लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। एएमए हर्बल ग्रुप ऑफ कंपनीज़ के को-फाउंडर एवं सीईओ तथा इंडियन इंडस्ट्रीज़ एसोसिएशन के पूर्व को-चेयरमैन यावर अली शाह को मैरीलैंड स्टेट यूनिवर्सिटी द्वारा हर्बल उद्योग, नैचुरल डाइंग और सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में उनके ऐतिहासिक वैश्विक योगदान के लिए मानद डॉक्टरेट ऑफ फिलॉसफी (ऑनोरिस कॉज़ा पीएचडी) स्वर्ण पदक सहित प्रदान की गई।
मैरीलैंड स्टेट यूनिवर्सिटी के डॉक्टोरल मॉनिटरिंग बोर्ड द्वारा जारी पुष्टिकरण पत्र के अनुसार यह सम्मान हर्बल एवं नैचुरल डाइंग उद्योग में इनोवेशन, पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण रोज़गार सृजन और अंतरराष्ट्रीय विस्तार में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए प्रदान किया गया। यह दीक्षांत समारोह 11 जनवरी 2026 को नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर के गुलमोहर हॉल में आयोजित किया गया। जिसमें देश-विदेश के शिक्षाविद्, वैज्ञानिक और उद्योग जगत के वरिष्ठ प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
यावर अली शाह ने वर्ष 2003 में हर्बल हेयर कलर विकसित किया और 2005 में वेजिटल बायो के रूप में दुनिया का पहला पीपीडी-फ्री नैचुरल हेयर कलर तैयार किया, जिसे अमेरिका में लॉन्च किया गया। इसके बाद यह 2006 में दुबई और 2010 में भारत में लॉन्च हुआ। भारत में यह पहला ऐसा हर्बल हेयर कलर बना जिसे डर्मेटोलॉजिस्ट की प्रिस्क्रिप्शन सूची में शामिल किया गया। जिससे यह दुनिया का पहला डॉक्टर-प्रिस्क्राइब्ड हर्बल हेयर कलर बना। आज उनके द्वारा विकसित वेजिटल बायो और सेफ कलर ब्रांड भारत और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपलब्ध हैं।

नैचुरल डाइंग के क्षेत्र में एएमए ने ऐतिहासिक तकनीकी उपलब्धि हासिल की है। जहाँ पारंपरिक इंडिगो डाइंग में चार घंटे लगते थे, वहीं एएमए ने इसे मात्र 40 सेकंड में संभव कर दिया। एएमए दुनिया की पहली कंपनी बनी जिसने नैचुरल इंडिगो को औद्योगिक रोप डाइंग प्रक्रिया में सफलतापूर्वक लागू किया। आज दुनिया के शीर्ष 20 डेनिम उत्पादकों में से 12 एएमए के ग्राहक हैं और एएमए विश्व की सबसे बड़ी नैचुरल इंडिगो निर्माता और निर्यातक कंपनी है।
श्री शाह की बेस्ट ऑफ वेस्ट विचार से अनार के छिलकों से खाकी रंग, खैर की लकड़ी से निकले अनुपयोगी काले कत्थे से ब्राउन डाई तथा लाख के कीड़े से शेलैक निकालने के बाद बचे मड से नारंगी और बैंगनी रंग विकसित किए गए। इससे कचरे में कमी आई और ग्रामीण क्षेत्रों में नया रोज़गार पैदा हुआ। इसके साथ ही हरड़, बहेड़ा और माजू फल जैसे वन उत्पादों को एकत्र करने में स्थानीय महिलाओं को रोजगार देकर सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण किया गया।
इंडिगो को यावर अली शाह ने भारत की एक नई कैश क्रॉप में परिवर्तित किया। जब उन्होंने इस क्षेत्र में कार्य शुरू किया, तब उत्तर भारत में केवल 70–80 एकड़ में इंडिगो की खेती होती थी, जो आज बढ़कर लगभग 15,000 एकड़ तक पहुँच चुकी है। हर एकड़ से दो लोगों को साल भर का रोज़गार मिलता है, एक किलोग्राम बायो इंडिगो बनाने में एक आदमी को दो दिन की या दो लोगों को एक दिन का रोज़गार मिलता है।
पिछले तीन वर्षों से एएमए उत्तर प्रदेश में इंडिगो को नई कैश क्रॉप के रूप में विकसित कर रही है और कृषि वैज्ञानिकों के साथ मिलकर इसकी खेती को 100 एकड़ तक बढ़ाने पर काम कर रही है। मेंथा की तुलना में इंडिगो से लगभग 20 प्रतिशत ज़्यादा कमाई होती है और एएमए इसका सबसे बड़ा खरीदार है, इसलिए किसानों को बाज़ार ढूंढने की ज़रूरत नहीं पड़ती। इंडिगो फरवरी में बोया जाता है और जून में काटा जाता है, जब खेत खाली रहते हैं, इसलिए किसान इसमें दिलचस्पी ले रहे हैं। इसकी खेती के बाद ज़मीन पहले से बेहतर फसल देती है क्योंकि इसकी जड़ों में नाइट्रोजन फिक्सेशन होता है और यह कार्बन डाइऑक्साइड का ज़्यादा उपयोग करता है, जिससे लोगों को रोज़गार मिलता है और पर्यावरण को भी फायदा होता है।
प्राचीन काल में कपड़ों को रंगने के लिए प्राकृतिक स्रोतों जैसे पौधे, फल, जड़ें, कीड़े और खनिज आदि का सहारा लिया जाता था। इसमें इंडिगो (नील), हल्दी, गेरू, लाख आदि।
वहीं अगर 19वीं सदी की बात की जाए तो कृत्रिम (सिंथेटिक) रंगों के आविष्कार के बाद यह पारंपरिक कला लगभग समाप्त होने लगी। क्योंकि कृत्रिम रंग सस्ते और चटक होने के साथ टिकाऊ भी होती थे। लेकिन इनसे पर्यावरण प्रदूषण, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ने लगी। इन समस्याओं से निपटने और सस्टेनेबल फैशन की बढ़ती मांग के कारण प्राकृतिक रंगों की कला का दुनियाभर में पुनरुद्धार शुरु हुआ। एएमए हर्बल इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। इस प्राचीन विरासत को बचाने के साथ-साथ आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप ढाला जा रहा है।
यावर अली शाह 2015 से आईएसओ टीसी-38 पैनल पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और बीआईएस के पैनल सदस्य भी हैं। उन्होंने आईटीएमए मिलान (इटली) में एनर्जी एफिशिएंट डाइंग विद नैचुरल डाइज़ विषय पर शोध पत्र प्रस्तुत किया, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली। उनके नेतृत्व में एमएमए हर्बल लेबोरेटरीज प्राइवेट लिमिटेड, वेजिटल बायोएक्टिविटीज प्राइवेट लिमिटेड और वेजिटल वेलनेस प्राइवेट लिमिटेड प्राकृतिक रंगों, आयुर्वेदिक, डर्मा, फार्मा और वेलनेस क्षेत्रों में कार्य कर रही हैं।
इस अवसर पर यावर अली शाह ने कहा, “एएमए मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्राकृतिक और हर्बल समाधानों पर लगातार कार्य कर रही है और यह सम्मान पूरे भारतीय हर्बल उद्योग की ग्लोबल पहचान का प्रतीक है।”
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