नई दिल्ली : संसदीय मामलों एवं अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने शुक्रवार को कहा कि बौद्ध धर्म केवल एक पहचान नहीं बल्कि एक जीवन पद्धति है।किरेन रिजिजू ने यह बात आज नई दिल्ली स्थित सार्वजनिक उद्यमों के स्थायी सम्मेलन कॉम्प्लेक्स में “आधुनिक भारत में बौद्ध धर्म: सांस्कृतिक और सामाजिक मार्ग पर आगे बढ़ना” विषय पर आयोजित एक विशेष संगोष्ठी में कही।रिजिजू ने कहा, “बुद्ध धर्म अपनाने के लिए किसी कठिन तकनीकी प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं है, उनके मूल विचारों को जीवन में उतारना ही सच्चा बौद्ध होना है।” उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति चाहे वह किसी भी धर्म का हो बुद्ध के बताए सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चल सकता है। शांति स्थापित करने के लिए शक्तिशाली बनना आवश्यक है, और यदि शक्ति बुद्ध के ज्ञान के साथ आती है, तो वह समाज की रक्षा करती है।मंत्री ने कहा कि भारत सरकार बौद्ध विरासत के संरक्षण, संवर्धन और वैश्विक प्रसार के लिए प्रतिबद्ध है। करुणा, सहिष्णुता और सह-अस्तित्व के बौद्ध मूल्यों पर चलते हुए समावेशी विकास को आगे बढ़ाया जाएगा। भारत बुद्ध की जन्मभूमि है और विश्वभर के बौद्धों की आस्था का केंद्र है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने वैश्विक मंचों पर यह स्पष्ट संदेश दिया है, “भारत ने दुनिया को बुद्ध दिया है युद्ध नहीं।” उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म किसी कठोर औपचारिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं है बल्कि उसके मूल सिद्धांत—अहिंसा सत्य और करुणा—जीवन में अपनाने योग्य सार्वभौमिक मूल्य हैं। बौद्ध समाजों में भी चुनौतियां रही हैं लेकिन आवश्यकता इस बात की है कि बुद्ध के बताए मार्ग पर चलकर समाज में शांति और संतुलन स्थापित किया जाए।मंत्री ने बताया कि सरकार ‘बौद्ध विकास योजना’ के तहत बौद्ध स्थलों के संरक्षण, पुनरुद्धार और बुनियादी सुविधाओं के विकास पर कार्य कर रही है। उत्तर-पूर्व भारत, लद्दाख और हिमालयी क्षेत्रों में बौद्ध समुदायों के लिए विशेष योजनाएं संचालित की जा रही हैं।रिजिजू ने कहा कि भारत आने की इच्छा विश्व के करोड़ों बौद्धों का सपना है। बोधगया, सारनाथ और कुशीनगर जैसे पवित्र स्थलों का महत्व पूरी दुनिया में है और पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। यदि इन स्थलों का समुचित विकास किया जाए तो भारत विश्व के प्रमुख पर्यटन देशों में शामिल हो सकता है।मंत्री ने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है और सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान रखता है। हम संविधान की शपथ लेकर आए हैं और सबको साथ लेकर चलना हमारा दायित्व है। उन्होंने आह्वान किया कि बुद्ध के मार्ग पर चलते हुए शक्ति और शांति का संतुलन बनाए रखा जाए ताकि भारत और विश्व में सद्भाव सहिष्णुता और समावेशी विकास सुनिश्चित किया जा सके।संगोष्ठी में अल्पसंख्यक कार्य राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के सचिव डॉ. चंद्र शेखर कुमार, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की सचिव अलका उपाध्याय और अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (आईबीसी) के महासचिव शरत्से खेंसुर रिनपोछे जंगचुप चोएडेन सहित कई प्रतिष्ठित भिक्षु, नन और विद्वान उपस्थित रहे।
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