नई दिल्ली (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। कम्मा ग्लोबल फेडरेशन (केजीएफ) ने एक विशाल कार्यक्रम कम्मा महानडु की घोषणा की, जिसका आयोजन तमिलनाडु के श्रीपेरूम्बुदुर में 8 फरवरी 2026 को होगा। यह घोषणा नई दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में केजीएफ के संस्थापक एवं अध्यक्ष जेट्टी कुसुमा कुमार ने की। इस अवसर पर फेडरेशन से वरिष्ठ लीडर्स भी मौजूद रहे।
केजीएफ का गठन एक स्पष्ट प्रयोजन के साथ किया गया था। दुनिया भर के कम्मा समुदायों को एकजुट करना, उनके बीच फिर से सांस्कृतिक कनेक्शन बनाना, उनकी पहचान को सुरक्षित रखना और उनके समुदाय को उचित प्रतिनिधित्व एवं ताकत देना, जिसका यह हकदार है। पिछले साल गठित केजीएफ ने एक सशक्त दृष्टिकोण के साथ अपनी यात्रा शुरू की और इसके लिए शानदार प्रतिक्रिया मिली है। दुनिया भर के कम्मा समुदायों ने ज़बरदस्त जोश और उत्साह के साथ दिखा दिया है कि इनकी कम्युनिटी एक साथ आने के लिए तैयार है। आज यह फेडरेशन दुनिया भर से तकरीबन 2.1 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करता है, जो आज भारत की आबादी का लगभग 1.5 फीसदी हिससा बनाते हैं।
इस अवसर पर जेट्टी कुसुमा कुमार ने कहा कि देश भर में तेज़ी से हो रहे सामाजिक एवं राजनैतिक बदलाव संगठित भागीदारी को और भी महत्वपूर्ण बनाते हैं। ‘देश भर के समुदाय अपने हितों को सुरक्षित रखने और निरंतरना बनाए रखने के तरीके खोज रहे हैं। हम अपनी मौजूदगी को सुरक्षित बनाने पर ध्यान दे रहे हैं, अपने योगदान को पहचान रहे हैं और अगली पीढ़ी को लीडरशिप भूमिकाओं के लिए तैयार कर रहे हैं।
तमिलनाडु महानडु के लिए स्वाभाविक मेजबान है, क्योंकि यहां भारत की सबसे बड़ी कम्मावर आबादी रहती है, एक अनुमान के अनुसार इनकी संख्या 65 लाख है। राज्य ने कई जानी-मानी हस्तियां दुनिया को दी हैं जैसे बोलिनेनी मुनुस्वामी नायडू, जीडी नायडू, नारायण स्वामी नायडू, अरकत वीरा स्वामी नायडू और वायको, जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों जैसे कृषि, सार्वजनिक जीवन, इनोवेशन एवं सामाजिक सुधारों में उल्लेखनीय योगदान दिया है। इस क्षेत्र में लीडरां और साम्राज्यों का समृद्ध इतिहास रहा है जिनमें वीरपंडया कट्टा ब्राह्मण, तिरूमाला नायकर, मंगम्मा और रावेला तथा पेम्मासानी साम्राज्य शामिल हैं।
राजनैतिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर बात करते हुए कुसुमा कुमार ने कहा कि हालांकि बोलिनेनी मुनुस्वामी नायडू, मद्रास प्रेज़ीडेन्सी के पहले मुख्यमंत्री कम्मा समुदाय से हैं, लेकिन पिछले दशकों के दौरान तमिलनाडु में समुदाय की राजनैतिक मौजूदगी कम हुई है। ‘‘इस महानडु का दीर्घकालिक उद्देश्य है, तमिलनाडु विधानसभा में विभिन्न राजनैतिक दलों में कम से कम 30 कम्मा विधायकों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना तथा भावी सरकारों में उपमुख्यमंत्री पद को सुरक्षित रखने के लिए काम करना।’’
यह घोषणा पिछले साल हैदराबाद में आयोजित विश्व कम्मा सम्मेलन में हुई, जो केजीएफ का पहला अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन था तथा इसमें कई भारतीय राज्यों एवं विदेशों से हज़ारों प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। इसी संवेग को आगे बढ़ाते हुए श्रीपेरूम्बुदुर में आगामी कम्मा महानडु विचारों के आदान-प्रदान के लिए महत्वपूर्ण मंच होगा तथा कम्मा समुदाय के भविष्य को सशक्त बनाने में उल्लेखनीय योगदान देगा।
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