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“उम्मीद, हौसले और जज़्बे का उत्सव: कैंसर सर्वाइवर्स के सम्मान में कैंसर कार्निवाल 2026”

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल ने कैंसर से जंग जीत चुके मरीजों के सम्मान में “कैंसर कार्निवाल 2026” का आयोजन किया। इस खास कार्यक्रम में कैंसर सर्वाइवर, उनके परिवारजन और अस्पताल के डॉक्टर एक साथ जुटे। पूरे दिन का माहौल उत्साह, अपनापन और उम्मीद से भरा रहा। कार्यक्रम में 800 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया।

इस अवसर पर महापौर सुषमा खर्कवाल और दक्षिण क्षेत्र के पुलिस उपायुक्त निपुण अग्रवाल मौजूद रहे। दोनों अतिथियों ने कैंसर के खिलाफ लड़ाई में जागरूकता और सामाजिक सहयोग की अहम भूमिका पर जोर दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों और अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टरों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुई। ऑन्कोलॉजी टीम का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ निदेशक एवं प्रमुख, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, डॉ. आलोक गुप्ता सहित अस्पताल के कई वरिष्ठ पदाधिकारी इस मौके पर मौजूद रहे।

कैंसर सर्वाइवर्स की मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियों के बारे में बात करते हुए डॉ. आलोक गुप्ता ने कहा, “कैंसर से ठीक होने के बाद भी कई मरीज चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं से जूझते हैं। इलाज केवल दवा और सर्जरी तक सीमित नहीं है बल्कि मरीज के मन और भावनाओं की देखभाल भी उतनी ही जरूरी है। ऐसे कार्यक्रम मरीजों को नई उम्मीद, हिम्मत और अपनेपन का एहसास देते हैं, जो उनके जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।”

कैंसर सर्वाइवर की हिम्मत और जज़्बे को सलाम करने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्निवाल में कई प्रेरक कहानियां साझा की गईं। खेल, वेलनेस सेशन, संगीत कार्यक्रम और विशेषज्ञों की बातचीत ने माहौल को जीवंत बना दिया। डॉक्टरों ने इलाज के बाद की जिंदगी और जरूरी सावधानियों पर सरल शब्दों में मार्गदर्शन दिया।

अपने विचार साझा करते हुए सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के निदेशक डॉ. कमलेश वर्मा ने कहा, “कई मरीजों के लिए सर्जरी उनकी पूरी यात्रा का सबसे अहम पड़ाव होती है। पिछले कुछ वर्षों में सर्जरी की तकनीकें काफी सुरक्षित और सटीक हुई हैं। अब हमारा लक्ष्य केवल मरीज को बचाना ही नहीं, बल्कि उनके जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाना भी है।”

इस कैंसर कार्निवाल का संदेश साफ था कि कैंसर के खिलाफ जंग अकेले नहीं जीती जाती। हिम्मत, जागरूकता, परिवार का साथ और समाज का सहयोग मिलकर ही यह लड़ाई आसान बनाते हैं। जब अस्पताल, डॉक्टर, मरीज और समाज एक मंच पर आते हैं, तो डर की जगह भरोसा ले लेता है और निराशा एक नई शुरुआत में बदल जाती है।