नई दिल्ली (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। फिक्की लेडीज़ ऑर्गनाइजेशन (FLO), जो फिक्की की शीर्ष महिला उद्यमी शाखा है, ने अपनी अखिल भारतीय “कचरा संग्रहण एवं जिम्मेदार निपटान पहल” के शुभारंभ की घोषणा की। इसका उद्देश्य जागरूक कचरा प्रबंधन प्रथाओं को प्रोत्साहित करना और स्वच्छ एवं हरित भारत के निर्माण के लिए समुदाय की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करना है।
फिक्की लेडीज़ ऑर्गनाइजेशन (FLO) की राष्ट्रीय अध्यक्ष पूजा गर्ग ने कहा, “FLO नेशनल वेस्ट टू वेल्थ ड्राइव एक तीन माह की स्थिरता पहल है, जिसे देशभर में FLO के सभी चैप्टरों में लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य कचरे के पृथक्करण को बढ़ावा देना, पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) को प्रोत्साहित करना, लैंडफिल कचरे को कम करना और सदस्यों को परिपत्र अर्थव्यवस्था के वास्तविक महत्व को समझने में सहायता करना है।”
उन्होंने बताया, “इस पहल के माध्यम से सदस्य कागज, प्लास्टिक, वस्त्र और ई-कचरे जैसी पुनर्चक्रण योग्य सामग्रियों का संग्रह करेंगे। जिन्हें अधिकृत रीसाइक्लरों को भेजा जाएगा, जिससे कचरे को एक संसाधन में बदला जा सके। इसके अतिरिक्त, FLO नेशनल वेदिका मित्तल कुमार के नेतृत्व में इनविजिनास के साथ साझेदारी में ‘त्यागी गई दवाओं के संग्रहण और सुरक्षित निपटान अभियान’ भी शुरू कर रहा है।”
पूजा गर्ग ने कहा, “समाप्त हो चुकी और उपयोग में न लाई गई दवाओं का अनुचित निपटान हमारी मिट्टी और जल प्रणालियों को प्रदूषित कर सकता है, इसलिए उनका जिम्मेदारीपूर्वक निपटान एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय दायित्व है। सदस्य निर्धारित संग्रह केंद्रों पर या हमारे आगामी कार्यक्रमों के दौरान अप्रयुक्त एवं एक्सपायर दवाएँ जमा कर इस अभियान में योगदान दे सकते हैं। भारतभर में FLO चैप्टरों की सामूहिक शक्ति के साथ यह पहल जागरूकता को बड़े पैमाने पर मापनीय कार्रवाई में बदलने की क्षमता रखती है।”
FLO ने क्षमता निर्माण, हरित प्रौद्योगिकियों और परिपत्र अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल (NPC) के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। पूजा गर्ग ने कहाकि इसका उद्देश्य कचरे के पृथक्करण को बढ़ावा देना, पुनर्चक्रण को प्रोत्साहित करना, लैंडफिल कचरे को कम करना और सदस्यों को परिपत्र अर्थव्यवस्था के वास्तविक महत्व को समझने में सहायता करना है। समाप्त हो चुकी और अप्रयुक्त दवाओं का अनुचित निपटान हमारी मिट्टी और जल प्रणालियों को प्रदूषित कर सकता है, जिससे उनका जिम्मेदार निपटान एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय जिम्मेदारी बन जाता है।
इस कार्यक्रम का नेतृत्व विभा जैन (इनिशिएटिव लीड, FLO ग्रीनटेक एवं सर्कुलर इकोनॉमी नेशनल इनिशिएटिव) ने किया, जबकि नम्रता मिश्रा ने सह-नेतृत्व की भूमिका निभाई।
“प्लैनेट, पॉलिसी एंड प्रोग्रेस: बिल्डिंग इंडिया’ज़ सस्टेनेबल फ्यूचर” विषयक पैनल चर्चा में प्रतिष्ठित वक्ताओं की एक विशिष्ट श्रृंखला शामिल थी। जिनमें डॉ. सुलज्जा फिरोदिया मोटवानी (संस्थापक एवं सीईओ, काइनेटिक ग्रीन एनर्जी एंड पावर सॉल्यूशंस लिमिटेड), अंकित अग्रवाल (संस्थापक, Phool.co), बरखा सुब्बा (संरक्षण वैज्ञानिक एवं व्हिटली अवॉर्ड विजेता 2026) शामिल थीं।

डॉ. सुलज्जा फिरोदिया मोटवानी ने कहा, “भारत में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) तेजी से स्वीकार्यता प्राप्त कर रहे हैं, विशेष रूप से दैनिक शहरी आवागमन के लिए, लेकिन वर्तमान में उन्हें आंतरिक दहन इंजन (ICE) वाहनों के पूर्ण विकल्प के बजाय एक वैकल्पिक साधन के रूप में देखा जाना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि अधिकांश ईवी उपयोगकर्ता अपने वाहनों को रातभर घर पर चार्ज करते हैं और पूरे दिन उनका उपयोग करते हैं, बिना सार्वजनिक चार्जिंग अवसंरचना की आवश्यकता के। दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए उपलब्ध 100–150 किलोमीटर की रेंज सामान्यतः दैनिक गतिशीलता आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त होती है। ईवी मालिक रात में घर पर अपने वाहन चार्ज करते हैं और पूरे दिन आराम से उनका उपयोग करते हैं। शहरी यात्रा के लिए महंगे फास्ट चार्जर अक्सर आवश्यक नहीं होते, क्योंकि नियमित घरेलू चार्जिंग अधिकांश जरूरतों को पूरा कर देती है।
उन्होंने कहा, “भारत वर्तमान में एक पारंपरिक ‘चिकन-एंड-एग’ स्थिति का सामना कर रहा है, जहाँ व्यापक ईवी अपनाने और चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार को साथ-साथ विकसित होना होगा। यद्यपि सरकार ने प्रारंभ में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) को चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की जिम्मेदारी सौंपी थी, लेकिन शुरुआती कई परियोजनाओं को तकनीकी उन्नयन, स्थान चयन और व्यावसायिक व्यवहार्यता से संबंधित चुनौतियों का सामना करना पड़ा।”
उन्होंने कहा, “हालाँकि, अब चार्जिंग इकोसिस्टम में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ रही है, जिससे दक्षता, पहुँच और चार्जिंग अवसंरचना में निवेश में सुधार होने की उम्मीद है। जैसे-जैसे चार्जिंग अवसंरचना एक व्यवहार्य निजी व्यवसाय बनेगी, यह स्वाभाविक रूप से अधिक कुशल और व्यापक होती जाएगी। यह इकोसिस्टम परिपक्व होने की दिशा में बढ़ रहा है, लेकिन इसमें समय लगेगा।”
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