मुंबई (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) मुंबई के डायरेक्टर प्रोफेसर मनोज कुमार तिवारी ने कहा कि आने वाले समय में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर्स (डीएफसी) और मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क (एमएमएलपी) एक तेज़ और अधिक कुशल फ्रेट नेटवर्क बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे। इससे भारत देश भर में सामानों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के तरीके को बदलकर सालाना लगभग 7 लाख करोड़ रुपये बचा सकता है और साथ ही इससे करीब 1 करोड़ नौकरियां पैदा हो सकती हैं।
डीएफसी को एमएमएलपी के साथ जोड़ने से रेल, सड़क और ट्रांसपोर्ट के दूसरे तरीकों को ज़्यादा कुशलता से जोड़ने में मदद मिल सकती है। जिससे ट्रांज़िट टाइम कम होगा, सप्लाई-चेन की विश्वसनीयता बेहतर होगी और लॉजिस्टिक्स की लागत कम होगी।
उन्होंने कहा कि लॉजिस्टिक्स सेक्टर के विस्तार से ट्रांसपोर्टेशन, वेयरहाउसिंग, डिस्ट्रीब्यूशन और फ्रेट फॉरवर्डिंग में कई नई नौकरियां पैदा होंगी। प्रोफेसर तिवारी की आईआईएम मुंबई रिपोर्ट ‘फ्यूचर टैलेंट रिक्वायरमेंट्स इन लॉजिस्टिक्स: विज़न 2047’ के मुताबिक, लॉजिस्टिक्स सेक्टर को 2030 तक अतिरिक्त लगभग 1.15 करोड़ प्रोफेशनल्स की ज़रूरत पड़ने की उम्मीद है।
यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के तीन खास हिस्सों का उद्घाटन करने के कुछ दिनों बाद आई है, जब जेएनपीटी/नवी मुंबई को उत्तर प्रदेश के दादरी से जोड़ने वाला कॉरिडोर पूरा हो गया है। खास तौर पर माल ढुलाई के लिए बनाये गये 1,506 किमी के डब्ल्यूडीएफसी से कार्गो कैपेसिटी बढ़ने, ट्रांज़िट टाइम कम होने और माल ढुलाई का अंदाज़ा लगाना ज़्यादा आसान होने की उम्मीद है।
प्रोफेसर तिवारी ने डब्ल्यूडीएफसी को भारत के फ्रेट और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को बदलने की दिशा में एक ज़रूरी कदम बताया। वे बताते हैं “डब्ल्यूडीएफसी भारत के फ्रेट और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम है। मैं इसे भारत सरकार का एक बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट मानता हूं, जिसमें बिज़नेस और पूरी इकॉनमी को लंबे समय तक बड़े फायदे पहुंचाने की क्षमता है।”
प्रोफेसर तिवारी कहते हैं कि भारत की लॉजिस्टिक्स इंडस्ट्री अभी देश की जीडीपी में लगभग 13% का योगदान देती है, जबकि लॉजिस्टिक्स मार्केट, जिसका अनुमान 2022 में लगभग 22.95 लाख करोड़ रुपये का है, उसके वर्ष 2030 तक 47.12 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।
अगले फेज़ को रफ्तार देने वाली टेक्नोलॉजी
भारत की लॉजिस्टिक्स ग्रोथ का अगला फेज़ न सिर्फ़ फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर करेगा, बल्कि बेहतर कोऑर्डिनेशन और टेक्नोलॉजी पर भी निर्भर होगा। आईआईएम मुंबई की रिसर्च में कोऑर्डिनेटेड इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग, आसान जीएसटी और नियामक प्रक्रियाएं, आसान बिज़नेस प्रोसेस और ट्रांसपोर्ट के अलग-अलग तरीकों के बीच ज़्यादा डिजिटल इंटीग्रेशन की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया है।
एडवांस्ड एनालिटिक्स और एजेंटिक AI जैसी नई टेक्नोलॉजी, आने वाले समय में रियल-टाइम विज़िबिलिटी देकर, फ़ैसले लेने में मदद करके और ज़्यादा कुशल मल्टीमॉडल मूवमेंट को मुमकिन बनाकर माल ढुलाई के काम को और बेहतर बना सकती हैं। इसलिए डीएफसी, एमएमएलपी और डिजिटल लॉजिस्टिक्स सिस्टम के विस्तार से भारत को सप्लाई-चेन की लागत कम करने और रोज़गार के नए मौके पैदा करते हुए एक ज़्यादा इंटीग्रेटेड माल ढुलाई नेटवर्क बनाने में मदद मिल सकती है।
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