लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। जिलाधिकारी लखनऊ विशाख जी0 की अध्यक्षता में गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिला शुल्क नियामक समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2018 एवं संशोधन अधिनियम, 2020 के प्रावधानों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करना रहा।
बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि विद्यालयों द्वारा प्रस्तावित शुल्क वृद्धि की गहन जांच की जाएगी तथा अभिभावकों की शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाएगा। उन्होंने अपर जिलाधिकारी (नागरिक आपूर्ति) ज्योति गौतम एवं जिला विद्यालय निरीक्षक को इस संबंध में नोडल अधिकारी नामित किया, जिनसे अभिभावक सीधे संपर्क कर सकेंगे।
जिला स्तर पर शिकायतों की प्रारंभिक जांच के लिए उप जिलाधिकारियों, अपर नगर मजिस्ट्रेटों एवं राजकीय विद्यालयों के प्रधानाचार्यों की संयुक्त टीम गठित की गई है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि सभी अधिकारी शिक्षा विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर शिकायतों पर संयुक्त निरीक्षण करें और समयबद्ध रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
डीएम ने सभी विद्यालयों को निर्देशित किया कि वे अपनी वेबसाइट एवं सूचना पट्ट पर शुल्क का पूरा विवरण प्रदर्शित करें। निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। साथ ही कैपिटेशन शुल्क को पूर्णतः प्रतिबंधित बताते हुए हर भुगतान पर रसीद देना अनिवार्य किया गया है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी छात्र को पुस्तकों, यूनिफॉर्म या अन्य सामग्री के लिए किसी विशेष दुकान से खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। उल्लंघन की स्थिति में 5 लाख रुपये तक जुर्माना या विद्यालय की मान्यता समाप्त करने की कार्रवाई की जा सकती है।
विद्यालयों की यूनिफॉर्म में लगातार पांच वर्षों तक बदलाव नहीं होगा और शुल्क वृद्धि केवल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक तथा अधिकतम 5 प्रतिशत की सीमा में ही की जा सकेगी। साथ ही, जिन विद्यालयों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू है, वहां केवल एनसीईआरटी की पुस्तकों से ही पढ़ाई सुनिश्चित की जाएगी।
बैठक में अपर जिलाधिकारी (नागरिक आपूर्ति), शिक्षा विभाग के अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक एवं अन्य संबंधित अधिकारी भौतिक एवं वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहे।
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