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पश्चिम बंगाल में डीजीपी नियुक्ति फिर उलझी, यूपीएससी ने कैट के आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में दी चुनौती

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में नए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति को लेकर स्थिति एक बार फिर जटिल हो गई है। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने इस मामले में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) के आदेश को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। कैट ने इसी महीने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी राजीव कुमार की सेवानिवृत्ति तिथि (31 जनवरी) से पहले नए डीजीपी की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी की जाए।दरअसल, कैट ने 21 जनवरी को आदेश दिया था कि राज्य सरकार 23 जनवरी तक डीजीपी पद के लिए पात्र भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारियों का पैनल यूपीएससी को भेजे, ताकि 31 जनवरी तक पूरी चयन प्रक्रिया पूरी की जा सके। इस आदेश के अनुपालन में राज्य सरकार ने पिछले सप्ताह आठ वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नामों का पैनल यूपीएससी को भेजा, जिसमें वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी राजीव कुमार का नाम भी शामिल है। साथ ही राज्य सरकार ने राजीव कुमार के कार्यकाल में विस्तार की भी मांग की है।हालांकि, जब यह माना जा रहा था कि डीजीपी नियुक्ति को लेकर स्थिति सामान्य हो जाएगी, तभी यूपीएससी द्वारा कैट के आदेश को चुनौती दिए जाने से नई अड़चन खड़ी हो गई। फिलहाल पश्चिम बंगाल पुलिस के पास कोई पूर्णकालिक डीजीपी नहीं है और राजीव कुमार कार्यवाहक डीजीपी के रूप में कार्यरत हैं।नियमों के अनुसार, किसी भी राज्य सरकार को डीजीपी पद पर नियुक्ति के लिए राज्य के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का पैनल यूपीएससी को भेजना होता है और अंतिम मंजूरी आयोग द्वारा दी जाती है। लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा भेजे गए पैनल को लेकर विवाद तब खड़ा हुआ, जब यूपीएससी ने पहले उस सूची को लौटा दिया था।यूपीएससी के ऑल इंडिया सर्विस निदेशक नंद किशोर कुमार ने राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को यह भी सलाह दी है कि राजीव कुमार के उत्तराधिकारी की नियुक्ति के लिए आवश्यक अनुमति के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख किया जाए।वास्तव में इस पूरे विवाद की जड़ दिसंबर 2023 में तत्कालीन डीजीपी मनोज मालवीय की सेवानिवृत्ति से जुड़ी है। उस समय राज्य सरकार को उनके उत्तराधिकारी के चयन के लिए तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का पैनल यूपीएससी को भेजना था, लेकिन ऐसा न कर राजीव कुमार को कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त कर दिया गया।यूपीएससी का कहना है कि जुलाई 2018 में उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश के अनुसार, किसी भी राज्य सरकार को मौजूदा डीजीपी की सेवानिवृत्ति से कम से कम तीन महीने पहले नए डीजीपी के लिए पैनल भेजना अनिवार्य है। इस आधार पर आयोग का तर्क है कि पश्चिम बंगाल सरकार को सितंबर 2023 में ही पैनल भेज देना चाहिए था, क्योंकि मनोज मालवीय दिसंबर 2023 में सेवानिवृत्त हुए थे।प्रक्रिया के पालन में हुई देरी और कानूनी विवादों के चलते पश्चिम बंगाल में नए डीजीपी की नियुक्ति को लेकर प्रशासनिक और संवैधानिक संकट और गहराता जा रहा है।—————-