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गृहकर, जलकर और सीवरकर के बकायेदारों को योगी सरकार की बड़ी सौगात

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के सभी 762 नगरीय निकायों में संपत्ति कर (गृहकर, जलकर एवं सीवरकर) के बकायेदारों को बड़ी राहत देते हुए एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) लागू करने का निर्णय लिया है। इस योजना का उद्देश्य लंबित संपत्ति कर की प्रभावी वसूली, करदाताओं को व्यावहारिक राहत प्रदान करना, न्यायालयों में लंबित विवादों को कम करना तथा नगरीय निकायों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करना है। इस संबंध में प्रमुख्य सचिव पी. गुरु प्रसाद ने सभी नगर आयुक्तों और अधिशासी अधिकारियों को पत्र जारी कर इसे लागू किये जाने का निर्देश दिया है।

नगर विकास विभाग द्वारा जारी शासनादेश के अनुसार यह योजना उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1959 की धारा 221(3) तथा उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1916 की धारा 157(3) के तहत लागू की जाएगी। इसका लाभ प्रदेश के सभी 17 नगर निगम, 200 नगर पालिका परिषद और 545 नगर पंचायतों सहित कुल 762 नगरीय निकायों के संपत्ति कर बकायेदारों को मिलेगा।

योजना के तहत गृहकर, जलकर और सीवरकर के बकायेदारों को ब्याज एवं सरचार्ज पर शत-प्रतिशत छूट प्रदान की जाएगी। हालांकि यह छूट तभी मिलेगी, जब करदाता निर्धारित अवधि में अपने मूल बकाये का पूरा भुगतान कर देंगे। सरकार का मानना है कि इससे करदाताओं को राहत मिलने के साथ-साथ निकायों के राजस्व संग्रह में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

ओटीएस योजना का लाभ 1 अप्रैल 2026 तक लंबित बकाया संपत्ति कर पर दिया जाएगा। योजना की अवधि चार माह निर्धारित की गई है और इसका संचालन 15 अगस्त 2026 से 15 दिसंबर 2026 तक किया जाएगा। इस दौरान नगरीय निकाय व्यापक स्तर पर जनजागरूकता अभियान चलाकर करदाताओं को योजना की जानकारी देंगे।

सरकार ने निकायों को निर्देश दिए हैं कि योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि अधिक से अधिक करदाता इसका लाभ उठाकर अपने लंबित कर का निस्तारण करा सकें। शासन का मानना है कि इस पहल से न केवल राजस्व वसूली में तेजी आएगी, बल्कि करदाताओं और निकायों के बीच लंबित विवादों में भी कमी आएगी।

1. योजना का क्षेत्राधिकार- राज्य स्तर पर समस्त नगरीय निकायों में एकरूप सम्पत्ति कर (गृहकर/जलकर/सीवरकर) पर एकमुश्त समाधान योजना (OTS) लागू होगी।

2. योजना का स्वरूप- योजना के अन्तर्गत ब्याज/सरचार्ज पर शत-प्रतिशत छूट अनुमन्य होगी। नियमानुसार अधिरोपित ब्याज/सरचार्ज की धनराशि पर छूट तभी प्राप्त होगी, जब सम्पूर्ण बकाये की धनराशि का भुगतान संबंधित बकायेदारों द्वारा कर दिया जायेगा।

3. पात्रता- ओटीएस योजना प्रदेश के समस्त नगरीय निकाय क्षेत्रान्तर्गत सभी श्रेणी की सम्पत्तियों यथा आवासीय/अनावासीय/मिश्रित (समस्त व्यक्तिगत/राज्य सरकार/स्वायत्तशासी निकाय/पब्लिक सेक्टर यूनिट आदि) पर लागू किये जाने के साथ ही इस योजना का लाभ 01 अप्रैल, 2026 तक के लंबित बकाये पर प्रदान किया जायेगा।

4. समयावधि- एकमुश्त समाधान योजना की अवधि 04 माह निर्धारित है, जिसका क्रियान्वयन 15 अगस्त, 2026 से 15 दिसम्बर, 2026 के मध्य किया जायेगा। एकमुश्त समाधान योजना (OTS) के संबंध में दिनांक 15 अगस्त, 2026 से 14 सितम्बर, 2026 तक की अवधि में नगरीय निकायों द्वारा सभी हित पक्षों को सूचित किया जाना सुनिश्चित किया जायेगा।

5. किस्तों में भुगतान की सुविधा – करदाताओं को राहत प्रदान करने तथा राजस्व संग्रह में गति लाने के उद्देश्य से एकमुश्त समाधान योजना (OTS) के अंतर्गत संपत्ति कर (गृहकर, जलकर एवं सीवर कर) की बकाया धनराशि के भुगतान हेतु अधिकतम तीन किस्तों की सुविधा प्रदान की जायेगी। उदाहरणार्थ यदि ओ.टी.एस. में संपत्ति कर की अवशेष बकाया धनराशि रु. 1,00,000 (एक लाख) हो, तो उक्त धनराशि का 1/3 भाग, योजना लागू होने की तिथि से 30 दिन में और अवशेष 2/3 भाग, 02 मासिक किस्तों में 02 माह में जमा करना होगा।

इस प्रकार आवेदक को योजना के अंतर्गत देय सम्पूर्ण धनराशि का भुगतान योजना लागू होने की तिथि से अधिकतम तीन माह की अवधि के भीतर अनिवार्य रूप से पूर्ण करना होगा। इससे करदाताओं पर एकमुश्त वित्तीय भार कम होगा तथा नगरीय निकायों को बकाया राजस्व की प्रभावी एवं समयबद्ध वसूली सुनिश्चित हो सकेगी।

जन-जागरूकता एवं व्यापक प्रचार-प्रसार रणनीति

एकमुश्त समाधान योजना (OTS) का यह शासनादेश जारी होने के एक माह के अन्दर समस्त नगरीय निकायों के स्तर से सभी डिफाल्टर्स को ई-मेल, एस.एम.एस. व पत्र के माध्यम से सूचित किया जाना सुनिश्चित किया जायेगा। नगरीय निकायों द्वारा विशेष शिविरों एवं गोष्ठियों का भी आयोजन किया जायेगा। होर्डिंग्स, समाचार पत्रों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करते हुए इसके सफल संचालन हेतु सभी आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित किया जायेगा।

योजना से पूर्व जमा धनराशि के संबंध में प्रावधान

एकमुश्त समाधान योजना (OTS) के प्रभावी होने से पूर्व जिन नागरिकों द्वारा बकाया राशि का पूर्ण अथवा आंशिक भुगतान किया जा चुका है, उन्हें योजना के अंतर्गत किसी भी प्रकार की धन वापसी नहीं की जायेगी।

क्रियान्वयन हेतु प्राप्त प्रक्रियागत व्यवस्था

एकमुश्त समाधान योजना (OTS) के क्रियान्वयन हेतु समस्त नगरीय निकायों द्वारा निम्न प्रक्रियागत व्यवस्था का अनुपालन किया जायेगा:-

(i) आवेदन की प्रक्रिया – लाभार्थियों द्वारा आवेदन ऑनलाइन/ऑफलाइन के माध्यम से किया जायेगा। एकमुश्त समाधान योजना (OTS) हेतु ऑनलाइन आवेदन संबंधित निकाय द्वारा अधिकृत वेबसाइट या योजना हेतु विकसित पोर्टल के माध्यम से किया जायेगा। आवेदकों के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया सुविधाजनक बनाने हेतु संबंधित निकाय द्वारा हेल्प डेस्क की व्यवस्था भी की जायेगी। ओ.टी.एस. योजना के अंतर्गत वांछित धनराशि जमा करने की सूचना लाभार्थी द्वारा दिये गये ई-मेल/एस.एम.एस./पत्र व्यवहार से दी जायेगी। यदि किसी हितबद्ध पक्ष के द्वारा योजना का स्वतः संज्ञान लेते हुए कोई आवेदन प्रस्तुत किया जाता है, तो उस आवेदन पत्र को भी इस योजना में अनिवार्य रूप से सम्मिलित किया जायेगा। 

नगरीय निकायों द्वारा प्राप्त समस्त नोटिसों/चाहे वे ऑनलाइन व ऑफ लाइन हों तथा करदाता/हितबद्ध पक्ष के द्वारा दिये गये आवेदन पत्रों को अनिवार्य रूप से पंजीकृत किया जाये तथा ओ.टी.एस. हेतु आवेदन पत्र देने के लिए 03 माह की अवधि निर्धारित होगी। ओ.टी.एस. आवेदन-पत्र जमा करने की तिथि वही मानी जाये, जिस तिथि को आवेदन पत्र अधिकृत रूप से ऑनलाइन या ऑफलाइन नगरीय निकाय को प्राप्त हो गया हो।

(ii) आवेदन-पत्रों का निस्तारीकरण – ओ.टी.एस. आवेदनों का निस्तारीकरण आवेदन प्राप्ति की तिथि से 15 दिनों के अन्दर किया जाना सुनिश्चित किया जाये। तत्पश्चात प्रवर्तन (एन्फोर्समेंट) की कार्यवाही सुनिश्चित किया जाना होगा। जिन प्रकरणों में ओटीएस हेतु आवेदन पत्र प्राप्त नहीं होगें, ऐसे डिफाल्टरों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्यवाही की जायेगी। इसके अतिरिक्त अन्तिम तिथि के बाद अनिस्तारित आवेदनों के सम्बन्ध में निकाय के कार्मिको का उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए निकाय को हुयी वित्तीय क्षति की वसूली हेतु नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही की जायेगी।

(iii) क्रियान्वयन की प्रस्तावित समय-सीमा एकमुश्त समाधान योजना (OTS) 15 अगस्त 2026 से 15 दिसम्बर 2026 तक संचालित किया जायेगा, जिससे नागरिकों को लंबित प्रकरणों के निस्तारण हेतु पर्याप्त समय उपलब्ध कराया जा सके। उक्त योजना अवधि में दिनाँक 15 अगस्त, 2026 से दिनाँक 14 सितम्बर, 2026 तक की अवधि नगरीय निकायों द्वारा हितबद्ध पक्षों को सूचित करने के लिये निर्धारित की जाए। 

इसके अतिरिक्त हितबद्ध पक्ष को इस योजना हेतु आवेदन किये जाने की अवधि दिनांक 15.08.2026 से 14.11.2026 तक होगी। इस अवधि के उपरांत कोई नया आवेदन स्वीकार नहीं किया जायेगा। उक्त अवधि में प्राप्त समस्त आवेदन पत्रों का नियमानुसार अंतिम रूप से निस्तारण प्रत्येक दशा में दिनॉक 15.12.2026 तक अनिवार्य रूप से किया जाना सुनिश्चित किया जायेगा। उक्त अवधि में निस्तारण न करने की दशा में सम्बन्धित अधिकारी एवं कर्मचारी का उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए नियमानुसार कार्यवाही की जायेगी।