लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। दुर्घटना में गंभीर चोट लगने के बाद समय पर इलाज मिलने से जान बचाने और लंबे समय तक रहने वाली दिव्यांगता का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है। इसी बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल ने विश्व ट्रॉमा दिवस के बाद एक जागरूकता सत्र आयोजित किया। इसमें चोट लगने के बाद के शुरुआती महत्वपूर्ण समय यानी गोल्डन आवर की अहमियत बताई गई। इस दौरान तेजी से जांच, सही समय पर चोट की पहचान और अलग-अलग विशेषज्ञों के तालमेल से किया गया इलाज जानलेवा जटिलताओं को रोकने में अहम भूमिका निभा सकता है।
इस सत्र में न्यूरोसर्जरी, इमरजेंसी मेडिसिन, ऑर्थोपेडिक्स और डेंटल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। डॉ. मनु रस्तोगी (सीनियर डायरेक्टर, न्यूरोसर्जरी), डॉ. सतिंदर पाल सिंह तुलसी (डायरेक्टर, डेंटल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी), डॉ. दिव्यांशु दत्त द्विवेदी (एसोसिएट डायरेक्टर, ऑर्थोपेडिक्स) और डॉ. सौरभ कुमार सिंह (कंसल्टेंट एवं इंचार्ज, इमरजेंसी मेडिसिन) ने गंभीर चोटों की पहचान, एंबुलेंस की त्वरित उपलब्धता और समय पर इमरजेंसी इलाज शुरू करने के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि गंभीर चोटों के मामलों में अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।

उन्होंने चेहरे की गंभीर चोटों से जुड़े 2 जटिल मामलों की जानकारी भी साझा की। इनमें 12 वर्षीय सार्थक पांडेय का मामला शामिल है, जिन्हें साइकिल दुर्घटना में चेहरे पर गंभीर चोट लगी थी। उनके निचले जबड़े की 3 अलग-अलग जगहों पर हड्डी टूट गई थी, जिससे चेहरे की बनावट भी प्रभावित हुई थी। उन्हें मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल लाया गया। यहां डेंटल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के डायरेक्टर, डॉ. सतिंदर पाल सिंह तुलसी ने सर्जरी के जरिए जबड़े की टूटी हड्डियों को सही जगह पर लाकर स्थिर किया। इलाज और रिकवरी के बाद बच्चे के चेहरे की बनावट को दोबारा ठीक करने में मदद मिली और वह सामान्य जीवन में लौट आया।
दूसरा मामला 35 वर्षीय सिद्धार्थ सिंह का था, जिन्हें दुर्घटना में चेहरे पर गंभीर चोट लगी थी। उनके चेहरे की कई हड्डियां छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट गई थीं। कई अस्पतालों में इलाज कराने के बाद वह मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल पहुंचे। यहां डॉ. तुलसी और उनकी टीम ने सर्जरी के जरिए चेहरे की टूटी हड्डियों को सावधानीपूर्वक दोबारा सही जगह पर जोड़ा और मिनी टाइटेनियम प्लेटों की मदद से उन्हें स्थिर किया। क्षतिग्रस्त दांतों को भी बदला गया, जिससे दांतों के सही तरीके से मिलने में मदद मिली। इस उपचार से चेहरे की बनावट और उसकी कार्यक्षमता को दोबारा बेहतर बनाने में मदद मिली।

इन मामलों पर बात करते हुए डॉ. सतिंदर पाल सिंह तुलसी ने कहा, “चेहरे की गंभीर चोटों, खासकर जब कई जगहों पर हड्डियां टूट जाती हैं, तो सर्जरी की सही योजना बनाना और हड्डियों को दोबारा सही स्थिति में लाना बहुत जरूरी होता है। इससे चेहरे की बनावट के साथ चबाने और जबड़े को हिलाने जैसी जरूरी क्रियाओं को भी ठीक करने में मदद मिलती है। बच्चों के मामले में यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि इलाज के दौरान चेहरे की हड्डियों के विकास और भविष्य में उनके सही तरीके से काम करने का ध्यान रखना पड़ता है। ये मामले बताते हैं कि गंभीर चोटों में समय पर इलाज और मैक्सिलोफेशियल सर्जरी के विशेषज्ञों का अनुभव कितना महत्वपूर्ण है। सही सर्जरी से चेहरे की बनावट और उसकी कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है, ताकि मरीज सामान्य जीवन में लौट सकें।”
चेहरे पर गंभीर चोटों का इलाज कई चुनौतियों से जुड़ा होता है। ऐसी चोटें मरीज की शक्ल के साथ-साथ चबाने और जबड़े को हिलाने जैसी जरूरी क्रियाओं को भी प्रभावित कर सकती हैं। खासकर जब चेहरे की कई हड्डियां टूट गई हों, तो उन्हें सही स्थिति में जोड़ने और स्थिर रखने के लिए समय पर इलाज और विशेषज्ञता जरूरी होती है।
सिर और मस्तिष्क की चोटों के बारे में बात करते हुए डॉ. मनु रस्तोगी ने कहा, “सिर में चोट लगने पर उसकी गंभीरता का तुरंत पता नहीं चल पाता। सिर के अंदर खून बहना, मस्तिष्क में सूजन आना या रीढ़ से जुड़ी चोटों के कारण मरीज की स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है और तुरंत इलाज की जरूरत पड़ सकती है। समय पर जांच और ऐसी सुविधा वाले अस्पताल में इलाज, जहां गंभीर चोटों के लिए सभी जरूरी विशेषज्ञ और संसाधन उपलब्ध हों, जटिलताओं को रोकने और मरीज के ठीक होने की संभावना बढ़ाने में मदद कर सकता है।”
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