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बैंकों में ताले, एटीएम खाली, सड़कों पर उतरे बैंककर्मी


5 दिवसीय बैंकिंग की मांग को लेकर बैंककर्मियों का जोरदार प्रदर्शन

लखनऊ (शम्भू शरण वर्मा/टेलीस्कोप टुडे)। पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू किए जाने की मांग को लेकर मंगलवार को देशव्यापी बैंक हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) के आह्वान पर देशभर के बैंककर्मी राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर रहे। इस दौरान बैंकों में ताले लटके रहे और कर्मचारी सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करते नजर आए।

हड़ताल को लेकर बैंककर्मियों में जबरदस्त आक्रोश और एकजुटता दिखाई दी। बैंककर्मी संगठनों का कहना है कि लंबे समय से लंबित मांगों की अनदेखी के चलते अब आर-पार की लड़ाई के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। कर्मचारियों का मुख्य आग्रह है कि वर्तमान छह दिवसीय कार्य प्रणाली को समाप्त कर पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू की जाए।

छह दिवसीय कार्यप्रणाली से बढ़ा दबाव

कर्मचारी संगठनों के अनुसार मौजूदा छह दिवसीय कार्य प्रणाली के कारण बैंककर्मियों पर अत्यधिक कार्यभार पड़ रहा है। इससे न केवल उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, बल्कि बैंकिंग सेवाओं की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि विश्व के कई देशों में बैंकिंग क्षेत्र में पांच दिवसीय कार्य प्रणाली सफलतापूर्वक लागू है, ऐसे में भारत में भी इसे अपनाया जाना चाहिए।

लगातार चौथे दिन ठप रहीं बैंकिंग सेवाएं

हड़ताल के कारण आम जनता को भी भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। उल्लेखनीय है कि 24 जनवरी को चौथा शनिवार, 25 जनवरी को रविवार और 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस का राष्ट्रीय अवकाश होने के चलते पहले से ही बैंक बंद थे। इसके बाद 27 जनवरी को बैंककर्मियों की हड़ताल के कारण लगातार चौथे दिन बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह ठप रहीं।

नकद निकासी, चेक क्लियरेंस, ड्राफ्ट, पासबुक अपडेट, ऋण से जुड़े कार्य और अन्य शाखा आधारित सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं। वहीं अधिकांश एटीएम में नकदी समाप्त होने से लोगों को निराश लौटना पड़ा। कई बैंक शाखाओं के बाहर हड़ताल की सूचना वाले बोर्ड लगे दिखे, जबकि एटीएम पर “कैश नहीं है” के संदेश नजर आए।

डिजिटल सेवाएं आंशिक रूप से चालू

बैंककर्मी संगठनों ने पहले ही स्पष्ट किया था कि एटीएम, इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग जैसी डिजिटल सेवाएं सामान्य रूप से चालू रह सकती हैं, हालांकि तकनीकी कारणों से कुछ सेवाओं में असुविधा संभव है।

905 शाखाओं के 16 हजार कर्मचारी हड़ताल पर, 2500 करोड़ की क्लियरिंग प्रभावित

वहीं 5 दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू किए जाने की मांग को लेकर मंगलवार को राजधानी लखनऊ में सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारियों ने बैंक शाखाओं एवं अंचल कार्यालयों पर ताला बंदी कर जोरदार प्रदर्शन किया। इसके पश्चात बैंककर्मी जुलूस की शक्ल में हजरतगंज स्थित इंडियन बैंक की मुख्य शाखा पर एकत्र हुए, जहां यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के बैनर तले सभा का आयोजन किया गया।

सभा को संबोधित करते हुए फोरम के जिला संयोजक अनिल श्रीवास्तव ने बताया कि 5 दिवसीय बैंकिंग की मांग को लेकर बैंककर्मियों ने देशभर में 5 दिवसीय धरना, प्रदर्शन, रैलियां तथा सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अभियान भी चलाया, लेकिन केंद्र सरकार एकमात्र मांग मानने को तैयार नहीं है।

एनसीबीई के महामंत्री कॉमरेड डी.के. सिंह ने कहा कि जब रिजर्व बैंक, एलआईसी, सेबी, नाबार्ड, एनपीसीआई, सीवीसी, डीएफएस सहित अनेक सरकारी विभागों में 5 कार्यदिवस लागू हैं, तो बैंकों में यह व्यवस्था क्यों नहीं हो सकती। वहीं कॉम. आर.एन. शुक्ला ने कहा कि बैंककर्मी माह में शेष 2 या 3 शनिवारों के अवकाश की मांग कर रहे हैं और इसके बदले प्रतिदिन 40 मिनट अतिरिक्त कार्य करने को भी तैयार हैं।

कॉम. एस.के. संगतानी ने कहा कि इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) पहले ही इस मांग को स्वीकार कर सरकार के पास अनुमोदन हेतु भेज चुका है, लेकिन सरकार की ओर से कोई निर्णय नहीं लिया जा रहा है।

सभा में कॉम. मनमोहन दास ने कहा कि 5 दिवसीय बैंकिंग कोई भीख नहीं बल्कि बैंककर्मियों का अधिकार है और इसके लिए लंबी लड़ाई लड़ी जाएगी। INBOC के प्रदेश महासचिव संदीप सिंह, काम. लक्ष्मण सिंह, शकील अहमद, वी.के. माथुर, बी.डी. पांडे, एस.डी. मिश्रा, विभाकर कुशवाहा, आनंद सिंह, विशाखा वर्मा, स्वाति सिंह सहित अन्य बैंक नेताओं ने कहा कि हड़ताल से आम जनता को होने वाली असुविधा की पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है।

प्रदर्शन में कॉम. वी.के. सेंगर, राकेश पाण्डेय, ललित श्रीवास्तव, मनीषकांत, एस.के. अग्रवाल, नंदू त्रिवेदी, वी.के. श्रीवास्तव, अनुषा दुबे, विनय श्रीवास्तव, प्रीति वर्मा सहित अन्य वक्ताओं ने कहा कि अत्यधिक कार्यदबाव और मानसिक तनाव को देखते हुए 5 दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था शीघ्र लागू की जानी चाहिए।

इस दौरान धनंजय सिंह, आकाश शर्मा, यूपी दुबे, करुणेश शुक्ला, तारकेश्वर चौहान, आशुतोष वर्मा, शिवकुमार सिंह, ब्रजेश तिवारी, आर.पी. सिंह, अमित सिंह सहित अन्य बैंकनेताओं ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो बैंककर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल के लिए मजबूर होंगे।

फोरम के मीडिया प्रभारी अनिल तिवारी ने बताया कि देशव्यापी बैंक हड़ताल के कारण लखनऊ में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की लगभग 905 शाखाओं के करीब 16,000 कर्मचारी एवं अधिकारी हड़ताल पर रहे। अनुमान के अनुसार राजधानी में लगभग 2500 करोड़ रुपये की बैंकिंग क्लियरिंग प्रभावित हुई।