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सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल में तकनीक, नैतिकता और मानवता पर युवा वक्ताओं का मंथन


लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल, शहीद पथ, लखनऊ ने 9वीं डॉ. राजाराम जयपुरिया मेमोरियल इंटर-स्कूल डिबेट का आयोजन किया। इस आयोजन में लखनऊ और कानपुर के प्रमुख विद्यालयों के युवा वक्ताओं ने तकनीकी युग के एक महत्वपूर्ण प्रश्न पर विचारों का प्रभावशाली आदान-प्रदान किया। 

विद्यालय के संस्थापक स्वर्गीय डॉ. राजाराम जयपुरिया की स्मृति में आयोजित इस वार्षिक वाद-विवाद प्रतियोगिता का शुभारंभ ईश्वर की प्रार्थना के साथ हुआ। इसके बाद एक रचनात्मक रूप से तैयार किए गए कर्टेन-रेज़र के माध्यम से तकनीकी प्रगति से उत्पन्न अवसरों और चुनौतियों को प्रस्तुत किया गया। इस प्रस्तुति के माध्यम से विषय रखा गया, “तकनीकी प्रगति का स्तर मानवता की नैतिक रूप से इसका उपयोग करने की क्षमता से आगे निकल गया है।” 

मॉडरेटर ज्योति तिवारी ने प्रतियोगिता की औपचारिक शुरुआत करते हुए इसके नियमों की जानकारी दी। प्रतिभागी विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्ण और बौद्धिक रूप से गंभीर चर्चा में भाग लिया, अपने तर्क प्रस्तुत किए, विरोधी विचारों को चुनौती दी और महत्वपूर्ण प्रश्नों का उत्तर दिया। चर्चा में ड्रोन युद्ध, आनुवंशिक संशोधन और तीव्र गति से हो रही तकनीकी प्रगति के दौर में नैतिक जवाबदेही जैसे समकालीन विषयों पर विचार किया गया। 

निर्णायक मंडल में पूनम कोचित्ती (प्रिंसिपल, सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल, शहीद पथ, लखनऊ), हेडमिस्ट्रेस शिल्पी कुमार और दीपा शुक्ला शामिल थीं। इस प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों को विषय पर अपनी पकड़ प्रदर्शित करने और विभिन्न विचारों के प्रति सम्मान बनाए रखते हुए संवाद करने का अवसर प्रदान किया। 

कार्यक्रम के महत्व पर बोलते हुए पूनम कोचित्ती ने कहा, “डॉ. राजाराम जयपुरिया मेमोरियल डिबेट इस विश्वास को दर्शाता है कि शिक्षा का उद्देश्य युवाओं को केवल बदलती दुनिया को समझने के लिए तैयार करना ही नहीं, बल्कि उसे विचारशीलता के साथ प्रश्न करने और जिम्मेदारीपूर्वक उसे आकार देने के लिए भी तैयार करना है। ऐसे समय में, जब तकनीकी क्षमताएं असाधारण गति से आगे बढ़ रही हैं, वहीं रुककर उसके परिणामों का विश्लेषण करने और नैतिक विकल्प चुनने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। हमारे युवा वक्ताओं ने जिस आत्मविश्वास और गहराई के साथ इन प्रश्नों पर विचार किया, वह बौद्धिक क्षमता के साथ-साथ चरित्र निर्माण को विकसित करने के महत्व की एक मजबूत याद दिलाता है।” 

कार्यक्रम का समापन निर्णायकों की टिप्पणियों और सुझावों के साथ हुआ। इसके बाद सांस्कृतिक प्रस्तुति में विद्यालय के कोयर ने “वी आर द वर्ल्ड” प्रस्तुत किया और “दाई दाई” एंथम पर नृत्य प्रस्तुत किया गया। 

गुरुकुल अकादमी के विराट मिश्रा को पक्ष में सर्वश्रेष्ठ वक्ता चुना गया, जबकि स्वराज इंडिया पब्लिक स्कूल, कानपुर की शांभवी पाठक को विपक्ष में सर्वश्रेष्ठ वक्ता घोषित किया गया। स्वराज इंडिया पब्लिक स्कूल, कानपुर ने सर्वश्रेष्ठ टीम का पुरस्कार जीता। 

धन्यवाद ज्ञापन देते हुए वाइस प्रिंसिपल पंकज राठौर ने सभी प्रतिभागियों को बधाई दी और उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने प्राचीन परंपरा से एक समृद्ध ऐतिहासिक समानता प्रस्तुत करते हुए रामायण के युग और सीता एवं गार्गी जैसी विभूतियों से जुड़े शास्त्रीय दार्शनिक विमर्शों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि बौद्धिक जिज्ञासा और सार्वजनिक संवाद प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति में गहराई से निहित रहे हैं। 

उन्होंने यह भी समझाया कि वाद-विवाद संयम, गरिमा और एक-दूसरे के प्रति गहरे सम्मान के साथ किया जाना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों के साथ महत्वपूर्ण विचार साझा करते हुए उन्हें तर्कपूर्ण संवाद के माध्यम से इसी संतुलन और सत्य की खोज को बनाए रखने के लिए प्रेरित किया। 

9वीं डॉ. राजाराम जयपुरिया मेमोरियल डिबेट ने सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल की आलोचनात्मक सोच रखने वाले, आत्मविश्वास से संवाद करने वाले और नैतिक रूप से जागरूक युवा नागरिकों के विकास के प्रति प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित किया। यह आयोजन विद्यालय के संस्थापक स्वर्गीय डॉ. राजाराम जयपुरिया की बौद्धिक विरासत को आगे बढ़ाता है।