नैना स्वयं सहायता समूह के जरिए गांव में ही मिला रोजगार, बढ़ी आमदनी और आत्मनिर्भरता
लखनऊ (शम्भू शरण वर्मा/टेलीस्कोप टुडे)। आमतौर पर लोग घर में पड़े वेस्ट मैटेरियल को बेकार समझकर फेंक देते हैं, लेकिन उन्नाव जनपद के ब्लॉक क्षेत्र के गोविंदापुर गांव के मजरा गोबरा की केतकी देवी ने अपनी रचनात्मक सोच और मेहनत से बेकार समझी जाने वाली चीजों को भी कीमती बना दिया है। नैना स्वयं सहायता समूह के माध्यम से टेडी बियर बनाकर वह न केवल अपनी बल्कि करीब 30 अन्य महिलाओं की जिंदगी संवार रही हैं। गांव में ही रोजगार मिलने से इन महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

केतकी देवी बताती हैं कि उन्हें बचपन से ही कुछ नया करने की आदत रही है। बेकार पड़ी वस्तुओं से रचनात्मक चीजें बनाने का उन्हें शौक था। इसी शौक के चलते उन्होंने पुराने कपड़ों और अन्य वेस्ट मैटेरियल से घर की सजावट की कई कलाकृतियां बनाईं। खास बात यह है कि उन्होंने टेडी बियर बनाने की कोई औपचारिक ट्रेनिंग नहीं ली, बल्कि घर में पड़े वेस्ट मैटेरियल से खुद प्रयोग करते हुए और सोशल मीडिया की मदद से यह कला सीखी।

बीएससी की पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्ष 2020 में उन्होंने नैना स्वयं सहायता समूह का गठन किया। शुरुआत में 12 महिलाओं को समूह से जोड़ा गया, जो अब बढ़कर करीब 30 हो चुकी हैं। समूह की महिलाओं ने ऋण लेकर गांव में ही टेडी बियर बनाने का काम शुरू किया। उनकी मेहनत और बेहतर गुणवत्ता के कारण अब इन टेडी बियर की मांग आसपास के जनपदों तक पहुंच गई है। इस कार्य में उनके पति दिनेश कुमार भी पूरा सहयोग करते हैं।

कम कीमत और अच्छी गुणवत्ता के कारण बाजार में इन टेडी बियर की मांग तेजी से बढ़ रही है। दुकानदारों से भी अच्छे ऑर्डर मिलने लगे हैं, जिससे समूह से जुड़ी महिलाओं की आय में लगातार वृद्धि हो रही है।

केतकी देवी ने बताया कि कुछ माह पूर्व लखनऊ के जानकीपुरम विस्तार क्षेत्र में नहर रोड पर प्रगति इवेंट द्वारा आयोजित यूपी महोत्सव में भी उन्होंने स्टॉल लगाया था। वहां लोगों के साथ ही आयोजन समिति के अध्यक्ष विनोद सिंह और उपाध्यक्ष एनबी सिंह ने उनके प्रयासों की सराहना की। इसके अलावा अन्य महोत्सवों और आयोजनों में भी समूह द्वारा स्टॉल लगाकर अपने उत्पादों को लोगों तक पहुंचाया जाता है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में वह अपने पति के साथ मिलकर करीब 40 हजार रुपये प्रतिमाह कमा रही हैं, जबकि समूह से जुड़ी प्रत्येक महिला की भी लगभग 8 हजार रुपये मासिक आय हो रही है। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधनों की कमी नहीं होती, जरूरत केवल सही नजरिये की होती है। उनका यह प्रयास आज कई महिलाओं के जीवन में उम्मीद की नई रोशनी जगा रहा है।

महिलाओं को दे रहीं प्रशिक्षण, बना रहीं आत्मनिर्भर
केतकी देवी अपने समूह की महिलाओं के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों की महिलाओं को भी प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा आयोजित विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भी उन्हें बतौर ट्रेनर आमंत्रित किया जाता है।
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