लखनऊ (शम्भू शरण वर्मा/टेलीस्कोप टुडे)। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) के बैनर तले बैंककर्मियों ने आर-पार की लड़ाई का मन बनाते हुए अपने आंदोलन को तेज कर दिया है। पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू किए जाने की मांग को लेकर देशभर के बैंक कर्मचारी 27 जनवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर रहेंगे। इस हड़ताल को लेकर बैंककर्मियों में जबरदस्त आक्रोश और एकजुटता देखने को मिल रही है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि लंबे समय से लंबित मांगों की अनदेखी के कारण अब संघर्ष के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
बैंककर्मी संगठनों के अनुसार वर्तमान में लागू छह दिवसीय कार्य प्रणाली से कर्मचारियों पर अत्यधिक कार्यभार पड़ रहा है, जिससे न केवल उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है बल्कि कार्य की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। ऐसे में पांच दिवसीय बैंकिंग को लागू करना समय की मांग है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि दुनिया के कई देशों में बैंकिंग सेक्टर में पांच दिवसीय कार्य व्यवस्था सफलतापूर्वक लागू है और भारत में भी इसे अपनाया जाना चाहिए।
इस हड़ताल के चलते आम जनता को भी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल, 24 जनवरी को चौथा शनिवार होने के कारण बैंक पहले से ही बंद रहेंगे, 25 जनवरी को रविवार का अवकाश है और 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस का राष्ट्रीय अवकाश रहेगा। इसके बाद 27 जनवरी को बैंककर्मियों द्वारा घोषित हड़ताल के चलते लगातार चार दिन तक बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह ठप रहने की संभावना है। इससे नकद निकासी, चेक क्लियरेंस, ड्राफ्ट, पासबुक अपडेट, लोन संबंधी कार्य और अन्य शाखा आधारित सेवाएं प्रभावित होंगी।
बैंककर्मी संगठनों ने आम उपभोक्ताओं से पहले ही आवश्यक बैंकिंग कार्य निपटाने की अपील की है, ताकि अवकाश और हड़ताल के दौरान उन्हें परेशानी न हो। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि डिजिटल बैंकिंग सेवाएं जैसे एटीएम, इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग सामान्य रूप से जारी रह सकती हैं, हालांकि कुछ सेवाओं में तकनीकी कारणों से दिक्कत आ सकती है।
कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया है कि कई दौर की बातचीत के बावजूद उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। बैंककर्मियों ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि इस हड़ताल के बाद भी उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती है तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। धरना-प्रदर्शन, रैलियां और अन्य आंदोलनात्मक कार्यक्रमों की भी चेतावनी दी गई है। कुल मिलाकर, 27 जनवरी की हड़ताल न केवल बैंकिंग सेक्टर के लिए बल्कि आम जनता और अर्थव्यवस्था के लिए भी अहम साबित हो सकती है।
हजरतगंज में प्रदर्शन व सभा का ऐलान
शुक्रवार को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के लखनऊ प्रधान कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में कामरेड दिनेश कुमार सिंह (महामंत्री, एनसीबीई) ने सरकार पर बैंककर्मियों की एकमात्र जायज मांग की उपेक्षा करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि बैंक शाखाओं में कर्मचारियों एवं अधिकारियों पर लगातार बढ़ते कार्यदबाव और मानसिक तनाव को देखते हुए पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करना समय की आवश्यकता है। रिजर्व बैंक, एलआईसी, सेबी, नाबार्ड, जीआईसी सहित अन्य वित्तीय एवं सरकारी संस्थानों में यह व्यवस्था पहले से लागू है, इसके बावजूद सरकार बैंककर्मियों की मांग को नजरअंदाज कर रही है।
AIBOC सेंट्रल कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रामनाथ शुक्ला ने बताया कि वर्तमान में बैंकों में दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश है। आईबीए एवं यूएफबीयू के बीच सहमति बनी थी कि शेष 2–3 शनिवारों को भी अवकाश घोषित किए जाने के बदले बैंककर्मी सोमवार से शुक्रवार तक प्रतिदिन 40 मिनट अतिरिक्त कार्य करेंगे, किंतु सरकार इस पर सहमत नहीं हो रही है।
उन्होंने बताया कि गुरुवार को मुख्य श्रमायुक्त के समक्ष हुई सुलह वार्ता भी सरकार की हठधर्मिता के कारण विफल रही। ऐसे में 27 जनवरी को देशव्यापी बैंक हड़तालका निर्णय लिया गया है। इस हड़ताल से आम जनता को होने वाली असुविधा की पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहाकि यदि देशव्यापी हड़ताल के बावजूद मांग पूरी नहीं हुई तो बैंककर्मी बड़ा निर्णय लेने को मजबूर होंगे।
यूएफबीयू के जिला संयोजक अनिल श्रीवास्तव ने बताया कि बैंककर्मियों ने धरना, प्रदर्शन, ट्विटर अभियान, रैलियों सहित कई माध्यमों से सरकार से मांग पूरी करने का आग्रह किया, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई है।
प्रेस वार्ता को फोरम के वरिष्ठ पदाधिकारियों लक्ष्मण सिंह, आर.एन. शुक्ला, शकील अहमद, वी.के. माथुर, संदीप सिंह, विभाकर कुशवाहा, प्रभाकर अवस्थी, बी.डी. पाण्डेय आदि ने भी संबोधित किया। फोरम के मीडिया प्रभारी अनिल तिवारी ने बताया कि 27 जनवरी को हड़ताल के दिन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंककर्मी इंडियन बैंक, हजरतगंज में सुबह 11:30 बजे से सभा एवं विशाल प्रदर्शन करेंगे।
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