लखनऊ (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। भारत के लाखों परिवारों के लिए एक गंभीर बीमारी वर्षों की जमा-पूंजी को खत्म कर सकती है। देश की करीब आधी आबादी अब किसी न किसी स्वास्थ्य बीमा या स्वास्थ्य वित्तपोषण योजना के दायरे में है, लेकिन इसके बावजूद कई परिवार अब भी पर्याप्त बीमा कवर से वंचित हैं। गंभीर बीमारी के इलाज की लागत मौजूदा बीमा कवर से कहीं अधिक हो जाने के कारण परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
केयर हेल्थ इंश्योरेंस ने परिवारों से स्वास्थ्य बीमा को केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि मेडिकल इमरजेंसी के वित्तीय असर से सुरक्षा देने वाले जरूरी साधन के रूप में देखने की अपील की है। कई भारतीय स्वास्थ्य बीमा एक बार खरीदने के बाद उसकी समीक्षा नहीं करते। वहीं बड़ी संख्या में लोग केवल नियोक्ता की ओर से मिलने वाली ग्रुप हेल्थ पॉलिसी पर निर्भर रहते हैं। दूसरी ओर इलाज की लागत ज्यादातर लोगों की आय की तुलना में कहीं तेजी से बढ़ रही है और मौजूदा पॉलिसियों का कवर जल्द खत्म हो सकता है।
कुछ साल पहले पर्याप्त लगने वाला 2 से 5 लाख रुपये का बीमा कवर अब गंभीर बीमारी का इलाज पूरा होने से पहले ही खत्म हो सकता है। कवर खत्म होने के बाद परिवारों को अपनी बचत निकालने, संपत्ति बेचने या कर्ज लेने का सहारा लेना पड़ता है। इस तरह स्वास्थ्य संकट लंबे समय के वित्तीय बोझ में बदल जाता है। इसका असर केवल व्यक्तिगत परिवारों तक सीमित नहीं है। भारत में स्वास्थ्य सेवाओं पर जेब से होने वाला अधिक खर्च परिवारों की आर्थिक परेशानी का एक प्रमुख कारण बना हुआ है। ऐसे में व्यापक स्वास्थ्य बीमा कवरेज परिवारों की वित्तीय क्षमता मजबूत करने और भारत के सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है।
हालिया सरकारी रिपोर्ट और राष्ट्रीय स्वास्थ्य आकलन सुरक्षा में मौजूद इस अंतर की गंभीरता को सामने रखते हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के नेशनल हेल्थ अकाउंट्स एस्टिमेट्स के अनुसार भारत के कुल स्वास्थ्य खर्च का 43.4% अब भी परिवार अपनी जेब से वहन करते हैं। यह बताता है कि मेडिकल इमरजेंसी का आर्थिक बोझ परिवारों पर कितना अधिक है। नेशनल स्टैटिस्टिकल ऑफिस के हाउसहोल्ड कंजम्पशन एक्सपेंडिचर सर्वे: हेल्थ 2025 के अनुसार भारतीयों के अस्पताल में भर्ती होने से जुड़े खर्च में अब भी जेब से किया जाने वाला खर्च बड़ा हिस्सा है, यानी केवल बीमा होना हमेशा पर्याप्त वित्तीय सुरक्षा की गारंटी नहीं देता। बीमित परिवार भी अक्सर अंडरइंश्योर्ड हैं।
नियोक्ता की ग्रुप पॉलिसी और शुरुआती स्तर की फैमिली फ्लोटर पॉलिसियों में आमतौर पर 3 से 5 लाख रुपये तक का कवर होता है, जबकि एक बड़ी बीमारी के इलाज का खर्च इससे कई गुना अधिक हो सकता है। लिवर ट्रांसप्लांट में 18 से 35 लाख रुपये तक खर्च हो सकते हैं, वहीं एडवांस्ड कैंसर का इलाज और जटिल हृदय संबंधी प्रक्रियाओं में भी कई लाख रुपये खर्च हो सकते हैं। ऐसे में आज सवाल सिर्फ यह नहीं है कि क्या मेरे पास स्वास्थ्य बीमा है, बल्कि यह है कि क्या मेरे पास पर्याप्त कवर है।
Telescope Today | टेलीस्कोप टुडे Latest News & Information Portal