सीएसआईआर एरोमा मिशन के तहत विज्ञान उद्योग नीति समन्वय को मिला नया बल
लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। सीएसआईआर एरोमा मिशन के अंतर्गत एरोमा 4.0 पर वैज्ञानिक–उद्योग बैठक का आयोजन बुधवार को सीएसआईआर–केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (CSIR-CIMAP), में किया गया। बैठक में वैज्ञानिकों, सहभागी सीएसआईआर प्रयोगशालाओं के निदेशकों, नीति विशेषज्ञों तथा प्रमुख सुगंध उद्योग कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
बैठक का उद्देश्य विज्ञान–उद्योग–नीति समन्वय को सुदृढ़ करना, एरोमा 4.0 के अंतर्गत प्रौद्योगिकी परिनियोजन को गति देना, तथा जलवायु परिवर्तन एवं बाजार चुनौतियों पर मंथन करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी (निदेशक, सीएसआईआर- सीमैप), डॉ. सुदेश कुमार यादव (निदेशक, सीएसआईआर-आईएचबीटी), डॉ. अजीत कुमार शासनी (निदेशक, सीएसआईआर-एनबीआरआई), डॉ. एस.पी. सिंह (निदेशक, राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद, नई दिल्ली), डॉ. आलोक कालरा, योगेश दुबे (अध्यक्ष, फ्रेगरेंस एंड फ्लेवर् एसोशिएसन ऑफ इंडिया), फूल प्रकाश (अध्यक्ष, मिंट मैनुफैक्चरर एक्सपोर्ट एसोशिएसन) और सुगंध, फ्लेवर एवं संबद्ध उद्योगों के प्रमुख प्रतिनिधि द्वारा किया गया।
अपने उद्घाटन संबोधन में डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने कहा कि एरोमा 4.0 अनुसंधान, परिणामों से हटकर राष्ट्रीय प्रभाव की ओर बढ़ने के लिए एक निर्णायक कदम है, जिसमें किसानों, उद्योग और विज्ञान को एकीकृत मूल्य शृंखला में जोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही सगंधीय तेल के उत्पादन में मात्रा, गुणवत्ता की स्थिरता, ट्रेसबिलिटी और वैश्विक बाजार स्वीकृति पर ध्यान केंद्रित करते हुए, उन्होंने उद्योगों को अनुकूलित तकनीकों, मार्गदर्शन समर्थन और पैमाने बढ़ाने की सुविधा का आश्वासन दिया।
डॉ. सुदेश कुमार यादव ने जलवायु-अनुकूल एवं टिकाऊ सुगंध फसलों के विकास पर जोर दिया, जबकि डॉ. अजीत कुमार शासनी ने पादप विज्ञान एवं जैव विविधता आधारित अनुसंधान को उद्योग से जोड़ने की आवश्यकता बताई। डॉ. वी.एम. तिवारी ने उत्तर-पूर्व भारत में सुगंध फसलों की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
डॉ. एस.पी. सिंह (निदेशक, राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद) ने सुगंध क्षेत्र को एमएसएमई विकास, उत्पादकता वृद्धि एवं ग्रामीण रोजगार से जोड़ते हुए मानकीकरण और प्रक्रिया दक्षता पर बल दिया। डॉ. आर. के. श्रीवास्तव ने सीएसआईआर- सीमैप की सुगंध-आधारित प्रौद्योगिकियों को प्रस्तुत किया। जबकि डॉ. संजय कुमार ने एरोमा मिशन की उपलब्धियों एवं आगामी प्राथमिकताओं पर प्रकाश डाला।
संवाद सत्र के दौरान सुगंध, फ्लेवर एवं संबद्ध उद्योगों के प्रमुख प्रतिनिधियों ने अपने विचार एवं अपेक्षाएं साझा कीं। इनमें योगेश दुबे (अध्यक्ष, फ्रैग्रेंस एसोसिएशन ऑफ इंडिया), फूल प्रकाश (पूर्व अध्यक्ष, EOAI एवं निदेशक, हिंदुस्तान मिंट एंड एग्रो प्रोडक्ट्स प्रा. लि.), वैभव अग्रवाल (एम.डी., नॉरेक्स फ्लेवर्स प्राइवेट लिमिटेड), गौरव मित्तल (एम.डी., एरोमैटिक एंड एलाइड केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड) अमित त्रिपाठी, GIZ, अखिलेश गुप्ता (हर्बोकेम प्रा. लि.), मनिंदर सिंह यादव (यथावत एरोमैटिक्स) तथा जतिन मेहतो (सिंथेटिक सुगंध क्षेत्र से) शामिल रहे।
उद्योग प्रतिनिधियों ने विज्ञान–उद्योग के दीर्घकालिक सहयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए रोजमेरी, पचौली, जेरेनियम, पामारोसा, सिट्रोनेला, गुलाब, कैमोमाइल एवं दवाना जैसी वैश्विक मांग वाली फसलों पर विशेष फोकस करने का सुझाव दिया। साथ ही जलवायु परिवर्तन, मांग-आधारित किस्म विकास, प्राकृतिक एवं सिंथेटिक सुगंध अणुओं के संतुलन, गुणवत्ता मानकीकरण, प्रमाणन, ट्रेसबिलिटी तथा बाजार तालमेल जैसी चुनौतियों को प्राथमिकता से संबोधित करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला गया। उद्योग प्रतिनिधियों ने CSIR संस्थानों के साथ सक्रिय भागीदारी का आश्वासन दिया। कार्यक्रम का समापन डॉ. आलोक कालरा की समापन टिप्पणी, धन्यवाद ज्ञापन एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ।
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