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गोडावण को बचाने की मुहिम को मिली नई पहचान, कुतुब मीनार पर दिखी प्रेरक कहानी

दिल्ली (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। दिल्ली के सबसे प्रसिद्ध स्मारकों में से एक कुतुब मीनार पर भारत के सबसे दुर्लभ पक्षियों में शामिल गोडावण, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की कहानी को खास अंदाज में प्रस्तुत किया गया। कई वर्षों से गोडावण की घटती संख्या संरक्षण से जुड़े लोगों के लिए चिंता का विषय रही है। एक समय इस पक्षी को भारत का राष्ट्रीय पक्षी बनाए जाने की चर्चा भी हुई थी, लेकिन देश के घास के मैदानों में इनकी संख्या लगातार कम होती गई और ये धीरे-धीरे लोगों की नजरों से दूर हो गया। हालाँकि, पिछले कुछ वर्षों में हुए संरक्षण प्रयासों से अब इसकी वापसी की उम्मीद बढ़ी है और इस पक्षी को फिर से पहचान मिलने लगी है।

इसी संदेश को लोगों तक पहुँचाने के लिए विश्व पर्यावरण दिवस पर गोडावण को समर्पित एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। गोडावण एस्ट्यूरी प्रीमियम वॉटर के सहयोग से कुतुब मीनार पर एक भव्य प्रोजेक्शन शो दिखाया गया, जिसमें गोडावण पक्षी की कहानी को प्रस्तुत किया गया। इस पहल का उद्देश्य लोगों को दुनिया के सबसे दुर्लभ पक्षियों में से एक गोडावण के बारे में जागरूक करना और उसके संरक्षण के महत्व को समझाना था।

गोडावण, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को राष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान मिली, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के 133वें एपिसोड में इसका उल्लेख किया। उन्होंने इसे भारत में वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों और संकटग्रस्त प्रजातियों को बचाने की जरूरत का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बताया।

ग्रामोदय सामाजिक संस्थान के अध्यक्ष केदार श्रीमाल ने कहा, “इस सम्पूर्ण पहल की सबसे अच्छी बात यह है कि संरक्षण के लिए कई पक्ष एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं। ऐसे प्रयास दर्शाते हैं कि स्थानीय समुदाय, संरक्षण विशेषज्ञ, निजी क्षेत्र, वन विभाग और अन्य सरकारी एजेंसियाँ मिलकर गोडावण और उसके संवेदनशील प्राकृतिक आवास की सुरक्षा को और मजबूत बना सकती हैं। इस तरह का सहयोग न सिर्फ जागरूकता बढ़ा रहा है, बल्कि बेहतर पर्यावरणीय व्यवस्था तैयार करने और इस प्रजाति के भविष्य के लिए नई उम्मीद भी जगा रहा है।”