लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। बाल निकुंज इंग्लिश स्कूल, पलटन छावनी शाखा में सोमवार को “वैज्ञानिक दृष्टिकोण” विषय पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में फ्रांस की करमोन्ट एउरजने यूनिवर्सिटी के पोस्ट ग्रेजुएट साइंस स्कॉलर जुआन ने कक्षा 8, 9 और 11 के विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए भौतिक विज्ञान से जुड़े विषयों पर चर्चा की और उनके प्रश्नों का समाधान किया।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के आधार पर भौतिक विज्ञान की विभिन्न थ्योरी को सरल अंग्रेजी भाषा में समझाया। साथ ही स्क्रीन बोर्ड पर प्रयोगों के माध्यम से विषय को व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत किया, जिससे छात्र-छात्राओं को अवधारणाओं को समझने में आसानी हुई।

जुआन ने कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण के विकास के लिए केवल सिद्धांतों को याद करना पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को प्रयोगों के माध्यम से सीखने यानी “लर्निंग बाय डूइंग” की प्रक्रिया अपनानी चाहिए, जिससे वे प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर सकें। उन्होंने बताया कि प्रयोग आधारित अध्ययन से विद्यार्थियों में आलोचनात्मक चिंतन की क्षमता विकसित होती है और वे प्राप्त निष्कर्षों का तर्कसंगत विश्लेषण करना सीखते हैं।
उन्होंने शिक्षकों और विद्यार्थियों को सलाह दी कि कक्षा में पढ़ाते समय पाठ्यपुस्तक का उपयोग अवश्य किया जाए और सभी विद्यार्थियों के पास पुस्तकें उपलब्ध हों, ताकि सिद्धांत और प्रयोग दोनों को साथ-साथ समझा जा सके। उनका कहना था कि यदि विद्यालय में ही अध्ययन-अध्यापन की प्रक्रिया पूरी हो जाए तो घर पर अत्यधिक होमवर्क देने की आवश्यकता नहीं पड़ती और विद्यार्थियों को सीखे गए विषयों पर मनन-चिंतन का पर्याप्त समय मिल पाता है।

इस अवसर पर उन्होंने फ्रांस की करमोन्ट एउरजने यूनिवर्सिटी और जर्मनी की टेक्निकल यूनिवर्सिटी डॉर्टमंड की शिक्षा व्यवस्था और शिक्षण पद्धति से जुड़े अपने अनुभव भी शिक्षकों और विद्यार्थियों के साथ साझा किए। साथ ही समय प्रबंधन को सफलता का मूल आधार बताते हुए विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन और अगले दिन आने वाली कठिनाइयों पर शिक्षकों से चर्चा करने की सलाह दी।
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