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CRIH : स्वास्थ्य मेले में उमड़ी भीड़, होम्योपैथिक उपचार से लाभान्वित हुए मरीज


रिसर्च और बेहतर परिणामों से मजबूत हो रही होम्योपैथी : डा. नीरज बोरा 

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। केन्द्रीय होम्योपैथी अनुसंधान संस्थान, जानकीपुरम में विश्व होम्योपैथी दिवस के अवसर पर शुक्रवार को स्वास्थ्य मेला एवं निःशुल्क स्वास्थ्य जांच एवं परामर्श शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का उद्घाटन बतौर मुख्य अतिथि मौजूद क्षेत्रीय विधायक डॉ नीरज बोरा ने किया। उन्होंने सर्वप्रथम दीप प्रज्जवलन के साथ होम्योपैथिक के जनक डॉ. सैमुअल हनीमैन की 271वीं जयन्ती पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। 

इस दौरान डॉ. वी.ए. सिद्दीकी (सेवानिवृत्त सहायक निदेशक (हो.), के.हो.अनु.परि., नई दिल्ली), डॉ. जे.पी. सिंह (सेवानिवृत्त सहायक निदेशक (हो.), के.हो.अनु.सं., लखनऊ), विनय कृष्ण पाण्डेय (महासचिव जानकीपुरम विस्तार, संयुक्त कल्याण महासमिति), डॉ. लिपिपुष्पा देबता (प्रभारी अधिकारी), डॉ. अमित श्रीवास्तव (अनु.अधि. वै-2), डॉ. दिव्या वर्मा (अनु.अधि. वै-1) एवं सभी कर्मचारी उपस्थित रहे। 

स्वास्थ्य मेले का शुभारंभ करने के बाद विधायक डा. नीरज बोरा ने शिविर में अनुसूचित जाति उप-योजना (SCSP) के अंतर्गत लाभार्थियों को वेलनेस किट वितरित की। उन्होंने कहा कि इन किटों के माध्यम से लोग अपने दैनिक जीवन में स्वास्थ्य संरक्षण को अपनाकर लाभान्वित हो सकेंगे।

इस दौरान विधायक ने शिविर में मौजूद मरीजों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं जानीं और अनुसंधान संस्थान में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने मरीजों से संवाद करते हुए होम्योपैथिक उपचार पद्धति के लाभों पर भी चर्चा की। कार्यक्रम के उपरांत विधायक डा. नीरज बोरा ने अनुसंधान संस्थान का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा भी लिया।

विधायक डा. नीरज बोरा ने कहा कि वह सबसे पहले एक चिकित्सक हैं और उसके बाद उनका सार्वजनिक जीवन शुरू होता है। चिकित्सा सेवा उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा है और अंतिम सांस तक वह इससे जुड़े रहेंगे। इसी कारण जब भी उन्हें अपने पेशे से जुड़े किसी कार्यक्रम में आमंत्रण मिलता है, वह उसे सहर्ष स्वीकार करते हैं।

उन्होंने कहा कि इस संस्थान की स्थापना से पहले ही यहां एक उत्कृष्ट चिकित्सा केंद्र की कल्पना की गई थी, जो आज साकार रूप ले चुकी है। उन्होंने बताया कि उद्घाटन के समय देश के आयुष मंत्री की उपस्थिति में इसकी शुरुआत हुई थी और तब से यह संस्थान निरंतर प्रगति कर रहा है।

डा. बोरा ने खुशी जताते हुए कहा कि आज इस अस्पताल में दूर-दराज़ क्षेत्रों ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों से भी मरीज उपचार के लिए आ रहे हैं, जो यहां मिलने वाले प्रभावी इलाज का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि यह संस्थान एक रिसर्च हब के रूप में भी विकसित हो रहा है, जहां विभिन्न रोगों पर शोध कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनके परिवार में भी कई गंभीर बीमारियों का सफल इलाज होम्योपैथी से हुआ है, जिससे उनका इस पद्धति पर विश्वास और मजबूत हुआ है।

 उन्होंने कहा कि होम्योपैथिक चिकित्सा अब केवल पारंपरिक पद्धति नहीं रह गई है, बल्कि शोध और प्रमाणों के आधार पर एक स्थापित विज्ञान के रूप में उभर रही है। होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति सुरक्षित, सरल एवं किफायती है, जो आम जनमानस के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है। उन्होंने आम जनता के लिए आयोजित इस प्रकार के स्वास्थ्य मेलों को जनकल्याण की दिशा में एक सराहनीय पहल बताया।

विधायक ने केंद्र सरकार की नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत अब आयुष पद्धतियों को भी शामिल किया गया है, जिससे आम लोगों को निःशुल्क उपचार की सुविधा मिल रही है। उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों से अपील की कि वे इस अस्पताल में उपलब्ध विशेष सुविधाओं का लाभ उठाएं।

स्वास्थ्य मेले में मरीजों की निशुल्क हीमोग्लोबिन, ब्लड शुगर एवं रक्तचाप जांच कर विशेषज्ञ होम्योपैथिक चिकित्सकों द्वारा निःशुल्क औषधियां प्रदान की गईं। साथ ही, विभिन्न रोगों के प्रति जागरूकता हेतु परामर्श भी दिया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया। महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं पर विशेष ध्यान दिया गया।

संस्थान कि प्रभारी अधिकारी डॉ. लिपिपुष्पा देबता ने बताया कि इस प्रकार के आयोजन का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों तक सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना तथा होम्योपैथी के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। उन्होने संस्थान की वर्तमान परियोजना हाइपोथायराइड, मसों (वार्ट), सफेद दाग (विटिलिगों), बहु-रोग, सर्वाइकल लिम्फाडेनोपैथी, उष्णकटिबंधीय लहर (हीट वेव), माइग्रेन, मोलस्कम कॉन्टैजियोसम, किशोरीवस्था में प्राथमिक मासिक धर्म पीड़ा, फैटी लिवर रोग, दवा के प्रतिकूल प्रभाव के बारे में बताया।

इसके साथ ही नैदानिक सत्यापन, एस.सी.एस.पी- रोगियों की संतुष्टि सर्वेक्षण तथा विटामिन-डी की कमी और होम्योपैथी एवं आगामी परियोजना मासिक स्वास्थ्य, डायबिटीज मेलिटस और य़ोग, डायबिटीज मेलिटस और मदर टिंचर, सौम्य न्यूरोकॉग्निटिव विकार, मटीरिया मेडिका, एलर्जिक राइनाटिस, सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस, हाइपर यूरीसीमिय़ा, मेलाज्मा के बारे में विस्तृत जानकारी दी। जिससे आमजनमानस इन योजनाओं का अधिकतम लाभ उठा सकें। 

यह शिविर केन्द्रीय होम्योपैथी अनुसंधान संस्थान में प्रत्येक माह के चतुर्थ शनिवार को आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम के अंत में सभी अधिकारिय़ों, कर्मचारियों, अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

विश्व होम्योपैथी दिवस 2026 के अवसर पर, केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान संस्थान, लखनऊ ने “वृद्धावस्था देखभाल में होम्योपैथिक अनुसंधान को आगे बढ़ाना: प्रमाण, चुनौतियाँ और भविष्य की दिशाएँ” और “अंतर से प्रमाण तक: बाल चिकित्सा होम्योपैथिक अनुसंधान में बहस और भविष्य की दिशाएँ” विषयों पर पैनल चर्चा के दो सत्रों का भी आयोजन किया। सत्र के मुख्य अतिथि डॉ. वी.ए. सिद्दीकी (सेवानिवृत्त सहायक निदेशक (एच), केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान संस्थान) थे।