लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। फिक्की फ्लो लखनऊ चैप्टर ने अपना ‘चेंज ऑफ़ गार्ड’ समारोह मनाया, जिसमें सिमरन साहनी को 2026–27 के लिए 12वीं चेयरपर्सन के रूप में शामिल किया गया। इस शाम का मुख्य आकर्षण डॉ. किरण बेदी के साथ एक प्रेरणादायक सत्र था। अपनी प्रभावशाली उपस्थिति और ज़ोरदार कहानी कहने के अंदाज़ से, उन्होंने अनुशासन, नेतृत्व और दृढ़ता से भरी अपनी यात्रा से मिली गहरी सीख साझा की।
समारोह में बतौर मुख्य अतिथि फिक्की फ्लो की 43वीं राष्ट्रीय अध्यक्ष, पूजा गर्ग उपस्थित रहीं। निवर्तमान चेयरपर्सन वंदिता अग्रवाल ने नई नेतृत्व टीम के सदस्यों से परिचय कराते हुए अपनी ज़िम्मेदारी (बैटन) उन्हें सौंपी।
पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल और ‘सुपर कॉप’ डॉ. किरण बेदी ने सिमरन साहनी और देवांशी सेठ के साथ एक संवादात्मक सत्र में कहा कि महिलाएं घर, दफ्तर या किसी भी अन्य क्षेत्र में जन्मजात प्रबंधक होती हैं और शासन-प्रशासन के लिए पूरी तरह उपयुक्त होती हैं।
उन्होंने कहा, “महिलाओं को सुलभ और दृश्यमान होना चाहिए, उन्हें दबाव में नहीं आना चाहिए, बल्कि समाधान खोजने चाहिए और आगे बढ़ने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। नारीवाद का उद्देश्य महिलाओं को और अधिक सशक्त बनाना नहीं है, क्योंकि वे पहले से ही सशक्त हैं। इसका उद्देश्य तो दुनिया के उस नज़रिए को बदलना है, जिससे वह महिलाओं की इस शक्ति को देखती है।”

किरण बेदी ने कहा, “मैं लोगों से जुड़ना चाहती थी और इसी चाहत ने मुझे पुलिस सेवा में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। पुडुचेरी की उपराज्यपाल के तौर पर अपने पाँच साल के कार्यकाल के दौरान, मैंने अपनी कई आदतों में बदलाव किया और कई नए विचार लागू किए, जिनकी बदौलत मैं इस सार्वजनिक पद पर रहते हुए असाधारण नेतृत्व प्रदान कर सकी।”
पुडुचेरी की उपराज्यपाल के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान लोगों द्वारा उन्हें ‘माँ’ या ‘बहन’ कहकर संबोधित किए जाने की बात याद करते हुए उन्होंने कहा कि लोगों के साथ एक मानवीय जुड़ाव स्थापित करना ही किसी महिला को विशेष बनाता है। उन्होंने महिलाओं से आह्वान किया कि वे अपने नेतृत्व में इस मानवीय जुड़ाव को एक सकारात्मक बदलाव के माध्यम (transformation tool) के रूप में इस्तेमाल करें।
डॉ किरन बेदी ने कहा कि आत्मविश्वास समय के साथ बढ़ता है,अन्याय बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। माता-पिता के तौर पर, आपका बच्चा जो कुछ भी देखता है, उसका उस पर गहरा असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि साहस का मतलब है कि आप अपने आस-पास की चीज़ों के प्रति कितने संवेदनशील हैं—क्या वे आपको स्वीकार्य हैं? अगर हाँ या नहीं, तो क्यों? विकास का मतलब है उन स्थितियों पर प्रतिक्रिया देना जो मुझे स्वीकार्य नहीं हैं। सबके साथ समान व्यवहार करें और अपने फ़ैसलों पर अडिग रहें।
कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण लखनऊ जेल में ‘रेडियो परवाज़’ की शुरुआत थी। यह ‘इंडिया विज़न फाउंडेशन’ की एक पहल है, जो अब लगभग 3,100 कैदियों तक पहुँच रही है। फ्लो ने 10 कैदियों के बच्चों की शिक्षा के लिए भी अपने समर्थन की घोषणा की, जिससे सामाजिक प्रभाव के प्रति उसकी प्रतिबद्धता और मज़बूत हुई।
इस शाम ‘अपोलो प्रिविलेज कार्ड’ का भी अनावरण किया गया। यह फ्लो लखनऊ के ‘हेल्थ वर्टिकल’ द्वारा ‘अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटल्स’ के सहयोग से शुरू की गई एक विचारशील पहल है, जिसका उद्देश्य सदस्यों के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा को अधिक सुलभ और सशक्त बनाना है।
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