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एएमए हर्बल ग्रुप को मिला दूसरा पेटेंट, नैचुरल रोप डाइंग प्रक्रिया पर मिली मान्यता

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। एएमए हर्बल ग्रुप ऑफ कंपनीज़ को अपनी इनोवेटिव नैचुरल रोप डाइंग प्रक्रिया के लिए पेटेंट प्राप्त हुआ है। यह पेटेंट ऐसी टेक्नोलॉजी के लिए दिया गया है, जो नैचुरल डाइज़ के साथ लंबे धागों को समान रंग देने में सक्षम है। इसे कम पानी, कम लागत और बड़े स्तर पर उत्पादन के लिए विकसित किया गया है। फिलहाल यह प्रक्रिया किसी अन्य कंपनी के पास उपलब्ध नहीं है।

रोप डाइंग वो मशीन होती है जिससे डेनिम के रेशों को भी रंगा जाता है। हालांकि यह सिर्फ़ डेनिम तक सीमित नहीं है। इससे दस हज़ार, बीस हज़ार मीटर लम्बी रेंज के धागे को रंगा जा सकता है।

सामान्य तौर पर धागा कोन फॉर्म में दो से ढाई किलो का होता है या हैंक फॉर्म में आधा से एक किलो का। पारंपरिक नैचुरल डाइंग में हैंक को जोड़ने के लिए गांठ लगानी पड़ती है, जिससे काम काफी जटिल हो जाता था और इसमें समय भी बहुत लगता था। नई रोप डाइंग प्रक्रिया में यह पूरा काम एक निरंतरता में होता है, इससे यह तरीक़ा काफी तेज हो जाता है।

इस तकनीक की एक अहम खासियत यह है कि इसमें पानी का इस्तेमाल कम होता है, जिससे डाइंग की कुल लागत घट जाती है। पहले नैचुरल डाइंग में मुख्य रूप से इंडिगो का ही इस्तेमाल संभव था। क्योंकि अन्य नैचुरल डाइज़ की कॉटन के साथ ऐफिनिटी कम होती थी और इसके लिए अलग से प्री ट्रीटमेंट, डाइंग, वॉशिंग और फिक्सेशन जैसे कई स्टेप्स में इसको करना पड़ता था। एएमए हर्बल ग्रुप ने इन सभी प्रक्रियाओं को एक ही रोप डाइंग सिस्टम में सफलतापूर्वक स्थापित किया है।

यह प्रक्रिया दो टेक्सटाइल मिल्स में कमर्शियल स्तर पर इस्तेमाल की जा चुकी है, जहां से क्वालिटी प्रोडक्ट सामने आए हैं। लागत के लिहाज से यह तकनीक प्रभावी है और पूरी लंबाई में धागे को एक जैसा रंग मिलने से नैचुरल डाइज़ को बड़े पैमाने पर अपनाना आसान होता है।

एएमए हर्बल ग्रुप ऑफ कंपनीज़ के को-फाउंडर एवं सीईओ यावर अली शाह ने कहा, “यह हमारा दूसरा पेटेंट है और यह नैचुरल डाइंग को कमर्शियल स्तर पर मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस प्रक्रिया से पर्यावरण के अनुकूल टेक्सटाइल उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और उद्योग को एक नई रफ्तार मिलेगी।”