लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। उत्तर प्रदेश के चीनी उद्योग के कर्मचारियों के वेतन पुनरीक्षण और बोनस निर्धारण के लिए समिति का गठन सहित श्रमिको की विभिन्न मांगों कों लेकर उत्तर प्रदेश चीनी मिल मजदूर संघर्ष समिति के संयोजक उमा शंकर मिश्र के नेतृत्व में बुधवार को केंद्रीय श्रम संगठनों बीएमएस, एचएमएस, एटक और सीटू के प्रतिनिधियों ने प्रमुख सचिव श्रम अनिल कुमार तृतीय से उनके कार्यालय में मिलकर प्रतिवेदन सौंपा।
प्रतिनिधि मंडल में सीटू के प्रदेश महामंत्री प्रेम नाथ राय, एटक के प्रदेश महामंत्री चंद्र शेखर, बीएमएस के नेता राम निवास सिंह और केके शर्मा, हिंद मजदूर सभा के प्रदेश मंत्री अविनाश पाण्डेय, एचएमएस के प्रदेश संगठन मंत्री विद्याकांत तिवारी शामिल थे।
इस अवसर पर श्रमिको की समस्याओं को रखते हुए उमा शंकर मिश्र ने कहाकि चीनी मिल कर्मचारियों का पिछला वेतन पुनरीक्षण अधिसूचना 29 जून 22 के माध्यम से हुआ था। उक्त वेतन दरें 1 अक्टूबर 22 से 30 सितंबर 2023 तक लागू थी, 1 अक्टूबर 2023 से वेतन पुनरीक्षित हो जाना चाहिए था लेकिन अभी तक वेतन पुनरीक्षण के लिए समिति तक गठित नही हो सकी है। चीनी मिल मजदूरों के बोनस तय करने के लिए 2006 के बाद बोनस समिति का भी गठन नही हुआ। इसी प्रकार 2014 के बाद न्यूनतम मजदूरी अधिनियम से आच्छादित उद्योगों, वर्ष 2016 से 50 से ज्यादा श्रमिको को नियोजित करने वाले इंजीनियरिंग उद्योगों, होटल और डिस्टलरी तथा कांच और बीड़ी उद्योग के मजदूरों का वेतन पुनरीक्षित नही हुआ है। जबकि अधिनियम के अनुसार प्रत्येक पांच साल पर वेतन पुनरीक्षण हो जाना चाहिए।
श्री मिश्र ने श्रम समस्याओं के स्थाई निराकरण के लिए स्थाई श्रम समिति का पुनर्गठन और उसकी नियमित बैठकें आहूत करने की भी मांग की। उन्होंने प्रदेश के श्रम न्यायालय और आद्योगिक न्यायाधिकरण में पीठासीन अधिकारियो के ख़ाली पड़े पदों और श्रम विवादों के बीसियो वर्षो तक लंबित रहने का भी मुद्दा उठाया।
प्रतिनिधि मंडल को विस्तार से सुनने के उपरांत प्रमुख सचिव ने आश्वस्त किया कि चीनी उद्योग के वेतन पुनरीक्षण और बोनस समिति का गठन शीघ्र कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा की श्रम न्यायालय और वादों के निपटारे तथा ट्रेड यूनियन पंजीकरण संबंधी प्रक्रियाओं को ऑनलाइन किया जा रहा है जिससे प्रक्रिया में सुधार होगा। पीठासीन अधिकारियों के रिक्त पदों को भरे जाने की प्रक्रिया शीघ्र करने के लिए उन्होंने अनुभाग अधिकारी को निर्देशित किया। साथ ही अन्य श्रम समस्याओं पर जुलाई के दूसरे सप्ताह में श्रमिक प्रतिनिधियों से वार्ता हेतु समय सुनिश्चित करते हुए प्रमुख सचिव ने अनुरोध किया कि श्रम समस्याओं और मांगों का विस्तृत प्रतिवेदन उनके कार्यालय में उपलब्ध करा दिया जाए जिससे संबंधित अधिकारियों से पूर्व आख्या लेकर आवश्यक निर्णय लिया जा सके।
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