुभव” बताते हुए कहा कि यह मनोरंजन के साथ-साथ विज्ञान सीखने का भी उत्कृष्ट माध्यम है।

कार्यक्रम का समापन राम कुमार (शिक्षा अधिकारी, आंचलिक विज्ञान नगरी, लखनऊ) द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने मुख्य अतिथि, सभी विशिष्ट अतिथियों, प्रतिभागियों एवं आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों का सफल आयोजन हेतु आभार व्यक्त किया।
“द ग्रेट डायनासोर सीक्रेट” का शुभारंभ आंचलिक विज्ञान नगरी, लखनऊ की विज्ञान संचार को नवीन एवं आकर्षक माध्यमों से जन-जन तक पहुँचाने की प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ करता है तथा लोगों में जिज्ञासा, वैज्ञानिक सोच और सीखने की भावना को प्रोत्साहित करता है।
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