नई दिल्ली (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। यूरोपियन यूनियन, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड और दूसरे बड़े मार्केट समेत कई इलाकों के साथ हाल ही में हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से देश के MSME सेक्टर को डेवलप्ड मार्केट के बड़े हिस्से तक पहुँच बनाने में मदद मिलेगी। यह भारतीय मैन्युफैक्चरर्स के लिए आगे आने, ग्लोबल डिमांड को पूरा करने और इंटरनेशनल सप्लाई चेन का एक ज़रूरी हिस्सा बनने का एक बड़ा मौका है।
जितिन प्रसाद (केंद्रीय राज्य मंत्री, वाणिज्य और उद्योग) ने कहा, “भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ एमएसएमई क्षेत्र का ध्यान भारत की गुणवत्ता आधारित विकास की यात्रा को मजबूत करने की ओर होना चाहिए। उन्हें पैमाने और कम लागत वाले विनिर्माण से गुणवत्ता-संचालित उत्पादन की ओर स्थानांतरित होना चाहिए। वर्तमान में 65 प्रतिशत विकसित बाजार एफटीए का हिस्सा हैं, ये राष्ट्र सर्वोत्तम गुणवत्ता वाले उत्पाद चाहते हैं। इसी तरह भारतीय, जिनमें डिजिटल पहुंच वाले ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग भी शामिल हैं, गुणवत्ता वाले उत्पाद चाहते हैं। शून्य शुल्क का मतलब यह नहीं है कि ये विकसित देश हमारे देश में घटिया उत्पाद डंप कर सकते हैं।”
इलेक्ट्रॉनिक्स और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, FICCI FLO नेशनल MSME अवॉर्ड सेरेमनी में बोलते हुए उन्होंने कहा कि “MSME एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) का मकसद उन्हें ग्लोबल वैल्यू चेन में इंटीग्रेट करना है। EU के साथ FTA जैसे FTA छोटे बिज़नेस के लिए फेयर, इनक्लूसिव और मार्केट-एक्सेस के मौके बनाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। भारत की 1.4 बिलियन से ज़्यादा लोगों की बड़ी और बढ़ती एस्पिरेशनल आबादी के साथ, देश क्वालिटी प्रोडक्ट्स और सर्विसेज़ के लिए एक बड़ा और बढ़ता हुआ मार्केट है। एंटरप्रेन्योर्स को ऐसे ग्लोबली कॉम्पिटिटिव सामान बनाने पर फोकस करना चाहिए जो इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स को पूरा करते हों।”
उन्होंने कहा, “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तेज़ी से हेल्थकेयर और ट्रांसपोर्टेशन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज़ तक सभी इंडस्ट्रीज़ में एक ज़रूरी टूल बनता जा रहा है। MSMEs को प्रोडक्टिविटी, एफिशिएंसी और डिसीजन-मेकिंग को बेहतर बनाने के लिए AI टेक्नोलॉजी अपनानी चाहिए, साथ ही बिज़नेस को रूटीन ऑपरेशनल कामों से फ्री करना चाहिए।”
इस मौके पर नेशनल स्मॉल इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन (NSIC) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) डॉ. सुभ्रांशु शेखर आचार्य ने टारगेटेड सपोर्ट, डिजिटल एम्पावरमेंट और स्किल ट्रेनिंग के ज़रिए महिलाओं के नेतृत्व वाले डेवलपमेंट को बढ़ावा देने पर ज़ोर दिया। डॉ. आचार्य ने कहा, “NSIC ने ट्रेड इनेबलमेंट एंड मार्केटिंग (TEAM) पहल को बहुत बढ़ावा दिया है, जिसका मकसद 5 लाख MSMEs को ONDC प्लेटफॉर्म पर लाना है। खास टारगेट यह है कि इनमें से 50% महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यम हों।”
फिक्की लेडीज़ ऑर्गनाइज़ेशन (FLO) की नेशनल प्रेसिडेंट सुश्री पूनम शर्मा ने कहा, “स्टार्टअप से लेकर स्पेस तक, मैन्युफैक्चरिंग से लेकर टेक्नोलॉजी तक, आज महिलाएं सिर्फ़ इकॉनमी में हिस्सा ही नहीं ले रही हैं, बल्कि वे ग्रोथ की पावरफुल ड्राइवर भी हैं। माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइज भारत की इकॉनमिक ग्रोथ की रीढ़ हैं। वे इनोवेशन को बढ़ावा देती हैं, रोज़गार पैदा करती हैं और पूरे देश में लोकल इकॉनमी को मज़बूत करती हैं। इस इकोसिस्टम में, महिलाओं के नेतृत्व वाली MSMEs इनक्लूसिव डेवलपमेंट के पावरफुल इंजन के तौर पर उभर रही हैं।”
उन्होंने कहा, “देश में बिज़नेस करने वाली महिलाओं की सबसे बड़ी बॉडी फिक्की FLO भारत में महिलाओं की इकॉनमिक भागीदारी और लीडरशिप को मज़बूत करने के लिए कमिटेड रही है। फिक्की की महिला विंग के तौर पर, FLO ने स्किल डेवलपमेंट, एंटरप्रेन्योरशिप सपोर्ट, पॉलिसी एडवोकेसी और लीडरशिप मेंटरिंग के ज़रिए महिलाओं को मज़बूत बनाने की दिशा में लगातार काम किया है। और इसी भावना से, FLO MSME असिस्ट सेल को महिलाओं के नेतृत्व वाली MSMEs को एक कॉम्प्रिहेंसिव सपोर्ट इकोसिस्टम देकर मज़बूत करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।”
सुश्री शर्मा ने कहा, “यह सेल महिला एंटरप्रेन्योर्स को इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स, मेंटर्स और स्पेशलिस्ट्स से जोड़ता है, जो फंडिंग, मार्केटिंग, एक्सपेंशन स्ट्रेटेजी, टेक्नोलॉजी अपनाने और बिज़नेस स्किलिंग जैसे ज़रूरी एरिया में काम करते हैं। यह पहल FLO के इस कमिटमेंट को दिखाती है कि महिला एंटरप्रेन्योर्स न सिर्फ़ बिज़नेस शुरू कर सकें, बल्कि उन्हें स्केल करने, बनाए रखने और सफल होने के लिए भी मज़बूत बनाया जाए।”
ग्यारह महिला MSME एंटरप्रेन्योर्स को अवॉर्ड दिए गए। इस मौके पर मौजूद लोगों में MP अनुराग शर्मा, FLO MSME इनिशिएटिव्स की हेड रूबी गर्ग और FLO के कई पुराने प्रेसिडेंट शामिल थे।
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