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जगरानी हॉस्पिटल : पिंक प्रॉमिस 2026’ में महिलाओं को मिला ब्रेस्ट कैंसर से बचाव का संदेश

ब्रेस्ट कैंसर से बचाव के लिए महिलाएं खुद करें जांच, मैमोग्राफी भी जरूरी : डॉ. सोनिया नित्यानंद

लखनऊ (शम्भू शरण वर्मा/ टेलीस्कोप टुडे)। कम उम्र की महिलाएं भी स्तन कैंसर की चपेट में आ रही हैं। ऐसे में इस बीमारी के कारणों, बचाव और समय रहते इसकी पहचान के प्रति महिलाओं को जागरूक करना बेहद जरूरी है। कैंसर के बारे में आज भी लोगों में पर्याप्त जानकारी का अभाव है, जबकि इसके बचाव और शुरुआती पहचान पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। जगरानी हॉस्पिटल द्वारा शुक्रवार को आयोजित स्तन कैंसर जागरूकता एवं शिक्षा कार्यक्रम “जगरानी पिंक प्रॉमिस 2026 प्रॉमिस फॉर एवरी वुमन” में उक्त बातें बतौर मुख्य अतिथि मौजूद केजीएमयू की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने कहीं।

कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ करने के पश्चात उन्होंने कहा कि स्तन कैंसर से बचाव के लिए सबसे महत्वपूर्ण है कि महिलाओं में इस बीमारी को लेकर जागरूकता हो। प्रत्येक महिला को स्वयं स्तन परीक्षण (सेल्फ एग्जामिनेशन) की जानकारी होनी चाहिए और नियमित रूप से अपना परीक्षण करना चाहिए। यदि स्तन में किसी तरह की गांठ, असामान्य बदलाव या कोई अन्य परेशानी महसूस हो तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और अपनी समस्या के बारे में खुलकर बताना चाहिए।

डॉ. सोनिया नित्यानंद ने कहा कि स्तन कैंसर की शुरुआती अवस्था में पहचान हो जाए तो इसका उपचार संभव है। अर्ली डिटेक्शन यानी समय रहते बीमारी का पता लगना ही इसे ठीक करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे इलाज की सफलता की संभावना बढ़ती है और उपचार पर होने वाला खर्च भी कम हो जाता है। इसलिए प्रत्येक महिला को सेल्फ एग्जामिनेशन का सही तरीका मालूम होना चाहिए, ताकि वह शुरुआती लक्षणों को पहचान सके।

उन्होंने मैमोग्राफी की महत्ता बताते हुए कहा कि यह एक विशेष मशीन के माध्यम से की जाने वाली जांच है, जिससे स्तन कैंसर का शुरुआती अवस्था में पता लगाया जा सकता है। जिन महिलाओं के लिए यह सुविधा उपलब्ध है, उन्हें नियमित रूप से मैमोग्राफी करानी चाहिए। विशेष रूप से स्तन में किसी तरह की संदिग्ध गांठ या बदलाव महसूस होने पर तत्काल डॉक्टर से परामर्श लेकर यह जांच करानी चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली हर महिला के लिए मैमोग्राफी करा पाना संभव नहीं है, लेकिन जिन महिलाओं को इसकी सुविधा मिल सकती है, उन्हें इसका लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने नियमित अंतराल पर, कम से कम हर दो साल में मैमोग्राफी कराने की सलाह भी दी।

उन्होंने कहा कि स्तन कैंसर से लड़ाई में जागरूकता, स्वयं परीक्षण और समय पर चिकित्सकीय जांच सबसे अहम हैं। बीमारी को छिपाने या लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते डॉक्टर तक पहुंचना ही बेहतर उपचार की दिशा में पहला कदम है।

कार्यक्रम के दौरान महिलाओं में स्तन कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने, बीमारी की समय पर पहचान के महत्व को समझाने और महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर खुलकर संवाद हुआ। विशेषज्ञों ने स्तन कैंसर के लक्षणों, जोखिम कारकों, शुरुआती पहचान, उपचार के विकल्पों तथा पोषण की भूमिका पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं को स्तन कैंसर के प्रति जागरूक रहने, नियमित स्वास्थ्य जांच कराने और बीमारी से जुड़े भ्रम तथा झिझक को दूर करने का संदेश दिया गया।

जगरानी हॉस्पिटल के प्रबंध निदेशक डॉ. प्रवीण चन्द्रवंशी ने कहा कि स्तन कैंसर जागरूकता माह के तहत महिलाओं को बीमारी की शुरुआती पहचान और बचाव के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है। उन्होंने कहा कि अक्सर देखने में आता है कि महिलाओं को स्तन कैंसर का पता काफी देर से चलता है। इसका प्रमुख कारण जागरूकता की कमी और सामाजिक झिझक है। यदि महिलाएं जागरूक हों और नियमित रूप से अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें, तो बीमारी की शुरुआती अवस्था में पहचान संभव है। हमारा प्रयास है कि महिलाएं स्वयं जागरूक होने के साथ अपने परिवार की अन्य महिलाओं, बेटियों और रिश्तेदारों को भी इसके प्रति जागरूक करें तथा उन्हें बताएं कि स्तन कैंसर के शुरुआती लक्षणों की पहचान कैसे की जा सकती है।

डॉ. चन्द्रवंशी ने कहा कि आज कम उम्र की महिलाओं में भी स्तन कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं। इसके पीछे जीवनशैली और खानपान से जुड़े कई कारण हो सकते हैं। समाज में यह भ्रांति भी फैली हुई है कि बच्चों को स्तनपान कराने से महिलाओं का शारीरिक सौंदर्य प्रभावित होता है, इसलिए कुछ महिलाएं स्तनपान कराने से बचती हैं। जबकि स्तनपान मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है और इससे स्तन कैंसर का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति स्वयं जिम्मेदारी निभानी होगी। खानपान और दिनचर्या में सुधार करना भी जरूरी है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और जागरूक रहने से कई बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

इस अवसर पर डॉ. आकाश राजपूत ने कहा कि स्तन कैंसर महिलाओं में पाए जाने वाले प्रमुख कैंसरों में से एक है। ऐसे में इसके प्रति जागरूकता और समय रहते पहचान बेहद जरूरी है। स्तन कैंसर से बचाव, इसके लक्षणों की पहचान और बीमारी होने पर उपलब्ध उपचार के विकल्पों की सही जानकारी हर महिला तक पहुंचनी चाहिए। उन्होंने कहा कि समय पर बीमारी का पता चलने और उचित उपचार शुरू होने से बेहतर परिणाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना चाहिए और किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

प्रो. डॉ. नितिन रंजन गुप्ता (एमडी, मेडिसिन, डीएनबी एंडोक्रोनोलॉजी) ने कहा कि स्तन कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जिसकी समय पर पहचान होने पर सफलतापूर्वक उपचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कम उम्र की युवतियों से लेकर बुजुर्ग महिलाओं तक किसी को भी स्तन कैंसर हो सकता है। इसलिए हर उम्र की महिला को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना चाहिए और नियमित रूप से स्वयं अपने स्तनों की जांच करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि कई बार महिलाएं बीमारी के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं, जिससे समय पर जांच और उपचार का महत्वपूर्ण अवसर निकल जाता है। स्तन में किसी भी प्रकार की गांठ, असामान्य स्राव या सूजन दिखाई देने पर, भले ही उसमें दर्द न हो, तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और आवश्यक जांच करानी चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि समय रहते बीमारी का पता चलने पर उपचार की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसलिए महिलाओं को झिझक छोड़कर नियमित जांच और समय पर चिकित्सकीय परामर्श को अपनी प्राथमिकता बनाना चाहिए।

डॉ. शशांक निगम (एमएस, जनरल सर्जरी) ने कहा कि अक्टूबर माह को स्तन कैंसर जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। हालांकि शरीर के प्रत्येक अंग के कैंसर के प्रति जागरूकता जरूरी है, लेकिन स्तन कैंसर के मामले में जागरूकता अभियान का विशेष महत्व है।उन्होंने कहा कि जागरूकता अभियान का उद्देश्य उन महिलाओं तक भी सही जानकारी पहुंचाना है, जो घरों में रहती हैं और बीमारी के लक्षणों से अनजान हैं। 

डॉ. निगम ने कहा कि स्तन में किसी भी तरह का बदलाव महसूस होने पर बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इस बीमारी में जितनी जल्दी उपचार शुरू होता है, परिणाम उतने ही बेहतर होते हैं। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें और स्तन कैंसर के किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें।

डॉ. रितु सिंह (पीएचडी, पोषण विशेषज्ञ) ने बताया कि जीवनशैली में तनाव, असंतुलित खानपान और बढ़ता वजन स्तन कैंसर के जोखिम से जुड़े कारक हो सकते हैं। जिन महिलाओं के परिवार में मां या बहन को स्तन कैंसर रहा है, उन्हें विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। मेनोपॉज के दौरान महिलाओं को नियमित जांच और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को जागरूक करने के लिए डिजिटल माध्यमों के साथ-साथ सामूहिक जागरूकता कार्यक्रम भी महत्वपूर्ण हैं। यदि एक समूह में आठ महिलाएं हैं, तो उनमें से किसी एक को स्तन कैंसर होने की आशंका हो सकती है। इसलिए सही जानकारी अधिक से अधिक महिलाओं तक पहुंचाना जरूरी है।

रितु सिंह ने कहा कि किसी भी बीमारी से बचाव और बेहतर स्वास्थ्य के लिए जीवनशैली, संतुलित पोषण और शारीरिक गतिविधियों की अहम भूमिका होती है। महिलाओं को अपने खानपान और दिनचर्या को व्यवस्थित रखना चाहिए। स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के बाद भी यदि किसी स्वास्थ्य समस्या के लक्षण दिखाई दें, तो चिकित्सक से परामर्श लेने में देरी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वस्थ जीवनशैली, उचित पोषण और समय पर चिकित्सा परामर्श महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।

कार्यक्रम में स्तन कैंसर जागरूकता क्विज, विशेषज्ञों के साथ संवाद तथा स्तन स्वास्थ्य जागरूकता प्रतिज्ञा जैसी गतिविधियाँ शामिल रहीं। क्विज के माध्यम से प्रतिभागियों को स्तन कैंसर से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियों से जोड़ने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि किसी भी असामान्य बदलाव को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए और आवश्यकता होने पर समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।