लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। CSIR-CIMAP में चल रहे आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण औषधीय एवं सुगंधित फसलों पर आधारित पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन शुक्रवार को हुआ। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 16 से 20 फरवरी तक ATMA, सारण (बिहार) द्वारा प्रायोजित और सीएसआईआर अरोमा मिशन के अंतर्गत संचालित किया गया।
इस कार्यक्रम में छपरा, बिहार के 27 प्रगतिशील किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को औषधीय एवं सुगंधित फसलों की वैज्ञानिक खेती, प्रसंस्करण तथा मूल्य संवर्धन संबंधी व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना था।
समापन सत्र में डॉ. ज़बीर अहमद (निदेशक, सीएसआईआर-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटिव मेडिसिन (CSIR-IIIM), जम्मू एवं निदेशक सीएसआईआर-सीमैप, लखनऊ) ने ऑनलाइन संबोधन देते हुए अरोमा मिशन की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि मिशन समस्याग्रस्त क्षेत्र, पहाड़ी क्षेत्रों, एवं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में विशेष रूप से किसानों के आय का स्त्रोत साबित हो रहा है तथा यह वैज्ञानिकों, किसानों एवं उद्योग को एक मंच पर जोड़कर भारतीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बना रहा है। उन्होंने मूल्य संवर्धन के महत्व पर भी विशेष बल दिया।
इस अवसर पर डॉ. संजय कुमार (प्रशिक्षण समन्वयक एवं प्रधान अन्वेषक, सीएसआईआर अरोमा मिशन) ने औषधीय एवं सुगंधित फसलों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये फसलें कृषि विविधीकरण, सतत विकास तथा किसानों की आय दोगुनी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

डॉ. आर.के. श्रीवास्तव (प्रमुख, व्यवसाय विकास) ने फसलोत्तर प्रबंधन, स्टार्टअप अवसरों तथा उद्योग स्थापना में सीएसआईआर-सीमैप द्वारा प्रदान की जाने वाली तकनीकी सहायता के बारे में जानकारी दी। डॉ. आर.एस. शर्मा (नोडल अधिकारी, बिहार, सीएसआईआर अरोमा मिशन) ने बिहार में सुगंधित फसलों की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. रुशीकेश एन. भिसे द्वारा किया गया तथा उन्होंने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। प्रतिभागी किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की और इसे अत्यंत उपयोगी बताया। यह कार्यक्रम किसानों के सशक्तिकरण, तकनीक हस्तांतरण एवं उद्यमिता विकास की दिशा में सीएसआईआर-सीमैप की प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करता है।
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