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आत्मिक प्रसन्नता प्रदान करती हैं प्रो. सुखवीर सिंघल की कलाकृतियां – डॉ. दिनेश शर्मा

 प्रो. सुखवीर सिंघल की 109वीं जयंती पर हुई कला प्रतियोगिता, कार्यशाला व प्रदर्शनी

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। कला गुरु प्रो. सुखवीर सिंघल की 109वीं जयंती पर शुक्रवार को कला प्रदर्शनी, कला प्रतियोगिता और चित्रकला (वाश टैक्नीक) की कार्यशाला का आयोजन हजरतगंज मेट्रो स्टेशन पर किया गया। कला भारती ट्रस्ट, सुखवीर सिंघल क्रीयेशन्स और लखनऊ मेट्रो के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित प्रदर्शिनी का उद्रघाटन पूर्व उप मुख्यमंत्री एवं एमएलसी डॉ. दिनेश शर्मा ने किया। प्रदर्शनी में लखनऊ के जाने-माने चित्रकार रहे प्रो. सुखवीर सिंघल की बेहद प्रसिद्ध चित्रकारियों को प्रदर्शित किया गया। देश के दो प्रधानमंत्रियों के कला गुरु रह चुके दिवंगत प्रो. सुखवीर सिंघल अपनी वाश शैली और कला के प्रति अपने सम्पूर्ण जीवन समर्पण के लिए जाने जाते हैं।

मुख्य अतिथि डॉ. दिनेश शर्मा ने कहाकि प्रो. सुखवीर सिंघल ने अपने सृजन से भारत की चित्रकला को समृद्ध किया है। उन्होंने अपने चित्रों में भारतीय संस्कृति और परंपरायों को दर्शाया है। उन्होने कहाकि सिंघल जी की कलाकृतियां आज के दौड़ भाग की ज़िंदगी में आत्मिक प्रसन्नता प्रदान करती हैं। ऐसे कला के आयोजनों से देश में कला और संस्कृति की प्रगति होगी। डॉ. दिनेश शर्मा ने लखनऊ मेट्रो की तुलना अमेरिका की मेट्रो से करते हुए कहाकि एक बार वहाँ की मेट्रो में यात्रा करते हुए मैंने भारतवर्ष में ऐसी ही मेट्रो की कल्पना की थी। लखनऊ मेट्रो की साफ-सफाई एवं आधुनिकता से प्रभावित हो कर उन्होंने कहाकि मेरा ये सपना लखनऊ मेट्रो ने पूरा किया।

विशिष्ट अतिथि मुहम्मद शकील ने बताया कि प्रो. सुखवीर सिंघल उनके कला गुरु रह चुके हैं। पेंटिंग में भारतीय संस्कृति, धर्म-अध्यात्म, दर्शन और परंपराएं देखने को मिलतीं हैं। उनकी चर्चित पेंटिंग बारात और औरंगजेब के दरबार में वीर शिवाजी दुनिया में जानी गई।

डॉ. स्तुति सिंघल ने प्रो. सुखवीर सिंघल द्वारा विकसित की वाश टैक्नीक के गुर छात्रों को सिखाये। सादा जीवन उच्च विचार रखने वाले सिंघल जी के जीवन और उनकी कला पर अतिथियों ने चर्चा की। इस मौके पर रूबरू एक्सप्रेस एनजीओ के स्लम के बच्चों के लिए एक कला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। बच्चों ने ‘आज़ादी के अमृत महोत्सव’ विषय पर अपनी अंदर छिपी प्रतिभा को दर्शाया। कला प्रतियोगिता में भाग लेने वाले छात्रों को प्रतिभागित सर्टिफिकेट और विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।

प्रियम चंद्रा ने बताया कि उनके नाना प्रो. सुखवीर सिंघल ने भारतीय रस सिद्धान्त के आधार पर चित्र बनाए। चित्रों में उनके खुद के नवीन विचार और भावनाओं की अभिव्यक्ति देखने को मिलती है। वे लखनऊ कला एवं शिल्प महाविद्यालय के छात्र रहे। उनके गुरु असित कुमार हलदर थे। इलाहाबाद में अपनी संस्था कलाभारती के तहत कला के अलावा गीत-संगीत और वादन गुर सिखाते रहे। वापस लखनऊ कला एवं शिल्प महाविद्यालय के बतौर प्रोफेसर अध्यापन के बाद प्राचार्य भी बने। सेवानिवृत्त के बाद वह अंतिम क्षण तक सृजन करते रहे और कैसरबाग स्थित परिसर मे कला प्रशिक्षण देते रहे। प्रो. सुखवीर सिंघल के दामाद राजेश चंद्र जायसवाल ने बताया कि प्रो. सुखवीर सिंघल ने भिन्न भिन्न माध्यमों पर वॉटर कलर्स से, ऑयल कलर्स, टेपेस्ट्रीवर्क, मूर्तिकारी, लेदर पर फाइन आर्ट और पोर्ट्रेट भी बनाए। कला जगत् के इस गुरु ने अपना सम्पूर्ण जीवन कला को समर्पित कर दिया और सौ से भी ज्यादा पेंटिंग्स बनायी। 

प्रोफेसर सुखवीर संघल की प्रदर्शित की गई चुनिंदा चित्रों को मेट्रो यात्रियों ने खूब सराहा एवं अद्वितीय कला/वाश पेंटिंग तकनीकों के बारे में लोगों को सीखने का अवसर प्राप्त हुआ। प्रदर्शनी से पहले बच्चों के लिए चित्रकला कार्यशाला एवं चित्रकला प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। इसके बाद हजरतगंज मेट्रो स्टेशन पर आयोजित म्यूजिक बैंड ने कला प्रदर्शनी में आए दर्शकों का मन मोह लिया। मेट्रो स्टेशन पर 13 जुलाई को लगे 2 दिवसीय शॉपिंग कॉर्निवाल के समापन दिवस पर मेट्रो यात्रियों ने जमकर खरीदारी की एवं ऐसे कार्निवाल को भविष्य में आयोजित करने की इच्छा भी जाहिर की।     

इस अवसर पर सुशील कुमार ने कहा कि “कला, चित्रकला प्रदर्शनी लोगों को कला व वाश पेंटिंग तकनीकों के प्रति जागरुक करेगी। लखनऊ के प्रसिद्ध कलाकर रहे प्रो. सुखवीर सिंघल के संघर्षों को याद करने एवं उनके समाज के प्रति किए योगदान को लोगों के बीच लाने का इससे बेहतर तरीका नहीं हो सकता था। जैसे लखनऊ मेट्रो संस्कृति एवं तकनीक का अनूठा संगम है ठीक उसी तरह तकनीक की बुनियाद पर खड़ा ये भूमिगत मेट्रो स्टेशन अपने आंचल में संस्कृति की कला/चित्रकला प्रदर्शनी संजोए हुए है।”

कला, चित्रकला प्रदर्शनी में यूपी मेट्रो के संचालन विभाग के महाप्रबंधक स्वदेश सिंह एवं कंपनी सचिव पुष्पा बेलानी, आईइनटीएसी के निदेशक धर्मेंद्र मिश्रा, राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ चित्रकार मो. शकील, राज्य ललित कला अकादमी से डॉ. भारत भूषण, नीति आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. शकील सुल्तान हाशमी, प्रो. सिंघल की पुत्री स्तुति सिंघल, रितम चन्द्रा, पुनीत गेरा, एनीमा चक्रवर्ती सहित अन्य कला प्रेमी मौजूद रहे।