लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। एमिटी विश्वविद्यालय लखनऊ परिसर के एमिटी स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (ASET) एवं इंस्टीट्यूशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियर्स (IETE) लखनऊ सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “कंप्यूटिंग, कम्युनिकेशन एवं इंटेलिजेंट सिस्टम्स (ICCCIS-2026)” तथा डेटा साइंस, कम्युनिकेशन एवं सूचना सुरक्षा विषयक जोनल सेमिनार का समापन हो गया।
हाइब्रिड मोड में आयोजित इस सम्मेलन में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों, इंजीनियरों, शिक्षाविदों, फैकल्टी सदस्यों एवं छात्र-छात्राओं सहित 150 से ज्यादा प्रतिभागियों ने भाग लिया। सम्मेलन में 06 तकनीकि सेशन और एक पोस्टर प्रजेंटेशन आयोजित किए गए। इसमें प्रतिभागियों ने दो दिनों तक नवीन इंजीनियरिंग तकनीकों एवं उभरते शोध क्षेत्रों पर गहन विचार-विमर्श किया।
समापन सत्र को संबोधित करते हुए एमिटी विश्वविद्यालय लखनऊ परिसर के प्रति कुलपति एवं सेवानिवृत्त विंग कमांडर डॉ. अनिल तिवारी ने कहा कि किसी भी सम्मेलन की सफलता केवल आयोजन टीम पर निर्भर नहीं करती, बल्कि सहयोगी संस्थाओं की प्रतिष्ठा भी उसे नई ऊंचाई प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि IETE जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से जुड़ाव सम्मेलन की बौद्धिक गरिमा को बढ़ाता है। यह आयोजन प्रतिभागियों की शोध क्षमता को निखारने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेटवर्किंग को सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध होगा।
IETE लखनऊ सेंटर के अध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार सिंह ने भविष्य में भी एमिटी विश्वविद्यालय के साथ ऐसे आयोजनों को जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में प्रस्तुत शोध पत्रों में से चयनित शीर्ष 10 प्रतिशत शोध पत्र IETE के जर्नल में प्रकाशित किए जाएंगे।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि IETE के अध्यक्ष सुनील, विशिष्ट अतिथि इसरो टेलीमेट्री ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क (ISTRAC), लखनऊ के ग्रुप डायरेक्टर आसिफ सिद्दीकी, ASET की विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) नम्रता धांडा तथा IEEE यूपी सेक्शन के कार्यकारिणी सदस्य डॉ. के.के. सिंह उपस्थित रहे। कार्यक्रम में एमिटी विश्वविद्यालय लखनऊ परिसर के प्रति कुलपति प्रो. (डॉ.) अनिल वशिष्ठ की भी गरिमामयी उपस्थिति रही।
मुख्य अतिथि सुनील ने कहा कि इस प्रकार के सम्मेलन शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों एवं शोधकर्ताओं के बीच विचारों के आदान-प्रदान का सशक्त मंच प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग और तकनीक का भविष्य अंतर्विषयी सहयोग पर आधारित है तथा डेटा साइंस, कम्युनिकेशन एवं सूचना सुरक्षा जैसे क्षेत्रों का महत्व निरंतर बढ़ रहा है।
विशिष्ट अतिथि आसिफ सिद्दीकी ने डेटा सुरक्षा एवं निजता को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि भारत में करोड़ों उपयोगकर्ता डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा कर रहे हैं। विश्व स्तर पर विभिन्न प्लेटफॉर्म हर वर्ष लगभग 181 ज़ेटाबाइट डेटा एकत्र करते हैं, जिसमें बड़ी मात्रा में व्यक्तिगत जानकारी शामिल होती है।
उन्होंने डेटा को “नया तेल” बताते हुए कहा कि जैसे कच्चा तेल परिष्करण के बाद मूल्यवान बनता है, उसी प्रकार डेटा भी प्रोसेसिंग के बाद अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है। उन्होंने डेटा चोरी के उदाहरण देते हुए बताया कि डार्क वेब पर इस प्रकार का डेटा बेहद कम कीमत पर बेचा जाता है। कार्यक्रम के अंत में प्रो. (डॉ.) सचिन श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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