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रोजगार और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दे रही हिलटॉप ट्रेडर्स

हिलटॉप कम्पनी प्रतिदिन बनाती है 24 लाख बोतल कैप, 40% उत्पादन में रीसायकल सामग्री का होता है उपयोग

उत्तर प्रदेश में कोका-कोला के कई संयंत्रों को PET प्रीफॉर्म और बोतल कैप की आपूर्ति करती है कंपनी

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के विजन के अनुरूप प्रदेश में औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार सृजन को लगातार बढ़ावा मिल रहा है। इसी दिशा में लखनऊ का यूपीसीडा (UPSIDA) कुर्सी रोड औद्योगिक क्षेत्र खाद्य प्रसंस्करण, पेय पदार्थ और उनसे जुड़े विनिर्माण उद्योगों के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। यहां स्थापित औद्योगिक इकाइयां स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने के साथ आपूर्ति श्रृंखला को भी मजबूत कर रही हैं। 

इसी कड़ी में हिलटॉप ट्रेडर्स प्राइवेट लिमिटेड पेय पदार्थों की पैकेजिंग के लिए पॉलीएथिलीन टेरेफ्थेलेट (PET) प्रीफॉर्म और बोतल कैप का बड़े पैमाने पर निर्माण कर रही है। कंपनी प्रतिदिन लगभग 24 लाख बोतल कैप का उत्पादन करती है। साथ ही, अपने कुल उत्पादन के लगभग 40 प्रतिशत हिस्से, विशेषकर पेट प्रीफॉर्म, में पुनर्चक्रित (रीसायकल) सामग्री का उपयोग कर संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और टिकाऊ विनिर्माण को बढ़ावा दे रही है।

करीब 12 एकड़ क्षेत्र में फैली कंपनी में 100 से अधिक नियमित कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि लगभग 100 अंशकालिक कर्मचारी भी इससे जुड़े हैं। इस तरह कंपनी स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और औद्योगिक गतिविधियों को गति देने में योगदान दे रही है।

कोका-कोला के कई संयंत्रों को होती है आपूर्ति

हिलटॉप ट्रेडर्स उत्तर प्रदेश के पेय पदार्थ विनिर्माण क्षेत्र की आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। कंपनी राज्य में कोका-कोला के दो से तीन से अधिक संयंत्रों को पीईटी प्रीफॉर्म और पानी की बोतलों के कैप की आपूर्ति करती है। ये उत्पाद बोतलबंद पेय पदार्थों के निर्माण और पैकेजिंग के लिए आवश्यक हैं। बड़े पैमाने पर उत्पादन और नियमित आपूर्ति के माध्यम से कंपनी पेय पदार्थ उद्योग की जरूरतों को पूरा करने में सहयोग कर रही है।

40 प्रतिशत उत्पादन में पुनर्चक्रित सामग्री का इस्तेमाल

कंपनी के तकनीकी एवं व्यावसायिक प्रमुख उमेश मिश्र ने बताया कि इस प्लांट की विनिर्माण प्रक्रिया की एक प्रमुख विशेषता रीसायकल सामग्री का उपयोग है। कंपनी के अनुसार, उसके कुल उत्पादन का लगभग 40 प्रतिशत, विशेषकर पीईटी प्रीफॉर्म, पुनर्चक्रित सामग्री से तैयार किया जाता है। इससे नए प्लास्टिक पर निर्भरता कम करने, उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और कचरे को कम करने में मदद मिलती है। यह पहल पैकेजिंग उद्योग में सर्कुलर इकोनॉमी (चक्रीय अर्थव्यवस्था) की अवधारणा को मजबूत करती है।

उन्होंने कहा कि किसी भी औद्योगिक इकाई की स्थापना और संचालन के लिए सरकार का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण होता है। उद्योग लगाने के लिए विभिन्न विभागों से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी), जरूरी अनुमतियां और अन्य स्वीकृतियां प्राप्त करनी पड़ती हैं। हिलटॉप ट्रेडर्स को भी इन प्रक्रियाओं में सरकार और इन्वेस्ट यूपी की ओर से सहयोग मिला। शुरुआती दौर में मिले सहयोग से इकाई को स्थापित करने और संचालन शुरू करने में मदद मिली।

उमेश मिश्र ने कहाकि औद्योगिक विकास के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होना इस इकाई की बड़ी उपलब्धि है। यहां कार्यरत कर्मचारियों में स्थानीय लोगों की संख्या अधिक है, जबकि कुछ कर्मचारी अन्य क्षेत्रों से भी आते हैं। कंपनी की कोशिश रहती है कि स्थानीय लोगों को अधिक से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं। इससे क्षेत्र के लोगों को अपने आसपास ही काम मिलने के साथ उनकी आजीविका को भी सहारा मिलता है।

उन्होंने कहा कि उद्योगों की स्थापना से क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं और रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं। सरकार के सहयोग से औद्योगिक इकाइयों को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है, जिसका लाभ उद्योग के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी मिलता है।

कुर्सी रोड औद्योगिक क्षेत्र बन रहा रोजगार का प्रमुख केंद्र

यूपीसीडा का कुर्सी रोड औद्योगिक क्षेत्र विनिर्माण, खाद्य प्रसंस्करण और पेय पदार्थ उद्योग के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हुआ है। यहां कोका-कोला, ज्ञान डेयरी, एसएलएमजी बेवरेजेज सहित कई औद्योगिक और कृषि आधारित इकाइयां संचालित हैं। इन इकाइयों से मिलकर क्षेत्र में 5,000 से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है। औद्योगिक इकाइयों की मौजूदगी स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं, परिवहन और अन्य सहायक व्यवसायों के लिए भी अवसर पैदा कर रही है।

उत्तर प्रदेश में औद्योगिक आधार का विस्तार, स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और टिकाऊ विनिर्माण को प्रोत्साहन राज्य की व्यापक विकास रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। ऐसे उद्योग निवेश, उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करते हुए प्रदेश को विनिर्माण के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने में योगदान दे रहे हैं।