नई दिल्ली : कांग्रेस ने केंद्र सरकार द्वारा सशस्त्र बलों के कर्मियों की विकलांगता पेंशन पर कर लगाने के फैसले का कड़ा विरोध किया है। कांग्रेस ने कहा कि अगर सरकार ने 28 फरवरी तक यह फैसला वापस नहीं लिया तो एक मार्च को पार्टी कार्यकर्ता जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे।कांग्रेस के पूर्व सैनिक विभाग के प्रमुख कर्नल रोहित चौधरी (सेवानिवृत्त) ने बुधवार को पार्टी मुख्यालय में पत्रकार वार्ता में कहा कि देश में करीब 2 लाख विकलांग सैनिक हैं, जबकि 50 लाख के आसपास सर्विंग और पूर्व सैनिक तथा युद्ध विधवाएं हैं। यानी लगभग 58 लाख लोगों का अपमान किया जा रहा है। अगर सरकार ने 28 फरवरी तक यह फैसला वापस नहीं लिया तो कांग्रेस एक मार्च को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करेगी।चौधरी ने कहा कि सैनिकों की विकलांगता पेंशन पर कर लगाना अनुचित है। सेना किसी भी देश की अंतिम उम्मीद होती है और ऐसे में सैनिकों के साथ इस तरह का व्यवहार सही नहीं है। क्या सरकार सैनिकों का बजट घटाकर अर्थव्यवस्था को मजबूत करना चाहती है।उन्होंने कहा कि 1922 एवं 1961 के आयकर अधिनियम में युद्ध में घायल और सेवा के दौरान विकलांग हुए सैनिकों को कर से छूट दी गई थी, लेकिन अब सरकार ने नया प्रावधान किया है कि केवल युद्ध में घायल होकर सेवा से बाहर हुए सैनिकों की पेंशन कर मुक्त होगी, जबकि चोट के बावजूद सेवा पूरी करने वाले सैनिकों की पेंशन पर कर लगाना उनका अपमान है।कर्नल चौधरी ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने 2023 में स्पष्ट किया था कि विकलांगता पेंशन को कर के दायरे में नहीं लाया जा सकता। अगर सरकार 28 फरवरी तक फैसला वापस नहीं लेती तो एक मार्च को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि हमारी मांग है 1922 के प्रावधान की तरह ही 2023 की नई नीति को सही किया जाए और विकलांगता पेंशन में किसी तरह का वर्गीकरण न किया जाए।उल्लेखनीय है कि बजट 2026 में यह प्रावधान किया गया कि केवल वे सैनिक, जिन्हें सेवा के दौरान या सेवा की वजह से बढ़ी हुई विकलांगता के कारण सेना से बाहर किया गया है, उनकी पेंशन आयकर से मुक्त होगी। जो सैनिक विकलांगता के साथ पूरी सेवा कर सेवानिवृत्त होते हैं, उन्हें इस छूट से बाहर रखा गया है। विकलांगता पेंशन दो हिस्सों में होती है। पहला सेवा तत्व और मेडिकल बोर्ड द्वारा तय विकलांगता प्रतिशत के आधार पर मिलने वाला हिस्सा। अब तक इस पेंशन पर कर से छूट मिलती रही है। 1922 से ही आयकर अधिनियम में यह छूट दी गई थी और 2001 में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने परिपत्र जारी कर इसकी पुष्टि भी की थी। हालांकि 2019 में आयकर विभाग ने एक परिपत्र जारी कर छूट वापस लेने की कोशिश की थी, जिस पर 2021 में उच्चतम न्यायालय ने रोक लगा दी थी।————
Telescope Today | टेलीस्कोप टुडे Latest News & Information Portal