लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। भारत में घर के पते और दिशा-निर्देश हमेशा गली के नाम या पिन कोड पर आधारित नहीं होते, बल्कि वे अक्सर हमारी याददाश्त पर निर्भर करते हैं, जैसे ‘नीले घर के बाद बाएं मुड़ें’ या ‘लाल घर जहां हर त्योहार पर मेहमान आते हैं’। एक ऐसे देश में जहां हर जगह रंग ही रंग है, यहां घर का मतलब सिर्फ़ रंगी हुई दीवारें नहीं हैं, बल्कि ये कुछ ऐसे जाने-पहचाने निशान बन जाते हैं, जिन्हें लोग पहचानते हैं और जुड़ाव महसूस करते हैं।
रंग ही असली पता है’ के आइडिया के आधार पर एशियन पेंट्स ने अपना नया कैंपेन ‘रंगों की वॉरंटी’ पेश किया है, जो पिछले साल शुरू किए गए ‘एशियन पेंट्स की वॉरंटी, भारत का हर दूसरा घर कहता है’ की सोच को आगे बढ़ाता है।
अपनेपन और भावपूर्ण संगीत से सजी यह फिल्म दिखाती है कि कैसे एशियन पेंट्स के रंगों से रंगे भारतीय घर रोज़मर्रा की ज़िंदगी और यादों का हिस्सा बन जाते हैं। सरल और सहज पलों के ज़रिए यह फ़िल्म दर्शाती है कि जीवन में बदलाव आने पर भी ये रंग नहीं बदलते, मात्र पेंट से कहीं बढ़कर, ये जाने-पहचाने स्थान बन जाते हैं जिन्हें लोग पहचानते हैं। यह फिल्म इस बात को पुष्ट करती है कि एशियन पेंट्स के लंबे समय तक टिकने वाले रंग न सिर्फ़ दीवारों पर रहते हैं, बल्कि लोगों के मन में भी बस जाते हैं और समय के साथ घरों की सच्ची पहचान बन जाते हैं।
यह कैंपेन दर्शाता है कि एशियन पेंट्स के लिए ‘वॉरंटी’ का क्या अर्थ है। यह केवल ज़्यादा समय तक टिकनेवाले पेंट के बारे में नहीं है, बल्कि उस वादे के बारे में भी है जो दीवारों से जुड़ी यादों और आत्मीयता को संजोय रखने की बात करता है।
आठ दशकों से भी अधिक समय से, एशियन पेंट्स भारत भर के छोटे कस्बों से लेकर बड़े महानगरों तक, घरों और दिलों का हिस्सा रहा है। पिछले वर्ष के अभियान ने भरोसे की इस विरासत को जीवंत कर दिया, यह दिखाते हुए कि कैसे पूरे भारत में लोग एशियन पेंट्स पर भरोसा करते हैं।
सालभर के दौरान, ‘दशकों का विश्वास’ जैसे प्रिंट प्रकाशनों से लेकर एशिया कप के दौरान वॉरंटी काउंटडाउन जैसे सांस्कृतिक आयोजनों तक, कई तरीकों से इस संदेश को और मजबूत किया गया। ‘रंगों की वॉरंटी’ इस कथा का एक स्वाभाविक विकास है, जिसे रंगों के नज़रिए से देखा गया है – यह एक ऐसा क्षेत्र है जिस पर ब्रांड का भारतीयों के साथ गहरा भावनात्मक जुड़ाव है।
इस कैंपेन के बारे में बात करते हुए, एशियन पेंट्स के प्रबंध निदेशक और सीईओ अमित सिंगल ने कहा, “आठ दशकों से भी अधिक समय से, एशियन पेंट्स भारतीय घरों में रंग भर रहा है, लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह उनकी पहचान का एक अभिन्न अंग बन गया है। हमारा मानना है कि हमारी वॉरंटी का वादा उन दीवारों में झलकता है जो न केवल मजबूत बनी रहती हैं, बल्कि जीवंत भी रहती हैं – जिनमें अपनापन है, साझा रीति-रिवाज़ है और वो यादें हैं जो समय के साथ और अधिक मूल्यवान होती जाती हैं। जब रंग लंबे समय तक टिकता है, तो वह स्मृति बन जाता है, जो घर के पते का प्रतीक होता है – तुरंत पहचाना जा सकता है, गहराई से याद किया जा सकता है। ‘रंगों की वॉरंटी’ इसी अटूट बंधन को समर्पित है, जहां पेंट केवल सतह को सजाता नहीं है, बल्कि बरकरार रहकर घर की विरासत और गौरव का एक स्थायी प्रतीक बन जाता है। हमारे लिए वॉरंटी केवल प्रोडक्ट की गारंटी नहीं है; यह भरोसे और लंबे समय के प्रदर्शन में अटूट विश्वास पर आधारित एक प्रतिबद्धता है। इसीलिए “एशियन पेंट्स की कलर वॉरंटी” “भारत के हर दूसरे घर का पता” बन गई है – यह उन घरों का एक शांत लेकिन शक्तिशाली प्रतीक है जो टिकाऊ होते हैं, उन रंगों का जो स्थायी होते हैं और उन कहानियों का जो निरंतर जारी रहती हैं।
इंडियन प्रीमियर लीग के दौरान लॉन्च किया गया यह कैंपेन, जहां एशियन पेंट्स टेलीविज़न पर एक एसोसिएट ब्रॉडकास्ट स्पॉन्सर है, यह अभियान एक स्वाभाविक सांस्कृतिक संगम को दर्शाता है।
भारत में क्रिकेट, घरों की तरह ही, भावनाओं और पहचान से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह रंगों का भी उत्सव है – टीम के रंग, शहर का गौरव और साझा किए गए पल। एशियन पेंट्स इस संदर्भ को सहजता से समाहित करता है, उन रंगों को जोड़ता है जिनका हम समर्थन करते हैं और उन रंगों को जिनके साथ हम जीते हैं, जिससे कथा सहज और गहराई से जुड़ जाती है।
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