Friday , September 11 2026

बोल्ट.अर्थ रिपोर्ट का खुलासा : भारत में तेजी से बढ़ रहा ऊर्जा-गहन ईवी चार्जिंग इकोसिस्टम

हैदराबाद (टेलीस्कोप टुडे संवाददाता)। भारत का ईवी चार्जिंग इकोसिस्टम दो अलग-अलग दिशाओं में तेजी से विकसित हो रहा है। जहां चार्जिंग गतिविधियों में दोपहिया वाहनों का दबदबा है, वहीं कुल ऊर्जा खपत में चारपहिया वाहनों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। वर्ल्ड ईवी डे के अवसर पर जारी बोल्ट.अर्थ की ‘स्टेट ऑफ चार्ज: एक्सक्लूसिव ईवी डेटा रिपोर्ट 2026’ में यह बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार यह अंतर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरतों को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है और भारत में तेजी से विविधतापूर्ण तथा अधिक ऊर्जा-गहन ईवी इकोसिस्टम के विस्तार का संकेत दे रहा है।

छह प्रमुख महानगरों के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक कुल चार्जिंग सत्रों में दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 78.1 प्रतिशत रही, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 71.6 प्रतिशत थी। इसके विपरीत, चारपहिया वाहनों की हिस्सेदारी केवल 16 प्रतिशत चार्जिंग सत्रों की रही, लेकिन उन्होंने कुल खपत की गई ऊर्जा में 67.3 प्रतिशत का योगदान दिया। वित्त वर्ष 2024-25 में यह हिस्सेदारी 58.1 प्रतिशत थी। ये आंकड़े ऐसे चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं, जो व्यापक पहुंच के साथ-साथ अधिक ऊर्जा क्षमता की जरूरतों को भी पूरा कर सके।

यह रिपोर्ट बोल्ट.अर्थ के आंतरिक नेटवर्क टेलीमेट्री और परिचालन आंकड़ों पर आधारित है। इसमें बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और कोच्चि के बाजारों को शामिल किया गया है। आंकड़े वित्त वर्ष 2024-25, 2025-26 और वित्त वर्ष 2026-27 के अब तक के आंकड़ों को कवर करते हैं।

रिपोर्ट के निष्कर्षों पर बोल्ट.अर्थ के मार्केटिंग प्रमुख नितिन टीएस ने कहा, “भारत की ईवी कहानी अक्सर बिक्री के आंकड़ों के जरिए बताई जाती है, लेकिन चार्जिंग डेटा यह दिखाता है कि वाहनों का वास्तविक इस्तेमाल किस तरह हो रहा है। इस रिपोर्ट से स्पष्ट है कि दोपहिया और चारपहिया वाहन नेटवर्क पर बिल्कुल अलग तरह की मांग पैदा कर रहे हैं। दोपहिया वाहनों के लिए व्यापक, नियमित और आसानी से उपलब्ध चार्जिंग सुविधा की जरूरत है, क्योंकि चार्जिंग विजिट में उनका योगदान सबसे अधिक है। वहीं चारपहिया वाहनों को प्रत्येक विजिट में काफी अधिक ऊर्जा की जरूरत होती है। इसलिए सही स्थानों पर तेज और अधिक क्षमता वाले चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता है।”

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

महानगरों से अलग उभरते शहर, टियर-2/3 शहरों में तेज वृद्धि


बेंगलुरु 1,90,954 चार्जिंग सत्र और 5,26,990 kWh ऊर्जा खपत के साथ सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है। हैदराबाद और कोच्चि महानगरों में सबसे तेज वृद्धि दर्ज कर रहे हैं। वहीं दिल्ली-एनसीआर और मुंबई में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का अपेक्षाकृत कम उपयोग देखा गया। उभरते टियर-2 और टियर-3 शहरों में विजयवाड़ा, राजामहेंद्रवरम और तिरुवनंतपुरम सबसे तेज गति से मांग बढ़ाने वाले शहरों में शामिल हैं। इससे संकेत मिलता है कि देश का ईवी चार्जिंग नेटवर्क अब बड़े महानगरों से आगे तेजी से विस्तार कर रहा है।

दिन में चार्जिंग के दो अलग-अलग पीक


चार्जिंग सत्रों की संख्या शाम 6 बजे सबसे अधिक होती है, जिसमें दोपहिया वाहनों की बड़ी भूमिका रहती है। हालांकि ऊर्जा की मांग रात 9 बजे चरम पर पहुंचती है। यानी सबसे अधिक चार्जिंग सत्र और सबसे अधिक बिजली खपत का समय अलग-अलग है। इसका टैरिफ निर्धारण और बिजली ग्रिड की योजना पर सीधा असर पड़ सकता है।

फास्ट चार्जिंग सुविधा बढ़ा रही है, लेकिन ग्राहकों की निष्ठा जरूरी नहीं


फास्ट चार्जिंग लोगों के चार्जिंग के तरीके को तेजी से बदल रही है, लेकिन इससे अपने आप दीर्घकालिक ग्राहक निष्ठा नहीं बढ़ती। यह नेटवर्क की एक विशेष सुविधा के रूप में काम कर रही है। डीसी फास्ट चार्जिंग के जरिए चारपहिया वाहनों का औसत चार्जिंग सत्र 26.5 मिनट का रहता है, जबकि एसी चार्जिंग में यह समय 194.3 मिनट है। हालांकि, एसी चार्जिंग इस्तेमाल करने वाले ग्राहक 90 दिनों के भीतर दोबारा लौटने की दर में आगे हैं। यानी डीसी फास्ट चार्जिंग तत्काल जरूरत पूरी करती है, जबकि एसी चार्जिंग ग्राहकों की निरंतर भागीदारी बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है।

जलवायु के लिए भी सकारात्मक प्रभाव


वाहनों के प्रकार और वितरित ऊर्जा के आधार पर तैयार किए गए मॉडल अनुमानों के मुताबिक, केवल छह महानगरों में चार्जिंग गतिविधियों के कारण वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 473 टन शुद्ध CO₂ उत्सर्जन से बचाव हुआ। रिपोर्ट में शामिल सभी अवधि को मिलाकर उत्सर्जन में कमी का अनुमान 1,100 टन से अधिक है। यह दर्शाता है कि नेटवर्क स्तर पर हर चार्जिंग सत्र, चाहे वह कितना भी छोटा क्यों न हो, सामूहिक रूप से महत्वपूर्ण पर्यावरणीय लाभ देता है।

ईवी संक्रमण के अगले चरण के लिए पांच प्रमुख प्राथमिकताएं

रिपोर्ट में भारत के ईवी संक्रमण के अगले चरण के लिए पांच प्रमुख प्राथमिकताओं की पहचान की गई है। इनमें केवल महानगरों तक सीमित मॉडल से आगे बढ़कर टियर-2 और टियर-3 शहरों की मांग को पूरा करना, दोपहिया वाहनों के लिए व्यापक रूप से सुलभ नेटवर्क तैयार करना, चारपहिया वाहनों के लिए पर्याप्त ऊर्जा क्षमता सुनिश्चित करना, चार्जिंग सत्रों की संख्या के बजाय ऊर्जा मांग के पीक को ध्यान में रखकर योजना बनाना और फास्ट चार्जिंग को ग्राहक निष्ठा के बजाय सुविधा की एक परत के रूप में देखना शामिल है। साथ ही, कम आवृत्ति वाले और नियमित रूप से चार्जिंग करने वाले उपयोगकर्ताओं के लिए अलग-अलग रणनीति तैयार करने पर भी जोर दिया गया है।

नितिन ने कहा, “2030 तक प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त केवल उन नेटवर्क के पास नहीं होगी, जिनके पास सबसे अधिक चार्जर होंगे। बढ़त उन नेटवर्क को मिलेगी, जो सही बाजार में सही चार्जर लगा सकें, अलग-अलग उपयोग के लिए उपयुक्त चार्जिंग स्पीड उपलब्ध करा सकें, अधिक मांग के समय चार्जर की उपलब्धता बनाए रखें और वास्तविक उपभोक्ता व्यवहार के अनुसार बिजली की खपत का प्रबंधन कर सकें।”