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पितरों के श्राद्ध के साथ भगवान को भोग लगाने की परंपरा अपनाएं : पुंडरीक गोस्वामी

लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। श्री राधा रमण सेवा समिति के तत्वावधान में डीएवी कॉलेज ऐशबाग में चल रही श्रीमद्भागवत राधा रमण कथा के तीसरे दिन कथा स्थल भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा। कथा व्यास पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज के पधारने से पूर्व श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया। हनुमान जी के जयकारों से पूरा पंडाल गूंज उठा और वातावरण भक्तिमय हो गया।

महाराज जी के कथा स्थल पर पहुंचने के बाद हरे कृष्ण महामंत्र के साथ “जय जय राधा रमण, हरि बोल” का संकीर्तन कराया गया। हरिनाम संकीर्तन शुरू होते ही पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे। राधा रमण के जयकारों और हरिनाम संकीर्तन से पूरा वातावरण आध्यात्मिक उल्लास से भर गया।

हनुमान जी की उपस्थिति को बताया मंगलकारी

पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज ने कहा कि कथा में हनुमान जी का विराजमान होना अत्यंत मंगलकारी है। कथा परंपरा में हनुमान जी व्यास जी के कथा प्रारंभ करने से पहले विराजते हैं और आरती के बाद ही विदा होते हैं। उनकी उपस्थिति कथा में भक्ति, शक्ति और भगवान के प्रति समर्पण का भाव जगाती है।

पितृ पक्ष में श्राद्ध और भगवान को भोग का महत्व

पितृ पक्ष की एकादशी के अवसर पर महाराज जी ने श्रद्धालुओं को श्राद्ध के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि पितृ पक्ष में अपनी-अपनी तिथि के अनुसार पितरों का श्राद्ध करना चाहिए और श्रद्धापूर्वक ब्राह्मण को भोजन कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में भोजन ग्रहण करने से पहले उसे भगवान को समर्पित करने की भावना है। इसलिए श्री ठाकुर जी को भोग लगाकर ही भोजन ग्रहण करना चाहिए। भगवान को अर्पित किया गया भोजन प्रसाद बन जाता है और प्रसाद ग्रहण करना भी भक्तिभाव की साधना है।

कथा में यजमान अमरनाथ मिश्र, राजेंद्र कुमार अग्रवाल, अनिल कुमार अग्रवाल, लोकेश अग्रवाल, रोहित अग्रवाल, अमित अग्रवाल, समीर मित्तल, नवीन गुप्ता, अनुराग मिश्रा, आनंद रस्तोगी, शिवम अग्रवाल, सुनील कुमार मिश्रा, मनोज राय, कुश मिश्रा, दिव्यांशु शुक्ला और साकेत शर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु परिवार सहित उपस्थित रहे। भक्तों ने कथा का श्रवण कर आध्यात्मिक एवं भक्तिमय वातावरण में कथा का रसपान किया। कथा के समापन पर विधिवत आरती हुई। इसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।

सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों ने संभाली व्यवस्था

कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और यातायात व्यवस्था में सिविल डिफेंस के स्वयंसेवकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डिवीजनल वार्डेन सुनील शुक्ला, डॉ. दिनेश माथुर, नफीस, मुशीर अहमद और मजीद अली सहित स्वयंसेवकों ने पंडाल की व्यवस्था के साथ यातायात संचालन को भी सुचारु बनाए रखा।