लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। जियोहॉटस्टार की आगामी सीरीज़ चिरैया की टीम बुधवार को प्रमोशन के लिए लखनऊ पहुंची। जहां अभिनेत्री दिव्या दत्ता और निर्देशक शशांत शाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीरीज के बारे में जानकारी दी। इस कार्यक्रम की मेजबानी मल्लिका यश अस्थाना ने की, जहां रचनाकारों और मीडिया के बीच एक दिलचस्प और विचारशील संवाद देखने को मिला।
लखनऊ में व्यापक रूप से शूट की गई चिरैया का शहर से गहरा जुड़ाव है, जो इसकी कहानी में यहां की संस्कृति, माहौल और भावनात्मक परतों को खूबसूरती से दर्शाता है। कार्यक्रम के दौरान मीडिया के लिए शो का ट्रेलर भी प्रदर्शित किया गया, जिसने एक ऐसी कहानी की झलक दी जो जटिल मानवीय रिश्तों और विवाह के भीतर सहमति जैसे अक्सर अनकहे विषय को सामने लाती है।

चिरैया अपने परिवेश से प्रामाणिकता ग्रहण करती है, जो इसके पात्रों और उनकी यात्राओं को एक सजीव और संवेदनशील रूप में प्रस्तुत करती है। मूल रूप से हिंदी में शूट की गई इस सीरीज़ को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने के लिए निर्माताओं ने इसे 11 अन्य भाषाओं बंगाली, मराठी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, भोजपुरी, ओड़िया, गुजराती, हरियाणवी और राजस्थानी में भी डब किया है।
फिल्म ‘चिरैया’ को लेकर निर्देशक शशांत शाह ने इसे अपने करियर का भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण प्रोजेक्ट बताया है। उन्होंने कहा कि इस फिल्म के जरिए वह एक गहराई से मानवीय कहानी प्रस्तुत करना चाहते थे, जिसमें असहजता किसी बड़े घटनाक्रम से नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की खामोशियों और सामान्यीकृत व्यवहार से पैदा होती है।

शशांत शाह के अनुसार, फिल्म की सबसे खास बात इसकी सहज और वास्तविक दुनिया है, जो दर्शकों को अपने आसपास की परिस्थितियों से जुड़ी महसूस होती है। उन्होंने कहा कि एक फिल्मकार के तौर पर उनकी जिम्मेदारी थी कि इस संवेदनशील विषय को सच्चाई और संवेदनशीलता के साथ पेश किया जाए, बिना इसे सनसनीखेज बनाए। उन्होंने यह भी साझा किया कि शूटिंग के दौरान कई ऐसे पल आए जब कलाकारों की प्रभावशाली अदायगी ने पूरे सेट को भावुक और शांत कर दिया।

फिल्म में कमलेश की भूमिका निभा रहीं दिव्या दत्ता ने भी ‘चिरैया’ को एक महत्वपूर्ण सामाजिक प्रस्तुति बताया। उन्होंने कहा कि यह फिल्म केवल एक कहानी नहीं, बल्कि उन खामोशियों को उजागर करने का प्रयास है जिन्हें समाज ने लंबे समय से स्वीकार कर लिया है।
दिव्या दत्ता ने अपने किरदार के बारे में बताते हुए कहा कि कमलेश एक ऐसी महिला है जो पारंपरिक मूल्यों से बंधी होने के बावजूद अन्याय के खिलाफ खड़ी होती है। उन्होंने इसे एक शांत लेकिन मजबूत जागृति का प्रतीक बताया, जहां एक महिला डर के बजाय गरिमा को चुनती है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि ‘चिरैया’ दर्शकों को उन सामाजिक मानदंडों पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित करेगी, जिन्हें बिना सवाल किए अपनाया गया है, और उन जरूरी संवादों की शुरुआत करेगी जो लंबे समय से टलते रहे हैं।
इस मीडिया इंटरैक्शन में शो के निर्माण, रचनात्मक निर्णयों और इसके सामाजिक संदर्भ पर भी चर्चा की गई। यह खुला और ईमानदार संवाद शो के उस उद्देश्य को और मजबूत करता है, जिसके तहत यह कहानी के माध्यम से जागरूकता बढ़ाना चाहता है।
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