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भारत ने 2015 में डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के माध्यम से डिजिटल आधारशिला रखीः जेपी नड्डा

नई दिल्ली : केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचे और उच्च गुणवत्ता वाले डेटा पर निर्भर करती है। इस बात को पहले ही पहचानते हुए भारत ने लगभग एक दशक पहले ही डिजिटल नींव रखना शुरू कर दिया था। 2015 में, प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सरकार ने भारत को एक डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में बदलने के लिए डिजिटल इंडिया कार्यक्रम शुरू किया। मंगलवार को भारत मंडपम में चल रहे इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में स्वास्थ्य क्षेत्र के सही और बोध पहल की शुरुआत के मौके पर जेपी नड्डा ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 में एक व्यापक डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की परिकल्पना की गई थी। इसी दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने स्वास्थ्य सेवा के लिए एक सशक्त डिजिटल सार्वजनिक ढांचा स्थापित करने के लिए 2020 में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का शुभारंभ किया।प्रगति पर प्रकाश डालते हुए नड्डा ने कहा कि निरंतर प्रयासों से स्वास्थ्य क्षेत्र में एक मजबूत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का निर्माण हुआ है। विभिन्न प्लेटफार्मों पर अंतरसंचालनीय प्रणालियां सक्षम की गई हैं, और नागरिकों को सशक्त बनाने के साथ-साथ डेटा गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु बड़े पैमाने पर, सहमति-आधारित स्वास्थ्य डेटा ढांचे विकसित किए जा रहे हैं।स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित एआई पहल (सही) के शुभारंभ का उल्लेख करते हुए जेपी ऩड्डा ने कहा कि यह सही भारत को नैतिक, पारदर्शी, जवाबदेह और जन-केंद्रित तरीके से एआई का लाभ उठाने में मार्गदर्शन करेगा। उन्होंने कहा कि एआई मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और गुणवत्तापूर्ण डेटा पर आधारित होता है। बोध एआई प्लेटफॉर्म, जिसे आईआईटी कानपुर और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सहयोग से विकसित किया गया। यह व्यवस्थित परीक्षण की सुविधा देगा। बोध के माध्यम से एआई सिस्टम की विश्वसनीयता जांची जाएगी। बड़े पैमाने पर लागू करने से पहले मानकीकरण सुनिश्चित होगा।—————