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बच्चों को अच्छी शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार देना अत्यंत आवश्यक : कौशिक चैतन्य

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। व्यास पीठ से प्रसिद्ध कथावाचक कौशिक चैतन्य ने श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम सोपान में गोकर्ण और धुंधकारी के जन्म का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि कलयुग में बच्चों को केवल भौतिक सुविधाएँ देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें अच्छी शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार देना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि माता-पिता बच्चों को कार और सुविधाएँ न दें, बल्कि संस्कार दें, बच्चे स्वयं आगे चलकर सब कुछ प्राप्त कर लेंगे।

बीकेटी क्षेत्र स्थित इक्यावन शक्ति पीठ मंदिर प्रांगण में रविवार दोपहर से सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। कथा प्रारंभ होने से पूर्व सीतापुर रोड पर भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें आसपास के गांवों की महिलाओं, बच्चों और पुरुषों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। भक्तिमय माहौल में पूरा क्षेत्र ‘हरे कृष्ण’ और ‘राधे-राधे’ के जयघोष से गूंज उठा।

कथा के दौरान कौशिक चैतन्य महाराज ने भगवान कृष्ण के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रभु करुणा और प्रेम के सागर हैं, लेकिन धर्म और सत्य की रक्षा के लिए आवश्यकता पड़ने पर वे सुदर्शन चक्र भी उठा लेते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में भावनाओं की कोमलता और कर्तव्य की कठोरता—दोनों का संतुलन ही मनुष्य को महान बनाता है।

इस धार्मिक अनुष्ठान में कथा यजमान पुष्पा दीक्षित, कथा संयोजक तृप्ति तिवारी एवं वरद तिवारी, कथा व्यवस्थापक स्तुति तिवारी, आचार्य धनंजय पाण्डेय, गीता पाण्डेय, महेश गिरी, समाजसेवी नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान तथा नमन तिवारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।