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महाराज रामनाथ और दूध भात खाता नाऊ!

आर्यावर्त के उत्‍तर में एक राज्‍य था. उसके राजा थे रामनाथ. उनके मंत्रिमंडल में कई अच्‍छे लोग थे. कुछ निर्दयी लोग भी थे. राजा पहले जनता से सीधे मिलते और उनके सुख दुख सुनते थे. राज्‍य का कोई भी नागरिक बेरोकटोक अपनी बात, समस्‍या, परेशानी राजा को बता सकता था. परंतु समय बीतने के साथ राजा राज्‍य के कामों में व्‍यस्‍त हो गये. उन्‍होंने जनता की समस्‍याओं की जानकारी देने के लिये कुछ सलाहकार भी रख छोड़े थे. राजा का एक नाऊ भी था. नाऊ का नाम कल्‍लू प्रसाद था. वह रोज सुबह महल जाता और राजा की दाढ़ी बनाता. 

कल्‍लू प्रसाद राजा की बहुत सेवा करता था. रामनाथ उससे बहुत खुश रहते. कल्‍लू प्रसाद चुगली भी करता तो राजा बड़ी गंभीरता से उसकी बात सुनते थे. राजा ज्‍यादातर उसकी सूचना और चुगली के आधार पर ही फैसले ले लेते थे. वह राज्‍य का हालचाल भी राजा को बताता था. राजा अब राज्‍य का हालचाल तथा जनता के सुख दुख को जानने के लिये अपने नाऊ के भरोसे हो गये. इस वजह से राजा के खास सलाहकार भवाली कुमार को यह बात खलती थी कि नाऊ से ज्‍यादा मेहनत और सेवा तो वह कर रहे हैं, लेकिन राजा उनसे ज्‍यादा नाऊ की बात मानते हैं. 

यद्यपि राजा भवाली कुमार पर विश्‍वास करते थे, लेकिन उनका सबसे ज्‍यादा भरोसा अपने नाऊ पर था. राजा अक्‍सर अपने नाऊ से पूछते कि बताओ राज्‍य में कैसा चल रहा है तो कल्‍लू प्रसाद बताता कि महाराज सब ठीक चल रहा है, कहीं कोई दिक्‍कत नहीं है. सब मस्‍त चल रहा है, जनता खुश है. राज्‍य में कानून का राज है. पुलिस ने रिश्‍वत लेना बंद कर दिया है. राज्‍य के अधिकारी इतने ईमानदार हो चुके हैं कि जनता उनको हरिश्‍चंद्र की औलाद मानने लगी है, लेकिन महाराज जनता को दूध-दही की थोड़ी सी परेशानी है, बाकी तो राज्‍य में सब चंगा ही चल रहा है. 

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राजा अपने राज्‍य की बेहतरी की बात सुनकर बेहद प्रसन्‍न होते. नाऊ की सेवा से खुश होकर उन्‍होंने उसे एक गाय भेंट किया. अब उसके घर में रोज दूध दही मिलने लगा. राजा हर सुबह कल्‍लू प्रसाद से पूछते बताओ राज्‍य में कैसा चल रहा है. प्रसाद नाऊ कहता कि महाराज सब चंगा है. जनता दूध भात खा रही है. महाराज फिर अपने सलाहकार भवाली कुमार से भी पूछते बताओ राज्‍य में कैसा चल रहा है, भवाली कुमार बताते महाराज राज्‍य में सब अच्‍छा चल रहा है. पूरा राज्‍य धनधान्‍य से परिपूर्ण है. लोगों के पास इतने पैसे हो गये हैं कि कई नागरिकों ने तो दूसरे राज्‍यों में अपने बंगले बना लिये हैं और उसी में अपनी नगदी छुपा रहे हैं. 

राजा नाऊ और सलाहकार से अपने राज्‍य की खुशहाली की बात सुनकर बेहद प्रसन्‍न होते. पहले राजा से मिलने राज्‍य के बहुत से नागरिक आते थे, और सही तथ्‍यों की जानकारी राजा को दे देते थे. तब राजा अपने नाऊ और सलाहकार से सवाल करते कि तुम लोग तो बता रहे हो सब चंगा है, लेकिन यहां तो जनता परेशान है. नाऊ और सलाहकार को बात घुमाकर बहाना बनाना पड़ता और उस नागरिक की बुराई खोजकर बतानी पड़ती कि यह तो पड़ोसी राजा का आदमी है. राजा के सवाल से सलाहकार तो आजीज आ गये थे, नाऊ को भी लगने लगा कि ऐसा ही रहा तो राजा उसकी भी बात नहीं मानेंगे. 

इन लोगों ने ऊपाय निकाला कि अब यह सुनिश्चित किया जाये कि राजा तक वही लोग पहुंच पायें, जो राजा की अच्‍छाई और जनता की खुशहाली बताने आयेंगे. बुराई करने आने वाले को अब राजा तक पहुंचने ही नहीं दिया जायेगा. इन लोगों ने मिलकर ऐसी व्‍यूह रचना की कि अब सामान्‍य नागरिक का राजदरबार या राजा तक पहुंचना मुश्किल हो गया. राजमहल में भी इन लोगों ने अपने ही पसंदीदा कर्मचारियों की नियुक्ति करवा दी. राजा धीरे धीरे जनता से कट गया. अब राज्‍य की वही बात राजा तक पहुंच पाती थी, जो यह लोग पहुंचवाना चाहते थे. 

इसी बीच राज्‍य में अकाल पड़ गया. राजा ने अपने मंत्रियों एवं सेनापति को कहा कि राज्‍य के नागरिकों की भलाई के लिये हर संभव प्रयास किया जाये. राजा ने कहा और अपने काम में लग गये. नाऊ जब भी उनकी दाढ़ी बनाने आता तो वो उससे पूछते कि राज्‍य में कैसा चल रहा है. नाऊ कहता कि महाराज आपके राज में जनता दूध भात खा रही है. एक समझदार महामंत्री सच बताने की कोशिश करता कि महाराज राज्‍य में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है, लेकिन राजा कहते कि हमारे राज्‍य में तो जनता दूध भात खा रही है. चारो तरफ खुशहाली है. आपको यह बात कैसे नहीं पता है?  

महामंत्री ने पता लगवाया कि आखिर ऐसा कौन है जिसकी बात मानकर महाराज अकाल के दौर में भी कह रहे हैं कि जनता दूध भात खा रही है. महामंत्री के गुप्‍तचर ने बताया कि महाराज हर सुबह राजा की दाढ़ी बनाने नाऊ आता है, वही महाराज को बता जाता है कि जनता दूध भात खा रही है. महामंत्री ने पता लगवाया तो जानकारी मिली कि राजा ने नाऊ को गाय दे रखी है और यह खुद दूध भात खा रहा है इसलिये यह राजा को बताता है कि समूची जनता दूध भात खा रही है. महामंत्री को पूरा माजरा समझ में आ गया. उन्‍होंने नाऊ की गाय को सैनिक भेजकर मंगवा लिया. 

अगले दिन सुबह नाऊ फिर राजा के महल पहुंचा. राजा की दाढ़ी बनाई, सेवा की. राजा ने पूछा बताओ कल्‍लू राज्‍य में सब कैसा चल रहा है, जनता कैसी है? रोआंसा मुंह बनाने कल्‍लू प्रसाद ने कहा कि महाराज राज्‍य में जनता परेशान है. अब उसको दूध दही, भात कुछ भी नहीं मिल रहा है. जनता दुखी है. राजा ने तत्‍काल महामंत्री को आदेश दिया कि जनता में अन्‍न एवं अन्‍य आवश्‍यक वस्‍तुओं का वितरण कराया जाये ताकि जनता के भूख से मरने की नौबत नहीं आये. जहां भी दूध एवं दही की आवश्‍यकता हो, वहां इसकी भी व्‍यवस्‍था कराई जाये. महामंत्री ने पूरे राज्‍य में अन्‍य एवं सामग्री का वितरण कराया. पर दुर्भाग्‍य है कि आर्यावर्त के हर राज्‍य के पास ऐसा महामंत्री नहीं है. 

#तिरछी_कटारी

(वरिष्ठ पत्रकार अनिल कुमार सिंह की फेसबुक वॉल से)

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