लखनऊ (शम्भू शरण वर्मा/टेलीस्कोप टुडे)। उन्नाव जनपद के विकासखंड औरास के गांव परौरी की रहने वाली पूनम अपने हुनर और मेहनत के दम पर न सिर्फ खुद आर्थिक रूप से सशक्त बनी, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार का रास्ता खोल दिया है। पूनम जरदोजी कढ़ाई का काम करके आत्मनिर्भर बनीं और अब अपने साथ 30 ग्रामीण महिलाओं को भी जोड़कर उन्हें रोजगार उपलब्ध करा रही हैं। पूनम के इस प्रयास से गांव की आधी आबादी के जीवन में खुशियों का उजाला होने की उम्मीद बढ़ गई है।
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पुस्तैनी कार्य को बढ़ा रहीं आगे
पूनम के मुताबिक वर्ष 2002 में उनका विवाह परौरी निवासी दिनेश कुमार के साथ हुआ था। उनके ससुराल में जरदोजी का कार्य पुस्तैनी है और वर्ष 2003 में उन्होंने भी इस कार्य की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने जरदोजी कढ़ाई का काम सीखकर घर से ही काम शुरू किया। धीरे-धीरे उनके काम की गुणवत्ता और मेहनत के कारण उन्हें ऑर्डर मिलने लगे और उनकी आमदनी बढ़ने लगी।

महिलाओं को रोजगार से जोड़ा
काम बढ़ने पर पूनम ने अन्य महिलाओं को भी इस कार्य से जोड़कर उन्हें स्वावलंबी बनाने की ठानी। वर्ष 2017 में पूनम देवी कृषि विज्ञान केंद्र धौरा की वैज्ञानिक डॉ. अर्चना सिंह से मिलीं। उनकी प्रेरणा से पूनम ने ‘ओम नमः शिवाय महिला स्वयं सहायता समूह’ का गठन कर 10 महिलाओं को इस काम से जोड़ा और उन्हें जरदोजी कढ़ाई का प्रशिक्षण दिया। वर्तमान में उनके साथ करीब 30 महिलाएं काम कर रही हैं और अपनी मेहनत से आय अर्जित कर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत बना रही हैं।
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महोत्सव और आयोजनों में भी लगाती हैं स्टॉल
खुद के साथ ही अन्य महिलाओं के हुनर को जन-जन तक पहुंचाने के लिए पूनम महोत्सव और विभिन्न आयोजनों में स्टॉल भी लगाती हैं। पूनम ने बताया कि कुछ माह पहले लखनऊ के जानकीपुरम विस्तार क्षेत्र में नहर रोड पर प्रगति इवेंट द्वारा आयोजित ‘यूपी महोत्सव’ में भी उन्होंने स्टॉल लगाया था। वहां लोगों के साथ ही आयोजन समिति के अध्यक्ष विनोद सिंह और उपाध्यक्ष एनबी सिंह ने भी उनके प्रयासों की सराहना की थी।


सरकारी योजनाओं से मिली नई राह
पूनम केवल जरदोजी के कार्य तक ही सीमित नहीं रहीं। सरकारी योजनाओं से प्रेरित होकर उन्होंने एक वर्ष पहले कृषि विज्ञान केंद्र से एक्वेरियम बनाने का प्रशिक्षण भी लिया। इसके बाद सरकार की ओर से औरास में उन्हें एक निःशुल्क दुकान भी आवंटित कर दी गई, जिसका कोई किराया नहीं देना पड़ता। अब वह जरदोजी के साथ ही एक्वेरियम बनाने का प्रशिक्षण भी महिलाओं को दे रही हैं, जिससे उन्हें रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं।


महिलाओं को मिला आर्थिक संबल
पूनम के इस प्रयास से न सिर्फ परिवार का पुस्तैनी कार्य आगे बढ़ रहा है, बल्कि ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। पूनम ने बताया कि वह स्वयं प्रति माह करीब 25 हजार रुपये कमा रही हैं, जबकि उनसे जुड़ी महिलाएं भी लगभग 10 हजार रुपये प्रतिमाह कमा रही हैं।

पूनम की इस पहल से गांव की महिलाओं में आत्मनिर्भर बनने का उत्साह बढ़ा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह महिलाओं को रोजगार के अवसर मिलते रहे तो गांव की आधी आबादी के जीवन में खुशियों का उजाला और अधिक बढ़ेगा।
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